बालगोबिन भगत NCERT Solutions for Class 10 Hindi Chapter 11 with Answers free PDF Download

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NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitij-2 with Answers

CBSE Solutions Class 10 Hindi बालगोबिन भगत

Page No. 74

प्रश्न अभ्यास

Q1. खेतीबारी से जुड़े गृहस्थ बालगोबिन भगत अपनी किन चारित्रिक विशेषताओं के कारण साधु कहलाते थे?

Answer: खेतीबारी से जुड़े गृहस्थ बालगोबिन भगत वेशभूषा से साधु नहीं लगते थे परंतु उनका व्यवहार साधु जैसा था। वे कबीर के भगत थे। कबीर के ही गीत गाते थे। उनके बताए मार्ग पर चलते थे। वे कभी भी झूठ नहीं बोलते थे। वे कभी भी किसी से निरर्थक बातों के लिए नहीं लड़ते थे परंतु गलत बातों का विरोध करने में संकोच नहीं करते थे। वे कभी भी किसी की चीज को नहीं छूते थे और न ही व्यवहार में लाते थे। उनकी सब चीज साहब (कबीर) की थी। उनके खेत में जो पैदावार होती थी उसे लेकर कबीर के मठ पर जाते थे। वहाँ से उन्हें जो प्रसाद के रूप में मिलता था उसी में अपने परिवार का निर्वाह करते थे। बालगोबिन भगत की इन्हीं चारित्रिक विशेषताओं के कारण लेखक उन्हें साधु मानता था।

Q2. भगत की पुत्रवधू उन्हें अकेले क्यों नहीं छोड़ना चाहती थी?

Answer: पुत्र की मृत्यु के बाद भगत जी अकेले पड़ गए थे। भगत जी की पुत्रवधू उन्हें अकेले नहीं छोड़ना चाहती थी, क्योंकि उसे पता था कि घर में और कोई भी नहीं, जो भगत जी की सेवा करे। उसे चिंता थी कि यदि वह चली गई, तो उनके लिए खाना कौन बनाएगा? बीमार होने पर उन्हें दवा कौन देगा? अर्थात्‌ उनकी देखभाल कौन करेगा?

Q3. भगत ने अपने बेटे की मृत्यु पर अपनी भावनाएँ किस तरह व्यक्त कीं?

Answer: अपने बेटे की मृत्यु पर भगत ने अपनी भावनाएँ इस प्रकार व्यक्त कीं

  1. मृतक पुत्र को आँगन में चटाई पर लिटाकर सफेद कपड़े से ढंक दिया।
  2. मृतक पुत्र के ऊपर फूल और तुलसी के पत्ते बिखेर दिए और सिरहाने एक दीपक जलाकर रख दिया।
  3. उसके समीप आसन पर बैठकर हमेशा की तरह कबीर के पदों को गाने लगे और पतोहू को समझाने लगे कि आत्मा-परमात्मा में मिल गई है। विरहिणी अपने प्रेमी (ईश्वर) से जाकर मिल गई है।
  4. पतोहू को समझाते हैं कि यह समय रोने का न होकर उत्सव मनाने का है।

Q4. भगत के व्यक्तित्व और उनकी वेशभूषा का अपने शब्दों में चित्र प्रस्तुत कीजिए।

Answer: बालगोबिन भगत एक गृहस्थ थे लेकिन उनमें साधु संन्यासियों के गुण भी थे। वे अपने किसी काम के लिए दूसरों को कष्ट नहीं देना चाहते थे। बिना अनुमति के किसी की वस्तु को हाथ नहीं लगाते थे। कबीर के आर्दशों का पालन करते थे। सर्दियों में भी अंधेरा रहते ही पैदल जाकर गंगा स्नान करके आते थे तथा भजन गाते थे।

वेशभूषा से ये साधु लगते थे। इनके मुख पर सफे़द दाढ़ी तथा सिर पर सफे़द बाल थे, गले में तुलसी के जड़ की माला पहनते थे, सिर पर कबीर पंथियों की तरह टोपी पहनते थे, शरीर पर कपड़े बस नाम मात्र के थे। सर्दियों के मौसम में बस एक काला कंबल ओढ़ लेते थे तथा मधुर स्वर में भजन गाते-फिरते थे।

Q5. बालगोबिन भगत की दिनचर्या लोगों के अचरज का कारण क्यों थी?

Answer: वृद्ध होते हुए भी उनकी स्फूर्ति में कोई कमी नहीं थी। सर्दी के मौसम में भी, भरे बादलों वाले भादों की आधी रात में भी वे भोर में सबसे पहले उठकर गाँव से दो मील दूर स्थित गंगा स्नान करने जाते थे, खेतों में अकेले ही खेती करते तथा गीत गाते रहते। विपरीत परिस्थिति होने के बाद भी उनकी दिनचर्या में कोई परिवर्तन नहीं आता था। एक वृद्ध में अपने कार्य के प्रति इतनी सजगता को देखकर लोग दंग रह जाते थे।

Q6. पाठ के आधार पर बालगोबिन भगत के मधुर गायन की विशेषताएँ लिखिए।

Answer: बालगोबिन भगत सुमधुर कंठ से इस तरह गाते थे कि कबीर के सीधे-सादे पद भी उनके मुँह से निकलकर सजीव हो उठते थे। उनके गीत सुनकर बच्चे झूम उठते थे, स्त्रियों के होंठ गुनगुनाने लगते थे और काम करने वालों के कदम लय-ताल से उठने लगते थे। इसके अलावा भादों की अर्धरात्रि में उनका गान सुनकर उसी तरह चौंक उठते थे, जैसे अँधेरी रात में बिजली चमकने से लोग चौंक कर सजग हो जाते हैं।

Q7. कुछ मार्मिक प्रसंगों के आधार पर यह दिखाई देता है कि बालगोबिन भगत प्रचलित सामाजिक मान्यताओं को नहीं मानते थे। पाठ के आधार पर उन प्रसंगों का उल्लेख कीजिए।

Answer: यह सत्य है कि बालगोबिन भगत का अंतर्मन ही उन्हें आदेश देता था। वे समाज की मान्यताओं पर विश्वास नहीं करते थे। समाज की मान्यता है कि पति की चिता को पत्नी आग नहीं दे सकती। पत्नी को चाहिए कि वह पति की मृत्यु के बाद विधवा बनकर सास-ससुर की सेवा में दिन बिताए। बालगोबिन ने इन दोनों मान्यताओं के विरुद्ध व्यवहार किया। उन्होंने अपने बेटे की चिता को पतोहू के हाथों से ही आग दिलवाई। उसके बाद उन्होंने पतोहू को दूसरे विवाह के लिए स्वयं उसके भाइयों के साथ वापस भेज दिया।
बालगोबिन भगत ने समाज की देखादेखी पुत्र की मृत्यु पर शोक भी नहीं मनाया। उन्होंने पुत्र की मृत्यु को परमात्मा से मिलन का उत्सव माना। इसलिए वे शोक मनाने की बजाय प्रभु-भक्ति के गीतों में तल्लीन हो गए। उन्होंने अपनी पुत्रवधू को भी शोक न मनाने की सलाह दी।

Q8. धान की रोपाई के समय समूचे माहौल को भगत की स्वर लहरियाँ किस तरह चमत्कृत कर देती थीं ? उस माहौल का शब्द-चित्र प्रस्तुत कीजिए।

Answer: आषाढ़ की रिमझिम फुहारों के बीच खेतों में धान की रोपाई चल रही थी। बादल से घिरे आसमान में, ठंडी हवाओं के चलने के समय अचानक खेतों में से किसी के मीठे स्वर गाते हुए सुनाई देते हैं। बालगोबिन भगत के कंठ से निकला मधुर संगीत वहाँ खेतों में काम कर रहे लोगों के मन में झंकार उत्पन्न करने लगा। स्वर के आरोह के साथ एक-एक शब्द जैसे स्वर्ग की ओर भेजा जा रहा हो। उनकी मधुर वाणी को सुनते ही लोग झूमने लगते हैं, स्त्रियाँ स्वयं को रोक नहीं पाती है तथा अपने आप उनके होंठ काँपकर गुनगुनाते लगते हैं। हलवाहों के पैर गीत के ताल के साथ उठने लगे। रोपाई करने वाले लोगों की उँगलियाँ गीत की स्वरलहरी के अनुरूप एक विशेष क्रम से चलने लगीं बालगोबिन भगत के गाने सेसंपूर्ण सृष्टि मिठास में खो जाती है।

Q9. पाठ के आधार पर बताएँ कि बालगोबिन भगत की कबीर पर श्रद्धा किन-किन रूपों में प्रकट हुई है?

Answer: लेखक के अनुसार बालगोबिन भगत कबीर के भगत थे। वे कत्पीर को ‘साहब’ कहते थे। वे कबीर के बताए नियमों का दृढ़ता से पालन करते थे। उनके अनुसार उनकी सब चीजें ‘साहब’ की देन हैं। उनके खेत में जो भी पैदावार होती थी, उसे सिर पर लादकर ‘साहब’ के दरबार में पहुँचाते थे। वह सब कुछ भेंट स्वरूप दरबार में रख देते थे। वापसी में जो कुछ भी ‘प्रसाद’ के रूप में मिलता उससे अपना निर्वाह करते थे।
बालगोबिन भगत कबीर की तरह ही भगवान के निराकार रूप को मानते थे। वे मृत्यु को दुःख का नहीं आनंद मनाने का अवसर मानते थे। कबीर जी ने आत्मा को परमात्मा की प्रेमिका बताया है जो मृत्यु उपरांत अपने प्रियतम से जा मिलती है। बालगोबिन भगत ने कबीर की वाणी का पालन करते हुए अपने पुत्र के मृत शरीर को फूलों से सजाया और पास में दीपक जलाया। वे स्वयं भी पुत्र के मृत शरीर के पास बैठकर पिया मिलन के गीत गाने लगे। उन्होंने अपनी पुत्रवधू को भी रोने के लिए मना कर दिया था। इससे पता चलता है कि बालगोबिन भगत की कबीर पर अगाध श्रद्धा थी। वे कबीर के पद इस ढंग से गाते थे जैसे सभी जीवित हो जाएंगे।

Q10. आपकी दृष्टि में भगत की कबीर पर अगाध श्रद्धा के क्या कारण रहे होंगे?

Answer: भगत जी संत कबीर की भक्ति भावना, सरल तथा सादगी भरी जीवन-शैली, समाज-सुधार की लगन, बाह्य आडंबरों पर पैनी नज़र जैसी विशेषताओं से प्रभावित थे। इन्हीं कारणों से कबीर के प्रति श्रद्धा भाव गहरे होते चले गए तथा कबीर उनके लिए ‘साहब’ हो गए।

Q11. गाँव का सामाजिक-सांस्कृतिक परिवेश आषाढ़ चढ़ते ही उल्लास से क्यों भर जाता है?

Answer: ग्राम्य-जीवन अधिकांशतः कृषि आधारित जीवन है। सूखे-पड़े खेतों को देख शांत पड़े कृषकों को वर्षा होने की प्रतीक्षा रहती है। वर्षा न होने तक कृषक उदासीन रहते हैं।

आषाढ़ मास में जैसे ही आकाश बादल से घिर जाते हैं वैसे ही उदासीन मुन प्रफुल्लित हो उठते हैं। जैसे ही रिमझिम वर्षा हुई, सूखी धरती की प्यास बुझी, वैसे ही संपूर्ण

ग्राम्यजीवन उल्लास से भर जाता है।

Q12. “ऊपर की तसवीर से यह नहीं माना जाए कि बालगोबिन भगत साधु थे।” क्या ‘साधु’ की पहचान पहनावे के आधार पर की जानी चाहिए? आप किन आधारों पर यहसुनिश्चित करेंगे कि अमुक व्यक्ति ‘साधु’ है?

Answer: एक साधु की पहचान उसके पहनावे से नहीं बल्कि उसके अचार – व्यवहार तथा उसकी जीवन प्रणाली पर आधारित होती है। यदि व्यक्ति का आचरण सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, त्याग, लोक-कल्याण आदि से युक्त है, तभी वह साधु है। साधु का जीवन सात्विक होता है। उसका जीवन भोग-विलास की छाया से भी दूर होता है। उसके मन में केवल इश्वर के प्रति सच्ची भक्ति होती है।

Q13. मोह और प्रेम में अंतर होता है। भगत के जीवन की किस घटना के आधार पर इस कथन का सच सिद्ध करेंगे?

Answer: भगत को अपने पुत्र तथा अपनी पुत्रवधू से अगाध प्रेम था। परन्तु उसके इस प्रेम ने प्रेम की सीमा को पार कर कभी मोह का रुप धारण नहीं किया। जब भगत के पुत्र की मृत्यु हो जाती है तो पुत्र मोह में पड़ कर वो रोते बिलखते नहीं हैं बल्कि पुत्र की आत्मा के परमात्मा से मिलने से खुश होते हैं। दूसरी तरफ़ वह चाहते तो मोह वश अपनी पुत्रवधू को अपने पास रोक सकते थे परन्तु उन्होंने अपनी पुत्रवधू को ज़बरदस्ती उसके भाई के साथ भेजकर उसके दूसरे विवाह का निर्णय किया। सच्चा प्रेम अपने सगे-सम्बन्धियों की खुशी में है। परन्तु मोह वश हम सामने वाले के सुख की अपेक्षा अपने सुख को प्रधानता देते हैं। बालगोबिन भगत ने भी सच्चे प्रेम का परिचय देकर अपने पुत्र और पुत्रवधू की खुशी को ही उचित माना।

Q14. इस पाठ में आए कोई दस क्रिया विशेषण छाँटकर लिखिए और उसके भेद भी बताइए

Answer: 1. धीरे-धीरे – धीरे-धीरे स्वर ऊँचा होने लगा।
भेद: रीतिवाचक क्रियाविशेषण

  1. जब-जब – वह जब-जब सामने आता।
    भेद: कालवाचक क्रियाविशेषण
  2. थोडा – थोडा बुखार आने लगा।
    भेद: परिमाणवाचक क्रियाविशेषण
  3. उस दिन भी संध्या – उस दिन भी संध्या में गीत गाए।
    भेद: कालवाचक क्रियाविशेषण
  4. बिल्कुल कम – कपडे बिल्कुल कम पहनते थे।
    भेद: परिमाणवाचक क्रियाविशेषण
  5. सवेरे ही – इन दिनों सवेरे ही उठते थे।
    भेद: कालवाचक क्रियाविशेषण
  6. हरवर्ष – हरवर्ष गंगा स्नान करने के लिए जाते।
    भेद: कालवाचक क्रियाविशेषण
  7. दिन-दिन – वे दिन-दिन छिजने लगे।
    भेद: कालवाचक क्रियाविशेषण
  8. हँसकर -हँसकर टाल देते थे।
    भेद: रीतिवाचक क्रियाविशेषण
  9. जमीन पर – जमीन पर ही आसन जमाए गीत गाए चले जा रहे हैं।
    भेद: स्थानवाचक क्रियाविशेषण

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