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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh with Answers
CBSE Solutions Class 9 Hindi तुम कब जाओगे, अतिथि
Page No. 39
प्रश्न अभ्यास
मौखिक
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर एक-दो-पंक्तियों में दीजिए।
Q1.अतिथि कितने दिनों से लेखक के घर पर रह रहा है?
Answer: अतिथि लेखक के घर पर पिछले चार दिनों से रह रहा था और अभी तक जाने का नाम नहीं ले रहा था।
Q2. कैलेंडर की तारीखें किस तरह फड़फड़ा रही हैं?
Answer: कैलेंडर की तारीखें अपनी सीमा में नम्रता से फड़फड़ा रही हैं।
Q3. पति-पत्नी ने मेहमान का स्वागत कैसे किया?
Answer: पति ने स्नेह से भीगी मुस्कराहट से मेहमान को गले लगाकर उसका स्वागत किया। रात के भोजन में दो प्रकार की सब्ज़ियों और रायते के अलावा मीठी चीजों का भी प्रबंध किया गया था। उनके आने पर पत्नी ने उनका स्वागत सादर प्रणाम करके किया था।
Q4. दोपहर के भोजन को कौन-सी गरिमा प्रदान की गयी?
Answer: दोपहर के भोजन को लंच की तरह शानदार बनाकर लंच की गरिमा प्रदान की गई।
Q5. तीसरे दिन सुबह अतिथि ने क्या कहा?
Answer: तीसरे दिन अतिथि ने – कपड़े धुलवाने हैं कहकर धोबी के बारे में पूछा।
Q6. सत्कार की ऊष्मा समाप्त होने पर क्या हुआ?
Answer: सत्कार की उष्मा समाप्त होने पर लंच डिनर की जगह खिचड़ी बनने लगी थी। खाने में सादगी आ गई और अब भी अतिथि नहीं जाता तो उपवास तक रखना पड़ सकता था। हंसी के गुब्बारों की जगह एक चुप्पी साध गई। सौहार्द अब धीरे-धीरे बोरियत और बोझिलता में बदलने लगा था।
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए –
Q1. लेखक अतिथि को कैसी विदाई देना चाहता था?
Answer: लेखक अतिथि को एक भावभीनी विदाई देना चाहता था। वह चाहता था कि जब अतिथि जाए तो पति-पत्नी उसे स्टेशन तक छोड़ने जाए। उन्हें सम्मानजनक विदाई देना चाहते थे।
Q2. पाठ में आए निम्नलिखित कथनों की व्याख्या कीजिए −
(क) अंदर ही अंदर कहीं मेरा बटुआ काँप गया।
Answer: जब लेखक ने अपने घर आए अनचाहे अतिथि को देखा तो उसको बटुआ काँप उठा। आशय यह है कि उसे अपनी आर्थिक स्थिति डगमगाने का भय सताने लगा। उसे लगा कि इस मेहमान पर बहुत अधिक खर्च करना पड़ेगा।
(ख) अतिथि सदैव देवता नहीं होता, वह मानव और थोड़े अंशों में राक्षस भी हो सकता है।
Answer: अतिथि देवता होता है पर अपना देवत्व बनाए रखकरे। यदि अतिथि अगले दिन वापस नहीं जाता है और मेजबान के लिए पीड़ा का कारण बनने लगता है तो मनुष्य न रहकर राक्षस नज़र आने लगता है। देवता कभी किसी के दुख का कारण नहीं बनते हैं।
(ग) लोग दूसरे के होम की स्वीटनेस को काटने न दौड़ें।
Answer: घर तभी तक ‘स्वीट होम’ यानि सुमधुर और आरामदायक जान पड़ता है जब तक कि उसमें घर के सदस्य ही रहें। कोई अनचाहा अतिथि उन पर बोझ बनकर न आ टिके। अतिथि के कारण घर की सरसता समाप्त हो जाती है।
(घ) मेरी सहनशीलता की वह अंतिम सुबह होगी।
Answer: पहले दिन के बाद से ही लेखक को अतिथि का रुकना भारी पड़ रहा था। दूसरा तीसरा दिन तो जैसे तैसे बीता पर अगले दिन वह सोचने लगा कि यदि अतिथि पाँचवें दिन रुका तो उसे गेट आउट कहना पड़ेगा।
(ङ) एक देवता और एक मनुष्य अधिक देर साथ नहीं रहते।
Answer: देवता तभी भाता है, जबकि वह थोड़ी देर के लिए दर्शन दे। यदि वह आकर जम जाए तो काटने दौड़ता है। मनुष्य लंबे समय तक किसी को सम्मान नहीं दे सकता। अतिथि को तो बिल्कुल नहीं। यह मानव स्वभाव के विरुद्ध है।
(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50 -60 शब्दों में) लिखिए –
Q1. कौन-सा आघात अप्रत्याशित था और उसका लेखक पर क्या प्रभाव पड़ा?
Answer: मेहमानों को बिना बुलाए घर चले आने का आघात अप्रत्याशित था तथा उनके घर में रहकर नई-नई फरमाइशें करना उससे भी अधिक मार्मिक चोट थी। अचानक कह देना कि वह धोबी को कपड़े धोने के लिए देना चाहते है; लेखक की समीपता की बेल को रबर की भांति खींच देता है। तब उन्हें लगता है। अतिथि सदैव देवता नहीं होते। अच्छा अतिथि वही होता है जो सूचना देकर आए और निर्धारित लौट जाए। जैसा आदर-सत्कार हो उसे स्वीकार करे तथा मेजबान को यह सोचने पर विवश न करे कि! तुम कब जाओगे।
Q2.’संबंधों का संक्रमण के दौर से गुज़रना’ −इस पंक्ति से आप क्या समझते हैं? विस्तार से लिखिए।
Answer: संबंधों का संक्रमण के दौर से गुज़रना‘ − इस पंक्ति का आशय है संबंधों में परिवर्तन आना। जो संबंध आत्मीयतापूर्ण थे अब घृणा और तिरस्कार में बदलने लगे। जब लेखक के घर अतिथि आया था तो उसके संबंध सौहार्द पूर्ण थे। उसने उसका स्वागत प्रसन्नता पूर्वक किया था। लेखक ने अपनी ढ़ीली-ढ़ाली आर्थिक स्थिति के बाद भी उसे शानदार डिनर खिलाया और सिनेमा दिखाया। लेकिन अतिथि चार पाँच दिन रुक गया तो स्थिति में बदलाव आने लगा और संबंध बदलने लगे।
Q3. जब अतिथि चार दिन तक नहीं गया तो लेखक के व्यवहार में क्या-क्या परिवर्तन आए?
Answer: जब अतिथि चार दिन तक नहीं गया तो लेखक ने उसके साथ मुस्कुराकर बात करना छोड़ दिया, बातचीत के विषय समाप्त हो गए। सौहार्द व्यवहार अब बोरियत में बदल गया। लंच डिनर अब खिचड़ी पर आ गए। इसके बाद लेखक उपवास तक जाने की तैयारी करने लगा। लेखक अतिथि को ‘गेट आउट’ तक कहने के लिए तैयार हो गया।
भाषा अध्यन
Q1. निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्याय लिखिए −
चाँद, ज़िक्र, आघात, ऊष्मा, अंतरंग
Answer:
चांद – राकेश – शशि
जिक्र- उल्लेख -वर्णन
आघात- हमला -चोट
ऊष्मा- गर्मी -घनिष्ठता
अंतरंग- घनिष्ठ -आंतरिक
Q2. निम्नलिखित वाक्यों को निर्देशानुसार परिवर्तित कीजिए −
(क) हम तुम्हें स्टेशन तक छोड़ने जाएँगे। (नकारात्मक वाक्य)
…………………………………..
(ख) किसी लॉण्ड्री पर दे देते हैं, जल्दी धुल जाएँगे। (प्रश्नवाचक वाक्य)
…………………………………..
(ग) सत्कार की ऊष्मा समाप्त हो रही थी। (भविष्यत् काल)
…………………………………..
(घ) इनके कपड़े देने हैं। (स्थानसूचक प्रश्नवाची)
…………………………………..
(ङ) कब तक टिकेंगे ये? (नकारात्मक)
…………………………………..
Answer:
(क) हम तुम्हें स्टेशन तक छोड़ने जाएँगे। (नकारात्मक वाक्य)
हम तुम्हें स्टेशन तक छोड़ने नहीं जाएँगे।
(ख) किसी लॉण्ड्री पर दे देते हैं, जल्दी धुल जाएँगे। (प्रश्नवाचक वाक्य)
किसी लॉण्ड्री पर दे देने से क्या जल्दी धुल जाएँगे?
(ग) सत्कार की ऊष्मा समाप्त हो रही थी। (भविष्यत् काल)
सत्कार की ऊष्मा समाप्त हो जाएगी। (भविष्यत् काल)
(घ) इनके कपड़े देने हैं। (स्थानसूचक प्रश्नवाची)
इनके कपड़े यहाँ देने हैं।
(ङ) कब तक टिकेंगे ये? (नकारात्मक)
ये अब नहीं टिकेंगे।
Q3. पाठ में आए इन वाक्यों में ‘चुकना’ क्रिया के विभिन्न प्रयोगों को ध्यान से देखिए और वाक्य संरचना को समझिए
(क) तुम अपने भारी चरण-कमलों की छाप मेरी जमीन पर अंकित कर चुके।
(ख) तुम मेरी काफ़ी मिट्टी खोद चुके।
(ग) आदर-सत्कार के जिस उच्च बिंदु पर हम तुम्हें ले जा चुके थे।
(घ) शब्दों का लेन-देन मिट गया और चर्चा के विषय चुक गए।
(ङ) तुम्हारे भारी भरकम शरीर से सलवटें पड़ी चादर बदली जा चुकी और तुम यहीं हो।
Answer: छात्र स्वयं चुकना क्रिया के विभिन्न प्रयोगों को ध्यान से देखें और वाक्य से रचना को समझें।
योग्यता विस्तार
Q1. अतिथि देवो भव’ उक्ति की व्याख्या करें तथा आधुनिक युग के संदर्भ में इसका आकलन करें।
Answer: भारतीय संस्कृति में अतिथि को देवता का दर्जा दिया गया है। उसे देवता के समान मानकर उसका आदर सत्कार किया जाता है। आज के भौतिकवादी युग में मनुष्य मशीनी जीवन जी रहा है। उसके पास अपने परिवार के लिए समय नहीं रह गया है तो अतिथि के लिए समय कैसे निकाले। इसके अलावा महँगाई के इस युग में जब अपनी जरूरतें पूरी करना कठिन हो रहा तो अतिथि का सत्कार जेब काटने लगता है। ऐसे में मनुष्य को अतिथि से दूर ही रहना चाहिए।
Q2. विद्यार्थी अपने घर आए अतिथियों के सत्कार का अनुभव कक्षा में सुनाएँ। |
Answer: कल ही मेरे घर मेरे पिताजी के मित्र आए। मैंने आते ही उन्हें नमस्कार किया। उन्होंने मुझे बड़े प्यार से अपने पास बुलाया। मुझसे नाम पूछा, बातें की। तब मैं उनके लिए पानी लाया। फिर चाय-बिस्कुट लाया। वे बड़े प्यार-से मुझे निहारते रहे और बातें करते रहे। जब वे जाने लगे तो मैंने उन्हें फिर से नमस्ते की। मुझे उनका आना और बातें करना बहुत अच्छा लगा।
Q3. अतिथि के अपेक्षा से अधिक रुक जाने पर लेखक की क्या-क्या प्रतिक्रियाएँ हुईं, उन्हें क्रम से छाँटकर लिखिए।
Answer:
- दूसरे दिन मन में आया कि बस इस अतिथि को अब और अधिक नहीं झेला जा सकता।
- तीसरे दिन, वह राक्षस प्रतीत होने लगा।
- चौथे दिन, मुसकान फीकी पड़ गई। ठहाके बंद हो गए। बातचीत रुक गई। डिनर की बजाय खिचड़ी बन गई। मन में आया कि उसे ‘गेट आउट’ कह दिया जाए।
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