We have Provided the NCERT/CBSE Solutions chapter-wise for Class 10 Hindi Chapter 2 सपनों के-से दिन with Answers by expert subject teacher for latest syllabus and examination. Students can take a free NCERT Solutions of सपनों के-से दिन. Each question has right answer Solved by Expert Teacher.
NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitij-2 with Answers
CBSE Solutions Class 10 Hindi सपनों के-से दिन
Page No. 30
बोध-प्रश्न
Q1. कोई भी भाषा आपसी व्यवहार में बाधा नहीं बनती-पाठ के किस अंश से सिद्ध होता है?
Answer: पाठ के इस अंश द्वारा यह पता चलता है कोई भी भाषा आपसी व्यवहार में बाधा नहीं बनती – इस पाठ में लेखक ने बचपन की घटना को बताया है कि उनके आधे से ज्यादा साथी कोई हरियाणा से, कोई राजस्थान से थे। सब अलग-अलग भाषा बोलते हैं, उनके कुछ शब्द सुनकर तो हँसी ही आ जाती थी परन्तु खेलते समय सब की भाषा सब समझ लेते थे। उनके व्यवहार में इससे कोई अंतर न आता था। क्योंकि बच्चे जब मिलकर खेलते हैं तो उनका व्यवहार, उनकी भाषा अलग होते हुए भी एक ही लगती है। भाषा अलग होने से आपसी खेल कूद, मेल मिलाप या आपसी व्यवहार में बाधा नहीं बनती।
Q2. पीटी साहब की ‘शाबाश’ फौज के तमगों-सी क्यों लगती थी ? स्पष्ट कीजिए।
Answer: पीटी साहब का नाम प्रीतम चंद था और वह फौज की तरह ही बहूत अनुशासित थे । गुस्सैल स्वभाव होने के कारण वह बच्चों को छोटी सी गलती पर भी कठोर सजा देते थे । इसी कारण जब वह शाबाशी देते थे तो बच्चों को फौज के तमगो सी लगती थी ।
Q3. नयी श्रेणी में जाने और नयी कापियों और पुरानी किताबों से आती विशेष गंध से लेखक का बालमन क्यों उदास हो उठता था?
Answer: नयी श्रेणी में जाने का विद्यार्थियों को विशेष चाव होता है क्योंकि उन्हें वहाँ नए-नए अध्यापक मिलते हैं जो उन्हें नई-नई किताबें पढ़ाते हैं जिस कारण उनमें उमंग और उत्साह छलकता प्रतीत होता है। लेकिन लेखक का मन नई श्रेणी में जाकर उदास हो जाता है। उसके बालमन के उदास होने का कारण निम्नलिखित था
Q4. स्काउट परेड करते समय लेखक अपने को महत्त्वपूर्ण आदमी’ फौजी जवान क्यों समझने लगता था?
Answer: लेखक गुरदयाल सिंह फौज़ी बनना चाहता था। उसने फुल बूट और शानदार वर्दी पहने लेफ्ट-राइट करते फौज़ी जवानों की परेड को देखा था। इसी कारण स्काउट परेड के समय धोबी की धुली वर्दी, पालिश किए बूट तथा जुराबों को पहन वह स्वयं को फौज़ी जवान ही समझता था। स्काउट परेड में जब पीटी मास्टर लेफ्ट राइट की आवाज या मुँह की सीटी बजाकर मार्च करवाया करते थे तथा उनके राइट टर्न या लेफ्ट टर्न या अबाऊट टर्न कहने पर लेखक अपने छोटे-छोटे बूटों की एड़ियों पर दाएँ-बाएँ या एक कदम पीछे मुड़कर बूटों की ठक-ठक की आवाज़ करते हुए स्वयं को विद्यार्थी न समझकर एक महत्त्वपूर्ण फौजी समझने लगता था।
Q5. हेडमास्टर शर्मा जी ने पीटी साहब को क्यों मुअत्तल कर दिया?
Answer: एक दिन मास्टर प्रीतमचंद ने कक्षा में बच्चों को फ़ारसी के शब्द रूप याद करने के लिए दिए । परन्तु बच्चों से यह शब्द रूप याद नहीं हो सके। इसपर मास्टर जी ने उन्हें मुर्गा बना दिया। बच्चे इसे सहन नहीं कर पाए कुछ ही देर में लुढ़कने लगे। उसी समय नम्र ह्रदय हेडमास्टर जी वहाँ से निकले और बच्चों की हालत देखकर सहन नहीं कर पाए और पीटी मास्टर को मुअत्तल कर दिया। इसी कारण प्रीतमचंद कई दिनों से स्कूल नहीं आ रहे थे ।
Q6. लेखक के अनुसार उन्हें स्कूल खुशी से भागे जाने की जगह न लगने पर भी कब और क्यों उन्हें स्कूल जाना अच्छा लगने लगा?
Answer: लेखक और उसके साथियों को स्कूल ऐसी जगह कतई नही लगता था कि वे भागकर खुशी-खुशी से जाएँ, क्योंकि उनके मन में स्कूल के प्रति एक प्रकार का भय समाया हुआ था, लेकिन तीसरी-चौथी श्रेणी में इंडियाँ पकड़कर व धुली हुई वर्दी तथा चमकते हुए जूते पहनकर स्काउटिंग परेड करना, गलती न होने पर पीटी साहब से ‘शाबाश’ सुनना लेखक को विद्यालय जाने के लिए प्रेरित करता था।
Q7. लेखक अपने छात्र जीवन में स्कूल से छुटूटियों में मिले काम को पूरा करने के लिए क्या-क्या योजनाएँ बनाया करता था और उसे पूरा न कर पाने की स्थिति में किसकी भाँति ‘बहादुर’ बनने की कल्पना किया करता था?
Answer: लेखक के स्कूल की छुट्टियाँ होती और उसमें जो काम करने के लिए मिलता उसे पूरा करने के लिए लेखक समय सारणी बनाता। कौन-सा काम, कितना काम एक दिन में पूरा करना है। जैसे हिसाब के मास्टर द्वारा दिए गए 200 सवालों को पूरा करने के लिए रोज दस सवाल निकले जाने पर 20 दिन में पूरे हो जाएँगे लेकिन खेल कूद में लेखक का समय बीत जाता और काम न हो पाता। धीरे-धीरे समय बीतने लगता तो लेखक ओमा नामक ठिगने और बलिष्ठ लड़के जैसा बहादुर बनना चाहता था जो उद्दंड था और काम करने के बजाए पिटना सस्ता सौदा समझता था।
Q8. पाठ में वर्णित घटनाओं के आधार पर पीटी सर की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
Answer: पीटी सर की निम्नलिखित विशेषताएं हैं –
- पीटी सर पतले व छोटे कद के थे।
- वह खाकी वर्दी और लंबे जूते पहनते थे,
- वह बहुत अनुशासन प्रिय थे,
- वह बच्चों को क्रूर दंड दिया करते थे,
- उनका स्वभाव नम्र नहीं था।
- वे एक स्वाभिमानी व्यक्ती थे।
- वे नारियल की तरह बाहर से कठोर परंतु अंदर से कोमल थे।
Q9. विद्यार्थियों को अनुशासन में रखने के लिए पाठ में अपनाई गई युक्तियों और वर्तमान में स्वीकृत मान्यताओं के संबंध में अपने विचार प्रकट कीजिए।
Answer: विद्यार्थियों को अनुशासन में रखने के लिए पाठ में अपनाई युक्तियाँ इस प्रकार से हैं—पीटी साहब बिल्ला मार-मारकर बच्चों की चमड़ी तक उधेड़ देते थे। तीसरी-चौथी कक्षाओं के बच्चों से थोड़ा-सा भी अनुशासन भंग हो जाता, तो उन्हें कठोर सज़ा मिलती थी ताकि वे विद्यार्थी के जीवन में अनुशासन की नींव दृढ़ बना सकें। इसके साथ-साथ विद्यार्थियों को प्रोत्साहित तथा उत्साहित करने के लिए उन्हें ‘शाबाशी’ भी दी जाती थी। लेकिन वर्तमान में स्वीकृत मान्यताएँ इसके विपरीत हैं। शिक्षकों को आज विद्यार्थियों को पीटने का अधिकार नहीं है इसलिए विद्यार्थी निडर होकर अनुशासनहीनता की ओर बढ़ रहे हैं, क्योंकि आज पहले की भाँति विद्यार्थी शिक्षकों से डरते नहीं हैं। इसके लिए विद्यालय और माता-पिता दोनों जिम्मेवार हैं। बच्चों में अनुशासन का विकास करने के लिए उन्हें शारीरिक व मानासिक यातना देना उचित नहीं। उन्हें प्रेमपूर्वक नैतिक मूल्य सिखाए जाने चाहिए, जिनसे उनमें स्वानुशासन का विकास हो सके।
Q10. बचपन की यादें मन को गुदगुदाने वाली होती हैं, विशेषकर स्कूली दिनों की। अपने अब तक के स्कूली जीवन की खट्टी-मीठी यादों को लिखिए।
Answer: प्रत्येक व्यक्ति के बचपन की यादें मन को गुदगुदाने वाली होती हैं, पर ये यादें सभी की निजी होती हैं। मुझे भी पूरी तरह से याद है, जब मैं कक्षा दूसरी में थी, तो एक दिन स्कूल में बारिश के कारण मैदान में पानी ही पानी दिखाई दे रहा था। हम सभी बच्चे थोड़ी-सी दूरी पर खेल रहे थे, तो एक शरारती लड़के ने मुझे पानी में धक्का दे दिया। मेरे पानी में गिरते ही सारे बच्चे जोरों से हँसने लगे। मैं पानी में पूरी तरह से भीग गई और ज़ोर-ज़ोर से रोने लगी। बाद में मुझे घर भेज दिया गया था। उस समय की याद आज भी बनी हुई है।
Q11. प्रायः अभिभावक बयों को खेल-कूद में ज्यादा रुचि लेने पर रोकते हैं और समय बरबाद न करने की नसीहत देते हैं बताइए-
- खेल आपके लिए क्यों ज़रूरी हैं?
- आप कौन-से ऐसे नियम-कायदों को अपनाएँगे, जिनसे अभिभावकों को आपके खेल पर आपत्ति न हो?
Answer: (1) खेल मनोरंजन के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभप्रद हैं। इससे शरीर स्वस्थ रहता है, बच्चे अनुशासित रहते हैं तथा प्रेम और सहयोग की भावना बढ़ती है। साथ ही साथ प्रतिस्पर्धा के गुण भी समझ में आते हैं। समूह में खेलने से सामाजिक भावना आती है।
(2) खेल शरीर के लिए ज़रूरी हैं परन्तु उतने ही ज़रूरी अन्य कार्य भी हैं; जैसे – पढ़ाई आदि। यदि खेल स्वास्थ्य के लिए है तो पढ़ाई जैसे कार्य भविष्य को सुधारने के लिए आवश्यक हैं। हमें अपना कार्य समय पर करते रहना चाहिए। ज्ञान वर्धक विषयों पर भी उतना ही ध्यान देंगे और समय देंगे तो अभिभावकों को खेलने पर कोई आपत्ति नहीं होगी ।
We Think the given NCERT Solutions for class 10 Hindi Chapter 2 सपनों के-से दिन with Answers Pdf free download will assist you. If you’ve got any queries regarding CBSE Class 10 Hindi सपनों के-से दिन NCERT Solutions with Answers, drop a comment below and that we will come back to you soons.