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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij with Answers
CBSE Solutions Class 9 Hindi दो बैलों की कथा
Page No. 19
प्रश्न अभ्यास
Q1. कांजीहौस में क़ैद पशुओं की हाजिरी क्यों ली जाती होगी?
Answer: कांजीहौस में कैद पशुओं की हाज़िरी इसलिए ली जाती होगी ताकि कैद पशुओं की संख्या का पता चल सके और पता लगाया जा सके की उनमें से कोई भाग या मर तो नहीं गया है।
Q2. छोटी बच्ची को बैलों के प्रति प्रेम क्यों उमड़ आया ?
Answer: छोटी बच्ची की माँ मर चुकी थी। सौतेली माँ उसे मारती रहती थी। इधर बैलों की भी यही स्थिति थी। गया उन्हें दिनभर खेत में जोतता, मारता-पीटता और शाम को सूखा भूसा डाल देता। छोटी बच्ची महसूस कर रही थी कि उसकी स्थिति और बैलों की स्थिति एक जैसी है। उनके साथ अन्याय होता देखा उसे बैलों के प्रति प्रेम उमड़ आया।
Q3. कहानी में बैलों के माध्यम से कौन-कौन से नीति-विषयक मूल्य उभरकर आए हैं ?
Answer: इस कहानी में बैलों के माध्यम से निम्नलिखित नीति-विषयक मूल्य उभर कर आये है-
1) अत्यधिक सीधा व सहनशील होना आज की दुनिया में सही नहीं है। बहुत सरल मनुष्य को मूर्ख तथा ‘गधा’ भी कहा जाता है।
2) लोगों को अपने अधिकारों व आज़ादी के लिए सदैव संघर्ष करते रहना चाहिए।
3) आज़ादी का एक अलग ही महत्व है। इसे पाने के लिए इंसान को कष्ट व परेशानियाँ सहन करने के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए।
4) समाज के अमीर वर्ग के लोगों को भी आजादी व अपने अधिकारों के लिए खुलकर समर्थन करना चाहिए।
5) एकता में बल होता है।
Q4. प्रस्तुत कहानी में प्रेमचंद ने गधे की किन स्वभावगत विशेषताओं के आधार पर उसके प्रति रूढ़ अर्थ ‘मूर्ख’ का प्रयोग न कर किसी नए अर्थ की ओर संकेत किया है ?
Answer: आमतौर पर हम गधे के लिए मूर्ख शब्द का प्रयोग करते हैं। परन्तु प्रेमचंद के अनुसार गधे में सदाचार तथा साधु संतों के गुण हैं। क्योंकि जानवर हो या मनुष्य क्रोध सभी को आता है, अन्याय के प्रति आक्रोश प्राय: सभी में होता है। परन्तु एक मात्र गधा ही ऐसा प्राणी है जो सब अत्याचार चुपचाप सहन कर लेता है। हमने कभी उसे खुश होते नहीं देखा, उसके चेहरे पर एक स्थायी विषाद हमेशा छाया रहता है, कभी अन्याय के प्रति असंतोष नहीं देखा। इन सभी गुणों के बावजूद उसे बेवकूफ कहा जाता है। यह सदगुणों का अनादर ही तो है अर्थात् सीधापन संसार के लिए उपयुक्त नहीं है।
Q5. किन घटनाओं से पता चलता है कि हीरा और मोती में गहरी दोस्ती थी?
Answer: हीरा-मोती में गहरी मित्रता थी, यह एक नहीं अनेक-घटनाओं से पता चलता हैं, जैसे-
- दोनों एक साथ नाद में मुँह डालते, एक साथ हटाते।
- दोनों सायंकाल एक-दूसरे को चाट-चूटकर थकान मिटाते थे।
- दानों के विचार परस्पर मिलते थे।
- काम के समय दोनों एक-दूसरे का बोझ अपने कंधों पर लेने की कोशिश में रहते थे।
- किसी आकस्मिक संकट का दोनों मिल-जुलकर मुकाबला करते थे।
- दोनों में कोई भी किसी दूसरे को संकट में छोड़कर नहीं जाता था।
- दोनों एक-दूसरे के साथ जीना-मरना चाहते थे।
Q6. “लेकिन औरत जात पर सींग चलाना मना है, यह भूल जाते हो।” – हीरा के इस कथन के माध्यम से स्त्री के प्रति प्रेमचंद के दृष्टिकोण को स्पष्ट कीजिये।
Answer: हीरा के इस कथन से यह ज्ञात होता है कि उस समय समाज में स्त्रियों की स्थिति अच्छी नहीं थी।
उनके के साथ दुर्व्यवहार किया जाता था। उन्हें शारीरिक यातनाएँ दी जाती थीं। वे पुरुषों द्वारा शोषित थी। इसलिए समाज में ये नियम बनाए जाते थे कि उन्हें पुरुष समाज शारीरिक दंड न दे। हीरा और मोती भले इंसानों के प्रतीक हैं। इसलिए उनके कथन सभ्य समाज पर लागू होते हैं। असभ्य समाज में स्त्रियों की प्रताड़ना होती रहती थी। लेखक नारियों के सम्मान के पक्षधर थे।
Q7. किसान जीवन वाले समाज में पशु और मनुष्य के आपसी संबंधों को कहानी में किस तरह व्यक्त किया गया है?
Answer: प्रेमचंद ने किसान जीवन में मनुष्य तथा पशु के भावनात्मक सम्बन्धों को हीरा और मोती दो बैलों के माध्यम से व्यक्त किया है। हीरा और मोती दोनों झूरी नामक एक किसान के बैल हैं जो अपने बैलों से अत्यंत प्रेम करता है और इसी प्रेम से वशीभूत होकर हीरा और मोती अपने मालिक झूरी को छोड़कर कहीं और नहीं रहना चाहते हैं। इससे यह स्पष्ट है कि पशु भी स्नेह का भूखा होता है। प्रेम पाने से वे भी प्रेम व्यक्त करते हैं और क्रोध तथा अपमान पाकर वे भी असंतोष व्यक्त करते हैं।
- Q8. इतना तो हो ही गया कि नौ दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे ‘ – मोती के इस कथन के आलोक में उसकी विशेषताएँ बताइए।
Answer: मोती के इस कथन से उसकी निम्नलिखित विशेषताएँ उभर कर सामने आती हैं –
- वह आशावादी है क्योंकि उसे अभी भी यह विश्वास है कि वह इस कैद से मुक्त हो सकता है।
- “” स्वार्थी नहीं है। स्वयं भागने के बजाए उसने अन्य सभी जानवरों को सबसे पहले भागने का मौका दिया।
- वह साहसी है।
Q9.आशय स्पष्ट कीजिए –
(क ) अवश्य ही उनमें कोई ऐसी गुप्त शक्ति थी, जिससे जीवों में श्रेष्ठता का दावा करने वाला मनुष्य वंचित है।
Answer: हीरा और मोती बिना कोई वचन कहे एक-दूसरे के मन की बात समझ जाते थे। प्रायः वे एक दूसरे से स्नेह की बातें सोचते थे। यद्दपि मनुष्य स्वयं को सब प्राणियों से श्रेष्ठ मानता है किंतु उसमें भी ये शक्ति नहीं होती।
(ख) उस एक रोटी से उनकी भूख तो क्या शांत होती; पर दोनों के ह्रदय को मानो भोजन मिल गया।
Answer: हीरा और मोती गया के घर बंधे हुए थे। गया ने उनके साथ अपमान पूर्ण व्यवहार किया था। इसलिए वे क्षुब्ध थे। परन्तु तभी एक नन्हीं लड़की ने आकर उन्हें एक रोटी ला दी। उस रोटी से उनका पेट तो नहीं भर सकता था। परन्तु उसे खाकर उनका ह्रदय ज़रूर तृप्त हो गया। उन्होंने बालिका के प्रेम का अनुभव कर लिया और प्रसन्न हो उठे।
Q10. गया ने हीरा-मोती को दोनों बार सूखा भूसा खाने के लिए दिया क्योंकि –
क) गया पराये बैलों पर अधिक खर्च नहीं करना चाहता था।
ख) गरीबी के कारण खली आदि खरीदना उसके बस की बात न थी।
ग) वह हीरा-मोती के व्यवहार से बहुत दुखी था।
घ) उसे खली आदि सामग्री की जानकारी नहीं थी।
Answer: ग) वह हीरा-मोती के व्यवहार से बहुत दुखी था।
Q11. हीरा और मोती ने शोषण के खिलाफ़ आवाज़ उठाई लेकिन उसके लिए प्रताड़ना भी सही। हीरा-मोती की इस प्रतिक्रिया पर तर्क सहित अपने विचार प्रकट करें।
Answer: हीरा और मीता को गया के घर से लेकर कांजीहौस तक शोषण का शिकार होना पड़ता है। वे शोषण का अपने तरीके से विरोध करते हैं। इसके परिणामस्वरूप वे दोनों पीटे जाते हैं तथा अंततः कांजीहौस में बंद कर दिए जाते हैं। इस पर मेरा विचार है कि शोषण का विरोध करके उन्होंने बिल्कुल ठीक किया। शोषण का विरोध करते हुए इतना दुख तो उठाना पड़ता ही है। शोषित रहकर घुट-घुटकर जीने तथा हर सॉस के लिए दूसरे पर आश्रित रहने से अच्छा उनका विरोध है। इससे शोषक अपनी मनमर्जी नहीं कर पाता है।
Q12. क्या आपको लगता है कि यह कहानी आज़ादी की कहानी की ओर भी संकेत करती है ?
Answer: प्रेमचंद स्वतंत्रता पूर्व लेखक हैं। इनकी रचनाओं में भी इसका प्रभाव देखा गया है। “दो बैलों की कथा” नामक कहानी भी इससे अछूती नहीं है। मनुष्य हो या पशु पराधीनता किसी को भी स्वीकार नहीं है। सभी स्वतंत्र होना चाहते हैं। प्रस्तुत कहानी की कथावस्तु भी इन्हीं मनोविचार पर आधारित है। प्रेमचंद ने अंग्रेज़ों द्वारा भारतीयों पर किए गए अत्याचारों को मनुष्य तथा पशु के माध्यम से व्यक्त किया है। इस कहानी में उन्होंने यह भी कहा है कि स्वतंत्रता सहज ही नहीं मिलती, इसके लिए निरंतर संघर्ष करना पड़ता है। जिस प्रकार अंग्रेज़ों के अत्याचार से पीड़ित जनता ने अपना क्षोभ विद्रोह के रुप में व्यक्त किया, उसी प्रकार बैलों का गया के प्रति आक्रोश भी संघर्ष के रुप में भड़क उठा। इस प्रकार अप्रत्यक्ष रुप से यह कहानी आज़ादी की भावना से जुड़ी है।
Q13. बस इतना ही काफ़ी है।
फिर मैं भी जोर लगाता हूँ।
” ‘ ही ‘ , ‘ भी ‘ वाक्य में किसी बात पर ज़ोर देने का काम कर रहे हैं। ऐसे शब्दों को निपात कहते हैं। कहानी में पाँच ऐसे वाक्य छाँटिए जिनमें निपात का प्रयोग हुआ हो।
Answer: ही-
1) दोनों साथ उठते, साथ नाँद में मुँह डालते और रथ ही बैठते थे।
2) एक ही विजय ने उसे संसार की सभ्य जातियों में गण्य बना दिया।
3) ज्यादा-से-ज्यादा मेरी ही गरदन पर रहे।
4) यही उनका आधार था।
5) कभी-कभी उसे भी क्रोध आ ही जाता है।
भी-
1) कभी-कभी उसे भी क्रोध आ ही जाता है।
2) उसके चेहरे पर असंतोष की छाया भी न दिखाई देती।
3) गधे का एक छोटा भाई और भी है।
4) एक मुँह हटाता तो दूसरा भी हटा लेता था।
5) कभी-कभी अड़ियल बैल भी देखने में आता है।
Q14. रचना के आधार पर वाक्य के भेद बताइए तथा उपवाक्य छाँटकर उसके भी भेद लिखिए –
(क) दीवार का गिरना था कि अधमरे से पड़े हुए सभी जानवर चेत उठे।
(ख) सहसा एक दढियल आदमी, जिसकी आँखे लाल थी और मुद्रा अत्यन्त कठोर, आया।
(ग) हीरा ने कहा -गया के घर से नाहक भागे।
(घ) मैं बेचूँगा, तो बिकेंगे।
(ड़ ) अगर वह मुझे पकड़ता, तो मैं बे-मारे न छोड़ता।
Answer: क) वाक्य भेद-मिश्र
वाक्य प्रधान वाक्य-दीवार का गिरना था
संज्ञा आश्रित उपवाक्य-अधमरे से पड़े हुए जानवर भी चेत उठे।
(ख) वाक्य भेद-मिश्र
वाक्य प्रधान वाक्य-सहसा एक दढ़ियल आदमी आया।
विशेषण आश्रित उपवाक्य-जिसकी आँखें लाल थीं और मुद्रा अत्यंत कठोर।
(ग) वाक्य भेद-मिश्र वाक्य
प्रधान वाक्य-हीरा ने कहा
संज्ञा आश्रित उपवाक्य-गया के घर से नाहक भागे।
(घ) वाक्य भेद-मिश्र
वाक्य प्रधान वाक्य-बिकेंगे
क्रिया विशेषण आश्रित उपवाक्य-मैं बेचूंगा तो
(ङ) वाक्य भेद-मिश्र
वाक्य प्रधान वाक्य-तो मैं बे-मारे न छोड़ता।
क्रिया विशेषण आश्रित उपवाक्य-अगर वह न पकड़ता।
Q15. कहानी में जगह – जगह पर मुहावरों का प्रयोग हुआ है कोई पाँच मुहावरे छाँटिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए।
Answer: मुहावरें
- हिम्मत हारना – (निराश होना) इस असफलता के बाद राहुल हिम्मत हार गया है।
- टकटकी लगाना – (निरंतर देखना) वह दरवाजें पर टकटकी लगाए देखता रहा।
- जान से हाथ धोना – (मर जाना) यह काम बहुत खतरनाक है। थोड़ी भी गलती होने पर जान से हाथ धोना पड़ सकता है।
- ईंट का जवाब पत्थर से देना – (कड़ी प्रतिक्रिया) युद्ध के मैदान में भारतीय सैनिकों ने दुश्मन की ईंट का जवाब पत्थर से दिया।
- दाँतों पसीना आना – (कठिन परिश्रम करना) इतना भारी सामान उठाने से राकेश के दाँतों पसीने आ गए।
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