We have Provided the NCERT/CBSE Solutions chapter-wise for Class 9 Hindi Chapter 3 उपभोक्तावाद की संस्कृति with Answers by expert subject teacher for latest syllabus and examination. Students can take a free NCERT Solutions of उपभोक्तावाद की संस्कृति. Each question has right answer Solved by Expert Teacher.
NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij with Answers
CBSE Solutions Class 9 Hindi उपभोक्तावाद की संस्कृति
Page No. 39
प्रश्न अभ्यास
Q1. लेखक के अनुसार जीवन में ‘सुख’ से क्या अभिप्राय है ?
Answer: लेखक के अनुसार उपभोग का भोग करना ही सुख है। अर्थात् जीवन को सुखी बनाने वाले उत्पाद का ज़रूरत के अनुसार भोग करना ही जीवन का सुख है।
Q2. आज की उपभोक्तावादी संस्कृति हमारे दैनिक जीवन को किस प्रकार प्रभावित कर रही है ?
Answer: आज की उपभोक्तावादी संस्कृति हमारे दैनिक जीवन को पूरी तरह प्रभावित कर रही है। आजकल उपभोक्तावादी संस्कृति के प्रचार-प्रसार के कारण हमारी अपनी सांस्कृतिक पहचान, परम्पराएँ, आस्थाएँ घटती जा रही है। सामाजिक दृष्टिकोण से यह एक बड़ा खतरा है। मन में अशांति एवं आक्रोश बढ़ रहे हैं। उपभोक्तावादी संस्कृति के कारण हम धीरे-धीरे उपभोगों के दास बनते जा रहे हैं। सारी मर्यादाएँ और नैतिकताएँ समाप्त होती जा रही हैं तथा मनुष्य स्वार्थ-केन्द्रित होता जा रहा है। विकास का लक्ष्य हमसे दूर होता जा रहा है। हम लक्ष्यहीन हो रहें हैं।आज हर तंत्र पर विज्ञापन हावी है, परिणामत: हम वही खाते-पीते और पहनते-ओढ़ते हैं जो आज के विज्ञापन हमें कहते हैं।
Q3. गाँधी जी ने उपभोक्ता संस्कृति को हमारे समाज के लिए चुनौती क्यों कहा है ?
Answer: गाँधी जी सामाजिक मर्यादाओं तथा नैतिकता के पक्षधर थे। वे सादा जीवन, उच्च विचार के कायल थे। वे चाहते थे कि समाज में आपसी प्रेम और संबंध बढ़े। लोग संयम और नैतिकता का आचरण करें। उपभोक्तावादी संस्कृति इस सबके विपरीत चलती है। वह भोग को बढ़ावा देती है और नैतिकता तथा मर्यादा को तिलांजलि देती है। गाँधी जी चाहते थे कि हम भारतीय अपनी बुनियाद पर कायम रहें, अर्थात् अपनी संस्कृति को न त्यागें। परंतु आज उपभोक्तावादी संस्कृति के नाम पर हम अपनी सांस्कृतिक पहचान को भी मिटाते जा रहे हैं। इसलिए उन्होंने उपभोक्तावादी संस्कृति को हमारे समाज के लिए चुनौती कहा है।
Q4. आशय स्पष्ट कीजिए –
(क) जाने-अनजाने आज के माहौल में आपका चरित्र भी बदल रहा है और आप उत्पाद को समर्पित होते जा रहे हैं।
Answer: उपभोक्तावादी संस्कृति का प्रभाव अत्यंत कठिन तथा सूक्ष्म हैं। इसके प्रभाव में आकर हमारा चरित्र बदलता जा रहा है। हम उत्पादों का उपभोग करते-करते न केवल उनके गुलाम होते जा रहे हैं बल्कि अपने जीवन का लक्ष्य को भी उपभोग करना मान बैठे हैं। सही बोला जाय तो – हम उत्पादों का उपभोग नहीं कर रहे हैं, बल्कि उत्पाद हमारे जीवन का भोग कर रहे हैं।
(ख) प्रतिष्ठा के अनेक रूप होते हैं, चाहे वे हास्यास्पद ही क्यों न हो।
Answer: सामाजिक प्रतिष्ठा विभिन्न प्रकार की होती है जिनके कई रूप तो बिलकुल विचित्र हैं। हास्यास्पद का अर्थ है- हँसने योग्य। अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा को बढ़ाने के लिए ऐसे – ऐसे कार्य और व्यवस्था करते हैं कि अनायास हँसी फूट पड़ती है। जैसे अमरीका में अपने अंतिम संस्कार और अंतिम विश्राम-स्थल के लिए अच्छा प्रबंध करना ऐसी झूठी प्रतिष्ठा है जिसे सुनकर हँसी आती है।
Q5. कोई वस्तु हमारे लिए उपयोगी हो या न हो, लेकिन टी.वी. पर विज्ञापन देख कर हम उसे खरीदने के लिए अवश्य लालायित होते हैं। क्यों ?
Answer: टी .वी .पर दिखाए जानेवाले विज्ञापन बहुत सम्मोहक एवं प्रभावशाली होते हैं। वे हमारी आँखों और कानों को विभिन्न दृश्यों और ध्वनियों के सहारे प्रभावित करते हैं। वे हमारे मन में वस्तुओं के प्रति भ्रामक आकर्षण पैदा करते हैं। ‘खाए जाओ ‘,’क्या करें ,कंट्रोल ही नहीं होता’,’दिमाग की बत्ती जला देती है’ जैसे आकर्षण हमारी लार टपका देते हैं। इसके प्रभाव में आनेवाला हर व्यक्ति इनके वश में हो जाता है। और इस तरह अनुपयोगी वस्तुएँ भी हमें ललायित कर देती हैं।
Q6. आपके अनुसार वस्तुओं को खरीदने का आधार वस्तु की गुणवत्ता होनी चाहिए या उसका विज्ञापन ? तर्क देकर स्पष्ट करें।
Answer: वस्तुओं को खरीदने का एक ही आधार होना चाहिए-वस्तु की गुणवत्ता। विज्ञापन हमें गुणवत्ता वाली वस्तुओं का परिचय करा सकते हैं। परंतु अधिकतर विज्ञापन भी भ्रम पैदा करते हैं। वे आकर्षक दृश्य दिखाकर गुणहीन वस्तुओं का प्रचार करते हैं। उदाहरणतया, चाय की पत्ती के विज्ञापन में लड़कियों के नाच का कोई काम नहीं। परंतु अधिकतर लोग नाच से इतने प्रभावित होते हैं कि दुकान पर खड़े होकर वही चायपत्ती खरीद लेते हैं, जिसका ताज़गी से कोई संबंध नहीं। हमें ‘वाह ताज!’ जैसे शब्दों के मोह में न पड़कर चाय की कड़क और स्वाद पर ध्यान देना चाहिए। वही हमारे काम की चीज़ है।
Q7. पाठ के आधार पर आज के उपभोक्तावादी युग में पनप रही “दिखावे की संस्कृति” पर विचार व्यक्त कीजिए।
Answer: आज दिखावे की संस्कृति पनप रही है। यह बात बिल्कुल सत्य है। इसलिए लोग उन्हीं चीजों को अपना रहे हैं, जो दुनिया की नजरों में अच्छी हैं। सारे सौंदय-प्रसाधन मनुष्यों को सुंदर दिखाने के ही प्रयास करते हैं। पहले यह दिखावा औरतों में होता था, आजकल पुरुष भी इस दौड़ में आगे बढ़ चले हैं। नए-नए परिधान और फैशनेबल वस्त्र दिखावे की संस्कृति को ही बढ़ावा दे रहे हैं।
आज लोग समय देखने के लिए घड़ी नहीं खरीदते, बल्कि अपनी हैसियत दिखाने के लिए हजारों क्या लाखों रुपए की घड़ी पहनते हैं। आज हर चीज पाँच सितारा संस्कृति की हो गई है। खाने के लिए पाँच-सितारा होटल, इलाज के लिए पाँच सितारा हस्पताल, पढ़ाई के लिए पाँच सितारा सुविधाओं वाले विद्यालये-सब जगह दिखावे का ही साम्राज्य है। यहाँ तक कि लोग मरने के बाद अपनी कब्र के लिए लाखों रुपए खर्च करने लगे हैं ताकि वे दुनिया में अपनी हैसियत के लिए पहचाने जा सकें।
यह दिखावा-संस्कृति मनुष्य को मनुष्य से दूर कर रही है। लोगों के सामाजिक संबंध घटने लगे हैं। मन में अशांति जन्म ले रही है। आक्रोश बढ़ रहा है, तनाव बढ़ रहा है। हम लक्ष्य से भटक रहे हैं। यह अशुभ है। इसे रोका जाना चाहिए।
Q8. आज की उपभोक्ता संस्कृति हमारे रीति -रिवाजों और त्योहारों को किस प्रकार प्रभावित कर रही है ? अपने अनुभव के आधार पर एक अनुच्छेद लिखिए ।
Answer: आज की उपभोक्ता संस्कृति ने हमारे रीति रिवाजों और त्योहारों को भी काफी हद तक प्रभावित कर रखा है। अब त्योहारों का मतलब भी बदल गया है अब ये त्योहार,रीति रिवाज एक- दूसरे से अच्छे लगने की प्रतिस्पर्धा हो गई है। नई नई कम्पनियाँ जैसे इस अवसर की तलाश में रहती हैं कि किसी भी प्रकार त्योहार के नाम पर ज्यादा से ज्यादा ग्राहक को विज्ञापन द्वारा आकर्षित करे। पहले त्यौहार में सारे काम परिवार के लोग मिलजुल कर करते थे। आज सारी चीजें बाजार से तैयार खरीद ली जाती है और बचाकुचा काम नौकर से करवा लिया जाता है।
Q9. धीरे-धीरे सब कुछ बदल रहा है।
इस वाक्य में बदल रहा है क्रिया है। यह क्रिया कैसे हो रही है – धीरे-धीरे। अतः यहाँ धीरे-धीरे क्रिया-विशेषण है। जो शब्द क्रिया कि विशेषता बताते हैं, क्रिया-विशेषण कहलाते हैं। जहाँ वाक्य में हमें पता चलता है क्रिया कैसे, कब, कितनी और कहाँ हो रही है, वहाँ वह शब्द क्रिया-विशेषण कहलाता है।
(क) ऊपर दिए गए उदाहरण को ध्यान में रखते हुए क्रिया-विशेषण से युक्त पाँच वाक्य पाठ में से छाँटकर लिखिए।
(ख) धीरे-धीरे, ज़ोर से, लगातार, हमेशा, आजकल, कम, ज्यादा, यहाँ, उधर, बाहर-इन क्रियाविशेषण शब्दों का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए।
(ग) नीचे दिए गए वाक्यों में से क्रिया-विशेषण और विशेषण शब्द छाँटकर अलग लिखिए।
वाक्य क्रिया-विशेषण विशेषण
1) कल रात से निरंतर बारिश हो रही है।
2) पेड़ पर लगे पके आम देखकर बच्चों के मुँह में पानी आ गया।
3) रसोईघर से आती पुलाव की हलकी
खुशबू से मुझे ज़ोरों की भूख लग आई।
4) उतना ही खाओ जितनी भूख है।
5) विलासिता की वस्तुओं से आजकल बाजार भरा पड़ा है।
Answer: (क) क्रिया-विशेषण से युक्त शब्द –
(1) एक छोटी-सी झलक उपभोक्तावादी समाज की।
(2) आप उसे ठीक तरह चला भी न सकें।
(3) हमारा समाज भी अन्य-निर्देशित होता जा रहा है।
(4) लुभाने की जी तोड़ कोशिश में निरंतर लगी रहती हैं।
(5) एक सुक्ष्म बदलाव आया है।
(ख) क्रिया-विशेषण शब्दों से बने वाक्य –
(1) धीरे-धीरे – धीरे-धीरे मनुष्य के स्वभाव में बदलाव आया है।
(2) ज़ोर से – इतनी ज़ोर से शोर मत करो।
(3) लगातार – बच्चे शाम से लगातार खेल रहे हैं।
(4) हमेशा – वह हमेशा चुप रहता है।
(5) आजकल – आजकर बहुत बारिश हो रही है।
(6) कम – यह खाना राजीव के लिए कम है।
(7) ज़्यादा – ज़्यादा क्रोध करना हानिकारक है।
(8) यहाँ – यहाँ मेरा घर है।
(9) उधर – उधर बच्चों का स्कूल है।
(10) बाहर – अभी बाहर जाना मना है।
(ग) क्रिया-विशेषण विशेषण
(1) निरंतर कल रात
(2) मुँह में पानी पके आम
(3) भूख हल्की खुशबू
(4) भूख उतना, जितना
(5) आजकल भरा
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