डायरी का एक पन्ना NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sparsh Chapter 11 with Answers

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NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sparsh with Answers

CBSE Solutions Class 10 Hindi डायरी का एक पन्ना

Page No. 73

प्रश्न अभ्यास

मौखिक

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए −

Q1. कलकत्ता वासियों के लिए 26 जनवरी 1931 का दिन क्यों महत्वपूर्ण था?

Answer: 26 जनवरी 1930 को गुलाम भारत में पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था जिसमे बंगाल वासियों की भूमिका नहीं थी। 26 जनवरी 1931 को उसकी पुनरावृत्ति थी परन्तु इस बार कलकत्ता में इसकी तैयारियाँ जोरो पर थी। इसीलिए कलकत्ता वासियों के लिए यह दिन महत्वपूर्ण था।

Q2. सुभाष बाबू के जुलूस का भार किस पर था?

Answer: सुभाष बाबू के जुलूस का भार पूर्णोदास पर था। उन्हें ही जुलूस के लिए सारा प्रबंध करना था, एवं यह सुनिश्चित करना था कि यह जानकारी सभी लोगों तक पहुंच जाए।

Q3. विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू के झंडा गाड़ने पर क्या प्रतिक्रिया हुई?

Answer: अविनाश बाबू प्रांतीय विद्यार्थी संघ के मंत्री थे। उन्होंने श्रद्धानंद पार्क में झंडा गाड़ा तो पुलिस ने उनको पकड़ लिया। उनके साथ आए लोगों को मारा-पीटा और वहाँ से हटा दिया।

Q4. लोग अपने-अपने मकानों व सार्वजनिक स्थलों पर राष्ट्रीय झंडा फहराकर किस बात का संकेत देना चाहते थे?

Answer: लोग अपने-अपने मकानों व सार्वजनिक स्थलों पर झंडा फहराकर इस बात का संकेत देना चाहते थे कि वे भी अपने देश । की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय झंडे का पूर्ण सम्मान करते हैं।

Q5. पुलिस ने बड़े-बड़े पार्कों और मैदानों को क्यों घेर लिया था?

Answer: आज़ादी मनाने के लिए पूरे कलकत्ता शहर में जनसभाओं और झंडारोहण उत्सवों का आयोजन किया गया। इसलिए पार्कों और मैदानों को घेर लिया था।

लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) दीजिए –

Q1. 26 जनवरी 1931 के दिन को अमर बनाने के लिए क्या-क्या तैयारियाँ की गईं ?

Answer: 26 जनवरी 1931 का दिन अमर बनाने के लिए कोलकाता के लोगों ने अपने-अपने मकानों और सार्वजनिक स्थानों पर राष्ट्रीय झंडा फहरा रखा था तथा हर रास्ते पर झंडे फहरा दिए थे। वे जुलूस के रूप में मोनुमेंट की ओर पहुँच रहे थे।

Q2. ‘आज जो बात थी वह निराली थी’− किस बात से पता चलरहा था कि आज का दिन अपने आप में निराला है? स्पष्ट कीजिए।

Answer: आज का दिन निराला इसलिए था क्योंकि स्वतंत्रता दिवस मनाने की प्रथम पुनरावृत्ति थी। पुलिस ने सभा करने को गैरकानूनी कहा था किंतु सुभाष बाबू के आह्वान पर पूरे कलकत्ता में अनेक संगठनों के माध्यम से जुलूस व सभाओं की जोशीली तैयारी थी। पूरा शहर झंडों से सजा था तथा कौंसिल ने मोनुमेंद के नीचे झंडा फहराने और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ने का सरकार को खुला चैलेंज दिया हुआ था। पुलिस भरपूर तैयारी के बाद भी कामयाब नहीं हो पाई।

Q3. पुलिस कमिश्नर के नोटिस और कौंसिल के नोटिस में क्या अंतर था?

Answer: पुलिस कमिश्नर के नोटिस और कौंसिल की नोटिस में यह अंतर था कि जहाँ सरकार अपना भय दिखाकर जनता के ऊपर अपने मनमाने कानूनों को थोप रहीं थीं वहीँ पर आम जनता ऐसे कानूनों का उल्लघंन कर अपनी देशभक्ति का परिचय दे रही थी।

Q4. धर्मतल्ले के मोड़ पर आकर जुलूस क्यों टूट गया?

Answer: जब पुलिस ने सुभाष बाबू को पकड़ लिया,तो स्त्रियों ने जुलूस की अगुवाई की परंतु पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया। जिसके कारण कुछ लोग वहीँ बैठ गए और कुछ को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया इसलिए जुलूस वहां पर टूट गया।

Q5. डा. दासगुप्ता जुलूस में घायल लोगों की देख-रेख तो कर रहे थे, उनके फ़ोटो भी उतरवा रहे थे। उन लोगों के फ़ोटो खींचने की क्या वजह हो सकती थी? स्पष्ट कीजिए।

Answer: डॉ. दासगुप्ता द्वारा घायल लोगों के फोटो खिंचवाने की यह वजह हो सकती है कि अपनी स्वतंत्रता की माँग करनेवाले भारतीय लोगों पर अंग्रेजी सरकार द्वारा ढाए जाने वाले जुल्मों का प्रत्यक्ष प्रमाण पत्र लोगों को दिखाया जा सके। यह भी हो सकता है कि पुलिस की इस बर्बरता को देखकर देश के अन्य लोग भी प्रेरित होकर देश की स्वतंत्रता के लिए आगे आएँ और संगठित होकर सरकार की गलत नीतियों का विरोध करें।

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) दीजिए –

Q1. सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री समाज की क्या भूमिका थी?

Answer: सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री-समाज ने एक अहम भूमिका निभायी थी। स्त्री समाज ने जगह-जगह से जुलूस निकालने की तथा ठीक स्थान पर पहुँचने की तैयारी और कोशिश की थी। स्त्रियों ने मोनुमेंट की सीढ़ियों पर चढ़कर झंडा फहरा करे घोषणा-पत्र पढ़ा था तथा पुलिस के बहुत-से अत्याचारों का सामना किया था। विमल प्रतिभा, जानकी देवी और मदालसा आदि ने जुलूस का सफल नेतृत्व किया था।

Q2. जुलूस के लाल बाज़ार आने पर लोगों की क्या दशा हुई?

Answer: जुलूस के लाल बाज़ार आने पर भीड़ बेकाबू हो गई। पुलिस डंडे बरसा रही थी, लोगों को लॉकअप में भेज रही थी। स्त्रियाँ भी अपनी गिरफ़तारी दे रही थीं। दल के दल नारे लगा रहे थे। लोगों का जोश बढ़ता ही जा रहा था। लाठी चार्ज से लोग घायल हो गए थे। खून बह रहा था। चीख पुकार मची थी फिर भी उत्साह बना हुआ था।

Q3. ‘जब से कानून भंग का काम शुरू हुआ है तब से आज तक इतनी बड़ी सभा ऐसे मैदान में नहीं की गई थी और यह सभा तो कहना चाहिए कि ओपन लड़ाई थी।’ यहाँ पर कौन से और किसके द्वारा लागू किए गए कानून को भंग करने की बात कही गई है? क्या कानून भंग करना उचित था? पाठ के संदर्भ में अपने विचार प्रकट कीजिए।

Answer: यहाँ कानून भंग के माध्यम से उस कानून को भंग करने की बात कही गई है, जिसे अंग्रेजों ने अनैतिक और अनुचित रूप से भारतीयों पर थोप रखा था। ये कानून भारतीयों की स्वतंत्रता का कदम-कदम पर हनन करती थी और भारतीयों की प्रगति के मार्ग में बाधक थी। इन कानूनों को अंग्रेजों ने लागू किया था। ऐसे कानूनों को भंग करना पूर्णतया उचित था। भारतीयों की भलाई के लिए कानून भंग करना सराहनीय कदम था।

Q4. बहुत से लोग घायल हुए, बहुतों को लॉकअप में रखा गया, बहुत-सी स्त्रियाँ जेल गईं, फिर भी इस दिन को अपूर्व बताया गया है। आपके विचार में यह सब अपूर्व क्यों है? अपने शब्दों में लिखिए।

Answer: सुभाष चन्द्र बोस के नेतृत्व में कलकत्ता वासियों ने स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी ज़ोर-शोर से की थी। पुलिस की सख्ती, लाठी चार्ज, गिरफ़तारियाँ, इन सब के बाद भी लोगों में जोश बना रहा। लोग झंडे फहराते, वंदे मातरम बोलते हुए, खून बहाते हुए भी जुलूस निकालने को तत्पर थे। जुलूस टूटता फिर बन जाता। कलकत्ता के इतिहास में इतने प्रचंड रूप में लोगों को पहले कभी नहीं देखा गया था।

(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए –

Q1. आज तो जो कुछ हुआ वह अपूर्व हुआ है। बंगाल के नाम या कलकत्ता के नाम पर कलंक था कि यहाँ काम नहीं हो रहा है वह आज बहुत अंश में धुल गया।

Answer: इस पंक्ति का आशय यह है कि इस आंदोलन के पहले यह कहा जाता था कि कलकत्तावासी देश के लिए अधिक कार्य नहीं करते हैं और यह बात यहाँ के निवासियों के लिए एक कलंक के समान थी परन्तु 26 जनवरी 1931 के दिन को यादगार और अपूर्व बनाकर कलकत्तावासियों ने इस कलंक को पूरी तरह से धो दिया। हजारों स्त्री पुरूषों ने जुलूस में भाग लिया, आज़ादी की सालगिरह मनाने के लिए बिना किसी डर के प्रदर्शन किया। पुलिस के बनाए कानून कि, जुलूस आदि गैर कानूनी कार्य, आदि की भी परवाह नहीं की। पुलिस की लाठी चार्ज होने पर लोग घायल हो गए। खून बहने लगे परन्तु लोगों में जोश की कोई कमी नहीं थी।

Q2. खुला चैलेंज देकर ऐसी सभा पहले नहीं की गई थी?

Answer: भारतीय दलों ने अंग्रेजी राज्य सरकार के आदेश के विपरीत जाकर वहां पर एक बहुत बड़े जुलूस का आयोजन किया एवं यह भी तय किया कि किस समय पर क्या होगा। जो कि अपने आप में बहुत ही अभूतपूर्व है।

भाषा अध्यन

Q1. निम्नलिखित वाक्यों को सरल वाक्यों में बदलिए –

QI. (क) दो सौ आदमियों का जुलूस लालबाज़ार गया और वहाँ पर गिरफ़्तार हो गया।

Answer: दो सौ आदमियों का जुलूस लालबाज़ार जाकर गिरफ्तार हो गया।

(ख) मैदान में हज़ारों आदमियों की भीड़ होने लगी और लोग टोलियाँ बना-बनाकर मैदान में घूमने लगे।

Answer: मैदान में हजारों आदमियों की भीड़ होने पर लोग टोलियाँ बना-बनाकर मैदान में घूमने लगे।

(ग) सुभाष बाबू को पकड़ लिया गया और गाड़ी में बैठाकर लालबाज़ार लॉकअप भेज दिया गया।

Answer: सुभाष बाबू को पकड़ लिया गया और गाड़ी में बैठाकर लालबाज़ार लॉकअप में भेज दिया गया।

II . ‘बड़े भाई साहब’ पाठ में से भी दो-दो सरल, संयुक्त और मिश्र वाक्य छाँटकर लिखिए।

Q2. नीचे दिए गए शब्दों की संधि कीजिए −

श्रद्धा + आंनद =…………
प्रति + एक =…………
पुरूष + उत्तम =…………
झंडा + उत्सव =…………
पुन: + आवृत्ति =…………
ज्योति: + मय =…………

Answer:

श्रद्धा + आनंद = श्रद्धानंद
प्रति + एक = प्रत्येक
पुरुष + उत्तम = पुरुषोत्तम
झंडा + उत्सव = झंडोत्सव
पुनः + आवृत्ति = पुनरावृत्ति
ज्योतिः + मय = ज्योतिर्मय

योग्यता विस्तार

Q1. भौतिक रूप से दबे हुए होने पर भी अंग्रेज़ों के समय में ही हमारा मन आज़ाद हो चुका था। अतः दिसंबर सन् 1929 में लाहौर में कांग्रेस को एक बड़ा अधिवेशन हुआ, इसके सभापति जवाहरलाल नेहरू जी थे। इस अधिवेशन में यह प्रस्ताव पास किया गया कि अब हम ‘पूर्ण स्वराज्य से कुछ भी कम स्वीकार नहीं करेंगे। 26 जनवरी 1930 को देशवासियों ने पूर्ण स्वतंत्रता के लिए हर प्रकार के बलिदान की प्रतिज्ञा की। उसके बाद आज़ादी प्राप्त होने तक प्रतिवर्ष 26 जनवरी को स्वाधीनता दिवस के रूप में मनाया जाता रहा। आजादी मिलने के बाद 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

Answer: छात्र केवल जानकारी के लिए पढ़ें।

Q2. डायरी-यह गद्य की एक विधा है। इसमें दैनिक जीवन में होने वाली घटनाओं, अनुभवों को वर्णित किया जाता है।
आप भी अपनी दैनिक जीवन से संबंधित घटनाओं को डायरी में लिखने का अभ्यास करें।

Answer: 09 जनवरी, 2016
शनिवार

जनवरी महीने का पूर्वार्ध बीतने को है। लगता है इस बार दिल्ली से सरदी रूठी ही रहेगी। सरदी का बहाना करके भी बिस्तर में देर तक नहीं पड़ा रह सकता। अरे! हाँ, याद आया आज तो हमें माता-पिता के साथ चिड़ियाघर देखने जाना है। उठकर जल्दी तैयार होता हूँ। अरे! यह क्या पिता जी कार साफ़ करा रहे हैं। लगता है, वे कार से चिड़ियाघर जाना चाहते हैं। लगता है कि उन्हें याद नहीं कि आज तो दिल्ली की सड़कों पर आड (विषम) नंबर की गाड़ियाँ ही चलेंगी। हमारी कार तो इवन (सम) नंबर की है। पिता जी, उसमें समान रखवाएँ, इससे पहले यह याद दिलाता हूँ। उनसे कहता हूँ कि या तो मेट्रो से चलें या कल रविवार को। आज तो इवन नंबर की कार में चलना ठीक न रहेगा, है न।

मोहित

Q3. जमना लाल बजाज महात्मा गांधी के पाचवाँ पुत्र के रूप में जाने जाते हैं, क्यों? अध्यापक से जानकारी प्राप्त करें।

Answer: जमनालाल बजाज, बजाज उद्योग घराने के संस्थापक थे। कभी वे राजस्थान के प्रसिद्ध व्यापारी हुआ करते थे। ये अपनी व्यावसायिक एवं प्रशासनिक कुशलता से अंग्रेजों के प्रिय बन गए। इन्हें राय बहादुर की उपाधि देकर अंग्रेजों ने सम्मानित किया। जमनालाल को जब गांधी जी का सान्निध्य मिला तो वे गांधी जी से अत्यंत प्रभावित हुए और गांधी जी के शिष्य बन गए। इससे उनका स्वाभिमान जाग उठा और उन्होंने अंग्रेजों का सम्मान लौटाया ही नहीं बल्कि गांधी जी अनुयायी भी बन गए। उनके द्वारा वर्धा में सेवा संघ की स्थापना की गई। वे गांधी जी के सिद्धांत सत्य और अहिंसा का पालन करते थे। अपने सिद्धांत के प्रति ऐसा समर्पण देख गांधी जी उन्हें अपना पुत्र मानने लगे। कालांतर में जमनालाल को गांधी जी के पाँचवें पुत्र के रूप में जाना जाने लगा।

Q4. ढाई लाख का जानकी देवी पुरस्कार जमना लाल बजाज फाउंडेशन द्वारा पूरे भारत में सराहनीय कार्य करने वाली महिलाओं को दिया जाता है। यहाँ ऐसी कुछ महिलाओं के नाम दिए जा रहे हैंश्रीमती अनुताई लिमये 1993 महाराष्ट्र; सरस्वती गोरा 1996 आंध्र प्रदेश; मीना अग्रवाल 1998 असम; सिस्टर मैथिली 1999 केरल; कुंतला कुमारी आचार्य 2001 उड़ीसा। इनमें से किसी एक के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कीजिए।

Answer: Do Yourself

परियोजना कार्य

Q1. स्वतंत्रता आंदोलन में निम्नलिखित महिलाओं ने जो योगदान दिया, उसके बारे में संक्षिप्त जानकारी प्राप्त करके लिखिए-
(क) सरोजिनी नायडू
(ख) अरुणा आसफ़ अली
(ग) कस्तूरबा गांधी ।

Answer: Do Yourself

Q2. इस पाठ के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम में कलकत्ता (कोलकाता) के योगदान का चित्र स्पष्ट होता है। आज़ादी के आंदोलन में आपके क्षेत्र का भी किसी न किसी प्रकार का योगदान रहा होगा। पुस्तकालय, अपने परिचितों या फिर किसी दूसरे स्रोत से इस संबंध में जानकारी हासिल कर लिखिए।

Answer: Do Yourself

Q3. केवल प्रचार में दो हज़ार रुपया खर्च किया गया था। तत्कालीन समय को मद्देनजर रखते हुए अनुमान लगाइए कि प्रचार-प्रसार के लिए किन माध्यमों का उपयोग किया गया होगा?

Answer: तत्कालीन समय अर्थात् 1930-31 में प्रचार-प्रसार के लिए बहुत सारे झंडे बनवाए गए होंगे, प्रचार के पंपलेट (इश्तिहार) छपवाकर बाँटे गए होंगे, दीवारों पर नारे या स्लोगन लिखे गए होंगे। इसके अलावा कार्यकर्ताओं को दूर-दराज के क्षेत्रों में आने-जाने (प्रचारार्थ) के लिए कुछ नकद भी दिया गया होगा।

Q4. आपको अपने विद्यालय में लगने वाले पल्स पोलियो केंद्र की सूचना पूरे मोहल्ले को देनी है। आप इस बात का प्रचार बिना पैसे के कैसे कर पाएँगे? उदाहरण के साथ लिखिए।

Answer: मैं अपनी कॉलोनी के आसपास स्थित झुग्गी बस्तियों में अपने मित्रों के साथ जाऊँगा और पल्स पोलियो ड्राप पिलवाने का अनुरोध करूँगा तथा पोलियो के खतरे से भी सावधान करूंगा।

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