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NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitij-2 with Answers
CBSE Solutions Class 10 Hindi उत्साह और अट नहीं रही
Page No. 35
प्रश्न अभ्यास
Q1. कवि बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के स्थान पर ‘गरजने’ के लिए कहता है, क्यों?
Answer: निराला विद्रोही कवि हैं। वे समाज में क्रांति के माध्यम से परिवर्तन लाना चाहते थे। वे क्रांति चेतना का आश्वान करने में विश्वास रखते थे जो ओज और जोश पर निर्भर करती है। ओज और जोश के लिए ही कवि बादलों को गरजने के लिए कहता है।
Q2. कविता का शीर्षक उत्साह क्यों रखा गया है?
Answer: बादल कवि निराला का प्रिय विषय है। बादलों को देखते ही मन प्रफुल्लित हो उठता है क्योंकि बादल एक ओर तो पीड़ित प्यासे जन की आकांक्षा को पूर्ण करने वाला है, तो दूसरी तरफ़ वही बादल नई कल्पना और नए अंकुर के लिए विध्वंस, विप्लव और क्रांति की चेतना को संभव करने वाला है। बादलों से मन में ‘उत्साह’ उत्पन्न होता है इसलिए कवि ने कविता का शीर्षक ‘उत्साह’ रखा।
Q3. कविता में बादल किन-किन अर्थों की ओर संकेत करता है ?
Answer: ‘उत्साह’ कविता में बादल निम्नलिखित अर्थों की ओर संकेत करता है
- बादल मानव-जीवन में क्रांति लाने की ओर संकेत करता है।
- मानव-जीवन की पीड़ाओं को दूर करने की ओर संकेत करता है।
- जीवन को उत्साह और संघर्ष के लिए प्रेरित करता है।
- जीवन में नवीनता लाने, परिवर्तन लाने की ओर संकेत करता है।
Q4. शब्दों का ऐसा प्रयोग जिससे कविता के किसी खास भाव या दृश्य में ध्वन्यात्मक प्रभाव पैदा हो, नाद-सौंदर्य कहलाता है। उत्साह कविता में ऐसे कौन-से शब्द हैं जिनमें नाद-सौंदर्य मौजूद है, छाँटकर लिखें।
Answer: कविता की इन पंक्तियों में नाद-सौंदर्य मौजूद है –
- “घेर घेर घोर गगन, धाराधर ओ!
- ललित ललित, काले घुँघराले,
बाल कल्पना के-से पाले - “विद्युत-छबि उर में”
- विकल-विकल, उन्मन थे उन्मन
Q5. जैसे बादल उमड़-घुमड़कर बारिश करते हैं वैसे ही कवि के अंतर्मन में भी भावों के बादल उमड़-घुमड़कर कविता के रूप में अभिव्यक्त होते हैं। ऐसे ही किसी प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर अपने उमड़ते भावों को कविता में उतारिए।
Answer:
ऊपर देखो आसमान में,
किसने रंग बिखेरा काला।
सूरज जाने कहाँ छिप गया,
खो गया उसका कहीं उजाला ॥
देख गगन का काला चेहरा
बिजली कुछ मुसकाई ।
लगा बहाने गगन बनाने,
ज्यों बिजली ने आँख दिखाई ॥
कुछ वसुधा में आन समाया॥
वह लाई एक थाल में पानी,
उसका मुँह धुलवाया।
थोड़ा पानी आसमान में
बाकी सब धरती पर आया ।।
कुछ टपका फूलों पर जाकर
कुछ ने चातक की प्यास बुझाया।
कुछ तालों कुछ फसलों तक
अट नहीं रही
Q1. छायावाद की एक खास विशेषता है अन्तर्मन के भावों का बाहर की दुनिया से सामंजस्य बिठाना। कविता की किन पंक्तियों को पढ़कर यह धारणा पुष्ट होती है?लिखिए।
Answer:
उड़ने को नभ में तुम
पर-पर कर देते हो,
उपर्युक्त पंक्तियों में कवि ने अपने अंतर्मन में उपस्थित उमंग की भावना को बाहर की दुनिया के माध्यम से प्रकट किया है।
Q2. कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों नहीं हट रही है?
Answer: कवि की आँख फागुन की सुंदरता से इसलिए हट नहीं रही है क्योंकि इस महीने में प्रकृति का सौंदर्य अत्यंत मनमोहक होता है| पेड़ों पर हरी और लाल पत्तियाँ लटक रहे हैं| चारों ओर फैली हरियाली और खिले रंग-बिरंगे फूल अपनी सुगंध से मुग्ध कर देते हैं| प्रकृति का नया रंग और सुगंध जीवन में नयी ऊर्जा का संचार करती है|
Q3. प्रस्तुत कविता में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन किन रूपों में किया है ?
Answer: कवि ने प्रकृति की व्यापकता को फागुन की सुंदरता के रूप से प्रकट किया है। प्रकृति की सुंदरता और व्यापकता फागुन में समा ही नहीं पाती इसलिए वह सब तरफ फूटी पड़ती दिखाई देती है। प्रकृति के माध्यम से परमात्मा की सर्वव्यापकता को कवि ने प्रकट किया है। वह परम सत्ता अपनी श्वासों से प्रकृति के कोने-कोने में सुगंध के रूप में व्याप्त है। प्रकृति ही कवि को कल्पना की ऊंची उड़ान भरने के लिए प्रेरित करती है और उसकी रचनाओं में सर्वत्र दिखाई देती है। प्रकृति की व्यापकता ही मन में तरह-तरह की कल्पनाओं को जन्म देती है। वन का प्रत्येक पेड-पौधा इसी सुंदरता से भर कर शोभा देता है। प्रकृति की व्यापकता नैसर्गिक सौंदर्य की मूल आधार है।
Q4. फागुन में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से भिन्न होता है ?
Answer: फागुन में प्रकृति की शोभा भीतर नहीं समाती, बल्कि बाहर दिखाई दिती है। फागुन की मादकता तन-मन को बाँधने की शक्ति रखती है। वृक्ष पल्लवित-पुष्पित होते हैं इसलिए मान रूपी पक्षी प्रकृति में आत्मसात हो जाना चाहता है। ये विशेषताएँ सामान्यतः अन्य महीनों में देखने को नहीं मिलती।
Q5. इन कविताओं के आधार पर निराला के काव्य-शिल्प की विशेषताएँ बताएँ।
Answer: महाकवि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ जी छायावाद के प्रमुख कवि माने जाते हैं। उनके काव्य-शिल्प की विशेषताएँ हैं-
• दोनों कविताओं में प्रकृति चित्रण द्वारा मन के भावों को प्रकट किया गया है|
• मानवीकरण अलंकार का प्रयोग हुआ है| पहली कविता में कवि बादल को गरज-गरज कर बरसने को कह रहे हैं तो दूसरी कविता में कवि फागुन से बात करते हैं|
‘कहीं साँस लेते हो, घर-घर भर देते हो|’
• कविताओं में तत्सम शब्दों का प्रयोग उचित मात्रा में किया गया है,
• गीत-शैली का प्रयोग हुआ है, लयबद्धता साफ़ दिखती है,
• अनुप्रास रूपक यमक, उपमा आदि अलंकारों का प्रयोग अच्छे तरीके से किया गया है,
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