मेरे संग की औरतें NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 2 with Answers PDF Download

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij with Answers

CBSE Solutions Class 9 Hindi मेरे संग की औरतें

Page No. 26

Q1. लेखिका ने अपनी नानी को कभी देखा भी नहीं फिर भी उनके व्यक्तित्व से वे क्यों प्रभावित थीं ?

Answer: लेखिका ने अपनी नानी को कभी देखा भी नहीं था, किंतु उनके बारे में सुना अवश्य था। उसने सुना था कि उसकी नानी ने अपनी जीवन के अंतिम दिनों में प्रसिद्ध क्रांतिकारी प्यारेलाल शर्मा से भेंट की थी। उस भेंट में उन्होंने यह इच्छा प्रकट की थी कि वे अपनी बेटी की शादी किसी क्रांतिकारी से करवाना चाहती हैं, अंग्रेजों के किसी भक्त से नहीं। उनकी इस इच्छा में देश की स्वतंत्रता की पवित्र भावना थी। यह भावना बहुत सच्ची थी, इसमें साहस था। जीवन-भर परदे में रहकर भी उन्होंने किसी पर-पुरुष से मिलने की हिम्मत की। इससे उनके साहसी व्यक्तित्व और मन में सुलगती हुई स्वतंत्रता की भावना का पता चला। लेखिका इन्हीं गुणों के कारण अपनी नानी की व्यक्तित्व से प्रभावित थी तथा उनका सम्मान करती थी।

Q2. लेखिका की नानी आज़ादी के आंदोलन में किस प्रकार की भागीदारी रही ?

Answer: लेखिका की नानी आजादी के आंदोलन में खुलकर भाग न ले सकी। उसकी परिस्थितियाँ ऐसी नहीं थीं कि वह खुलकर आंदोलनों में भाग ले सके। परंतु उसने स्वतंत्रता की भावना को मन-ही-मन पनपने दिया। उसने कभी अंग्रेजियत को स्वीकारा नहीं। उसका पति अंग्रेज़ों का भक्त था, फिर भी उसने कभी अंग्रेजों की जीवन शैली में भाग नहीं लिया। उसने सबसे बड़ा योगदान यह किया कि अपनी संतान को अंग्रेज भक्तों के शिकंजे से मुक्त करा लिया। उसने अपनी बेटी की शादी एक क्रांतिकारी से करा दी ताकि उसकी बेटी और उसके बच्चे देश के लिए कुछ कर सकें। इस घटना से क्रांतिकारियों को जो उत्साह मिला होगा, उसकी कल्पना ही की जा सकती है।

Q3. लेखिका की माँ परंपरा का निर्वाह न करते हुए भी सबके दिलों पर राज करती थी। इस कथन के आलोक में–

(क) लेखिका के माँ के व्यक्तित्व की विशेषताएँ लिखिए।

Answer: लेखिका की माँ बहुत ही नाजुक, सुंदर और स्वतंत्र विचारों की महिला थीं। उनमें ईमानदारी,निष्पक्षता और सचाई भरी हुई थी। वे अन्य माताओं की तरह कभी भी अपनी बेटी को अच्छे-बुरे की न सीख दी और न खाना पकाकर खिलाया । उनका अधिकांश समय अध्यन अथवा संगीत को समर्पित था। वे कभी झूठ नहीं बोलती थीं और न कभी इधर की बात उधर करती थीं । शायद यही कारण था कि हर काम में उनकी राय ली जाती थी और सब कोई उसे सहर्ष स्वीकारता भी था।

(ख) लेखिका की दादी के घर के महौल का शब्द-चित्र अंकित कीजिए।

Answer: उक्त कथन के आलोक में लेखिका की दादी के घर के माहौल में अनेक बातें कल्पना से परे लगने के बाद भी सत्य थी। वहाँ परिवार के सदस्यों को अपनी निजता बनाए रखने की छूट थी। वे अपने काम अपने ढंग से स्वतंत्रतापूर्वक करते थे। लेखिका की दादी संचय के विरुद्ध थी। वे अपनी तीसरी धोती दान दे देती थी। परिवार में महिलाओं की इज्ज़त थी। लेखिका की माँ की राय लेकर उसे महत्त्व दिया जाता था। लेखिका की दादी अपनी पुत्रवधू के गर्भवती होने पर मंदिर गई और पहली संतान कन्या के रूप में पाने की मन्नत माँगी । वे घर में पूजा-पाठ आदि के द्वारा धार्मिक वातावरण बनाए रखती थी।

Q4. आप अपनी कल्पना से लिखिए कि परदादी ने पतोहू के लिए पहले बच्चे के रूप में लड़की पैदा होने की मन्नत क्यों माँगी ?

Answer: परदादी ने पतोहू के लिए पहले बच्चे के रूप में लड़की पैदा होने की मन्नत इसलिए माँगी ताकि वे परंपरा से अलग चलने की जो बात करती थीं, उसे अपने कार्य-व्यवहार द्वारा सबको दर्शा सकें। इसके अलावा उनके मन में लड़का और लड़की में अंतर समझने जैसी कोई बात न रही होगी।

Q5. डराने-धमकाने, उपदेश देने या दबाव डालने की जगह सहजता से किसी को भी सही राह पर लाया जा सकता है – पाठ के आधार पर तर्क-सहित उत्तर दीजिये।

Answer: डराने-धमकाने, उपदेश देने या दबाव डालने की जगह सहजता से किसी को भी सही राह पर लाया जा सकता है। यह कथन इस पाठ ने बिलकुल सत्य कर दिखाया है। पाठ में माँ जी को जब पता चला कि उनके कमरे में चोर है तो भी उन्होंने उसके साथ बहुत सामान्य व अच्छा व्यवहार किया। उन्होंने चोर के हाथ से पानी पिया व उसे भी पिलाया जो कि किसी व्यक्ति के बुरे से अच्छे में बदलने के लिए काफ़ी है। चोर ने कभी भी अपने जीवन में इतना सम्मान नहीं पाया होगा जो कि उसे माँ जी ने दिया। माँ जी ने उसे इतना ही कहा था कि “तुम चोरी करो या खेती, यह तुम्हारी मर्जी” बस इतना कहने से ही चोर का हृदय परिवर्तन हो गया। उसने हमेशा के लिए चोरी छोड़ दी और खेती अपना ली।

Q6. ‘शिक्षा बच्चों का जन्मसिद्ध अधिकार है’-इस दिशा में लेखिका के प्रयासों का उल्लेख कीजिए।

Answer: लेखिका के अनुसार एक बार उनके घर में चोर घुस आया था। उस पर चोर की ही बदकिस्मती थी कि वह लेखिका की दादी माँ के कमरे में घुस गया। उनकी दादी माँ ने यह जानते हुए भी कि वह चोर है उसको न डराया न धमकाया बल्कि सहजता पूर्वक उसे सुधार दिया। उन्होंने न सिर्फ़ उसके हाथ का पानी पिया अपितु उसी लोटे से पानी पिलाकर उसे अपना बेटा बना लिया। जिसके परिणामस्वरूप उस चोर ने चोरी करना छोड़कर खेतीबाड़ी कर अपना पूरा जीवनयापन किया।

Q7. पाठ के आधार पर लिखिए कि जीवन में कैसे इंसानों को अधिक श्रद्धा भाव से देखा जाता है?

Answer: प्रस्तुत पाठ के आधार पर यह कहा जा सकता है कि ऊँची भावना वाले दृढ़ संकल्पी लोगों को श्रद्धा से देखा जाता है । जो लोग कभी झूठ नहीं बोलते और सच का साथ देते हैं । जो किसी की बात को इधर-उधर नहीं करते जिनके इरादे मजबूत होते हैं, जो हीन भावना से ग्रसित नहीं होते तथा जिनका व्यक्तित्व सरल, सहज एवं पारदर्शी होता है, जो लोग सद्भावना से व्यवहार करते हैं तथा आवश्यकता पडने पर गलत रूढ़ियों को तोड़ डालने की हिम्मत रखतें हैं, उन्हें पूरा समाज श्रद्धा भाव से देखता है।

Q8. ‘सच, अकेलेपन का मज़ा ही कुछ और है’-इस कथन के आधार पर लेखिका की बहन एवं लेखिका के व्यक्तित्व के बारे में अपने विचार व्यक्त कीजिए।

Answer: लेखिका व उनकी बहन एकांत प्रिय स्वभाव की थीं। लेखिका व उनकी बहन के व्यक्तित्व का सबसे खूबसूरत पहलू था – वे दोनों ही जिद्दी स्वभाव की थीं परन्तु इस जिद्द से वे हमेशा सही कार्य को ही अंजाम दिया करती थे। लेखिका कि जिद्द ने ही कर्नाटक में स्कूल खोलने के लिए प्रेरित किया था। वे दोनों स्वतंत्र विचारों वाले व्यक्तित्व की स्वामिनी थीं और इसी कारण जीवन में अपने उद्देश्यों को पाने में सदा आगे रहीं।

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