साखी NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sparsh Chapter 1 with Answers

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NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sparsh with Answers

CBSE Solutions Class 10 Hindi साखी

Page No. 6

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए −

Q1. मीठी वाणी बोलने से औरों को सुख और अपने तन को शीतलता कैसे प्राप्त होती है?

Answer: मीठी वाणी बोलने से सुनने वाले के मन से क्रोध और घृणा की भावना सम्पात हो जाती हैं। इसके साथ ही हमारा अंतःकरण प्रसन्न होने लगता हैं प्रभावस्वरूप औरों को सुख और तन को शीतलता प्राप्त होती है।

Q2. दीपक दिखाई देने पर अँधियारा कैसे मिट जाता है? साखी के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।

Answer: यहाँ दीपक का तात्पर्य ‘भक्तिरूपी ज्ञान’ तथा अंधियारे का तात्पर्य ‘अज्ञानता’ से है। यहाँ ईश्वर को ही सर्वोच्च ज्ञान कहा गया है ।जिस प्रकार दीपक के जलने से चारों ओर का अन्धकार समाप्त हो जाता है और सब जगह प्रकाश फैल जाता है ठीक उसी प्रकार जब भक्तिरूपी ज्ञान का प्रकाश हृदय में प्रज़ज्वलित है तब मन के सारे विकार अर्थात भ्रम, संशय का सर्वनाश हो जाता है और उसी को हम सर्वोच्च मानना आरंभ कर देते हैं।

Q3. ईश्वर कण-कण में व्याप्त है, पर हम उसे क्यों नहीं देख पाते?

Answer: ईश्वर संसार के कण-कण में व्याप्त है परंतु हम उसे देख नहीं पाते, क्योंकि हमारा अस्थिर मन सांसारिक विषय-वासनाओं, अज्ञानता, अहंकार और अविश्वास से घिरा रहता है। अज्ञान के कारण हम ईश्वर से साक्षात्कार नहीं कर पाते। जिस प्रकार कस्तूरी नामक सुगंधित पदार्थ हिरण की नाभि में विद्यमान होता है लेकिन वह उसे जंगल में इधर-उधर ढूँढ़ता रहता है उसी प्रकार ईश्वर हमारे हृदय में निवास करते हैं परंतु हम उन्हें अज्ञानता के कारण मंदिरों, मस्जिदों, गिरिजाघरों व गुरुद्वारों में व्यर्थ में ही खोजते फिरते हैं। कबीर के मतानुसार कण-कण में छिपे परमात्मा को पाने के लिए ज्ञान का होना अत्यंत आवश्यक है।

Q4. संसार में सुखी व्यक्ति कौन है और दुखी कौन? यहाँ ‘सोना’ और ‘जागना’ किसके प्रतीक हैं? इसका प्रयोग यहाँ क्यों किया गया है? स्पष्ट कीजिए।

Answer: संसार में वह व्यक्ति सुखी है जो प्रभु प्राप्ति के लिए प्रयास से दूर रहकर सांसारिक विषयों में डूबकर आनंदपूर्वक सोता है। इसके विपरीत वह व्यक्ति जो प्रभु को पाने के लिए तड़प रहा है, उनके वियोग से दुखी है, वही जाग रहा है। यहाँ ‘सोना’ का प्रयोग प्रभु प्राप्ति के प्रयासों से विमुख होने और ‘जागना’ प्रभु प्राप्ति के लिए किए जा रहे प्रयासों को प्रतीक है। इसका प्रयोग मानव जीवन में सांसारिक विषय-वासनाओं से दूर रहने तथा सचेत करने के लिए किया गया है।

Q5. अपने स्वभाव को निर्मल रखने के लिए कबीर ने क्या उपाय सुझाया है?

Answer: कबीर का कहना है कि हम अपने स्वभाव को निर्मल, निष्कपट और सरल बनाए रखना चाहते हैं तो हमें अपने आसपास निंदक रखने चाहिए ताकि वे हमारी त्रुटियों को बता सके। निंदक हमारे सबसे अच्छे हितैषी होते हैं। उनके द्वारा बताए गए त्रुटियों को दूर करके हम अपने स्वभाव को निर्मल बना सकते हैं।

Q6. ‘ऐकै अषिर पीव का, पढ़ै सु पंडित होई’ −इस पंक्ति द्वारा कवि क्या कहना चाहता है?

Answer: कवि इस पंक्ति के द्वारा शास्त्रीय ज्ञान की अपेक्षा भक्ति व प्रेम की श्रेष्ठता को प्रतिपादित करना चाहते हैं। उनके अनुसार जो व्यक्ति अपने आराध्य के लिए प्रेम का एक अक्षर भी पढ़ ले अर्थात् जिसके हृदय में प्रेम तथा भक्ति भाव उत्पन्न हो जाए तो वह अपने आत्मरूप से परिचित हो जाता है। वही व्यक्ति ज्ञानी है जो ईश्वर प्रेम की महिमा को जान लेता है, उसके निर्विकार रूप के रहस्य को समझ जाता है। इस पंक्ति के माध्यम से सचेत करते हुए कवि कहता है कि केवल बड़े-बड़े ग्रंथ पढ़ लेने से ईश्वरीय ज्ञान की प्राप्ति नहीं होती। इसके लिए मन को सांसारिक मोह-माया से हटाकर ईश्वर भक्ति में लगाना पड़ता है।

Q7. कबीर की उद्धृत साखियों की भाषा की विशेषता स्पष्ट कीजिए।

Answer: कबीर की साखियाँ सधुक्कड़ी भाषा में लिखी हुई हैं। इनकी साखियाँ जनमानस को जीने का कला सिखाती हैं। इन्होनें अवधी, पंजाबी, ब्रज, राजस्थानी आदि भाषाओं का मिश्रण प्रयोग किया है| तद्भव तथा देशी शब्द का अनूठा मेल भी है| जनसामान्य की बोलचाल और सहज भाषा का प्रयोग किया गया है|

(ख) भाव स्पष्ट कीजिए –

Q1. बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ।

Answer: इस पंक्ति का भाव यह है कि जब किसी भी व्यक्ति के हृदय में ईश्वर के प्रति प्रेम रुपी विरह का सर्प बस जाता है तो . उस पर कोई दवा या मंत्र असर नहीं करता है। यानि भगवान से बिछड़ने के गम में कोई भी जीव सामान्य नहीं रहता है फिर उसे कोई भी बात प्रभावित नहीं कर पाती इसलिए ईश्वर की प्राप्ति ही इसका एकमात्र समाधान है।

Q2. कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढै बन माँहि।

Answer: मनुष्य के घट (शरीर) में ही परमात्मा का वास है अर्थात् शक्ति का स्त्रोत हमारे भीतर है पर इसके प्रति हमारा विश्वास नहीं। हम उसे बाहर कर्मकांड आदि में ढूंढते हैं अपने भीतर ढूंढने का यत्न नहीं करते। यही भ्रम है-यही भूल है, मृग जैसी हमारी दशा है। उसकी नाभि में ही कस्तूरी है पर उसे उसका बोध नहीं और उस सुगंध की खोज में वह स्थान-स्थान पर भटकता फिर रहा है।

Q3. जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि।

Answer: इसका भाव है कि जब तक मनुष्य के भीतर ‘अहम्’ (अहंकार) की भावना अथवा अंधकार विद्यमान रहता है, तब तक उसे ईश्वर की प्राप्ति नहीं होती। ‘अहम्’ के मिटते ही ईश्वर की प्राप्ति हो जाती है, क्योंकि ‘अहम्’ और ‘ईश्वर’ दोनों एक स्थान पर नहीं रह सकते। ईश्वर को पाने के लिए उसके प्रति पूर्ण समर्पण आवश्यक है।

Q4. पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुवा, पंडित भया न कोइ।

Answer: कवि के अनुसार बड़े ग्रंथ, शास्त्र पढ़ने भर से कोई ज्ञानी नहीं होता। अर्थात ईश्वर की प्राप्ति नहीं कर पाता। प्रेम से इश्वर का स्मरण करने से ही उसे प्राप्त किया जा सकता है। प्रेम में बहुत शक्ति होती है।

भाषा अध्यन

Q1. पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रुप उदाहरण के अनुसार लिखिए। उदाहरण − जिवै – जीना
औरन, माँहि, देख्या, भुवंगम, नेड़ा, आँगणि, साबण, मुवा, पीव, जालौं, तास।

Answer: उपरोक्त शब्दों के प्रचलित रूप –

  1. औरन-औरों को,
    माँहि-मध्य (में),
    देख्या-देखा,
    भुवंगम-भुजंग,
    नेड़ा-निकट,
    आँगणि-आँगन,
    साबण-साबुन,
    मुवा-मरा,
    पीव-प्रिय,
    जालौं–जलाऊँ,
    तास-उसका।

योग्यता विस्तार

Q1. ‘साधु में निंदा सहन करने से विनयशीलता आती है तथा व्यक्ति को मीठी व कल्याणकारी वाणी बोलनी चाहिए’-इन विषयों पर कक्षा में परिचर्चा आयोजित कीजिए।

Answer: Do Yourself

Q2. कस्तूरी के विषय में जानकारी प्राप्त कीजिए।

Answer: मृगों की एक प्रजाति होती है-कस्तूरी मृग। ऐसा माना जाता है कि इस प्रजाति के मृगों की नाभि में कस्तूरी होती है जो निरंतर अपनी महक बिखेरती रहती है। इस कस्तूरी के बारे में खुद मृग को कुछ पता नहीं होता है। वे इस महकदार वस्तु को खोजते हुए यहाँ-वहाँ घूमते-फिरते हैं।

परियोजना कार्य

Q1. मीठी वाणी/बोली संबंधी व ईश्वर प्रेम संबंधी दोहों का संकलन कर चार्ट पर लिखकर भित्ति पत्रिका पर लगाइए।

Answer: Do Yourself

Q2. कबीर की साखियों को याद कीजिए और कक्षा में अंत्याक्षरी में उनका प्रयोग कीजिए।

Answer: Do Yourself

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