नौबतखाने में इबादत NCERT Solutions for Class 10 Hindi Chapter 16 with Answers free PDF Download

Class 10 Hindi NCERT Solutions

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NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitij-2 with Answers

CBSE Solutions Class 10 Hindi नौबतखाने में इबादत

Page No. 112

प्रश्न अभ्यास

Q1. शहनाई की दुनिया में डुमराँव को क्यों याद किया जाता है?

Answer: मशहूर शहनाई वादक “बिस्मिल्ला खाँ” का जन्म डुमराँव गाँव में ही हुआ था। इसके अलावा शहनाई बजाने के लिए रीड का प्रयोग होता है। रीड अंदर से पोली होती है, जिसके सहारे शहनाई को फूँका जाता है। रीड, नरकट से बनाई जाती है, जो डुमराँव में मुख्यत: सोन नदी के किनारे पाई जाती है। इसी कारण शहनाई की दुनिया में डुमराँव का महत्त्व है।

Q2. बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की मंगलध्वनि का नायक क्यों कहा गया है?

Answer: बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की मंगलध्वनि का नायक कहा गया है क्योंकि इनकी शहनाई से सदा मंगलध्वनि ही निकली, कभी भी अमंगल स्वर नहीं निकले। इसके अतिरिक्त परंपरा से ही शहनाई को मांगलिक विधि-विधानों के अवसर पर बजाया जाने वाला यंत्र माना गया है।

Q3. सुषिर-वाद्यों से क्या अभिप्राय है? शहनाई को ‘सुषिर वाद्यों में शाह’ की उपाधि क्यों दी गई होगी?

Answer: वैदिक इतिहास में शहनाई का कोई उल्लेख नहीं मिलता है। इसे संगीत शास्त्रों के अंतर्गत सुषिर-वाद्यों में गिना जाता है। सुषिर-वाद्य अर्थात् फेंककर बजाए जाने वाले वाय। ऐसे वाद्य जिनमें नाड़ी होती है उन्हें अरब में ‘नय’ बोलते हैं, जबकि शोहनये अर्थात शहनाई को सुषिर-वाद्यों में शाह की उपाधि दी गई है।

Q4. आशय स्पष्ट कीजिए –

(क) ‘फटा सुर न बख्शें। लुंगिया का क्या है, आज फटी है, तो कल सी जाएगी।

Answer: यहाँ बिस्मिल्ला खाँ ने सुर तथा कपड़े (धन-दौलत) से तुलना करते हुए सुर को अधिक मूल्यवान बताया है। क्योंकि कपड़ा यदि एक बार फट जाए तो दुबारा सिल देने से ठीक हो सकता है। परन्तु किसी का फटा हुआ सुर कभी ठीक नहीं हो सकता है। और उनकी पहचान सुरों से ही थी इसलिए वह यह प्रार्थना करते हैं कि ईश्वर उन्हें अच्छा कपड़ा अर्थात् धन-दौलत दें या न दें लेकिन अच्छा सुर अवश्य दें।

(ख) ‘मेरे मालिक सुर बख्श दे। सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ।’

Answer: बिस्मिल्ला खाँ पाँचों वक्त नमाज़ के बाद खुदा से सच्चा सुर पाने की प्रार्थना करते थे। वे खुदा से कहते उन्हें सच्चा सुर दे। उस सुर में इतनी ताकत हो कि उसे सुनने वालों की आँखों से सच्चे मोती की तरह आँसू निकल जाए। यही उनके सुर की कामयाबी होगी।

Q5. काशी में हो रहे कौन-से परिवर्तन बिस्मिल्ला खाँ को व्यथित करते थे?

Answer: समय के साथ-साथ काशी में अनेक परिवर्तन हो रहे हैं जो बिस्मिल्ला खाँ को दुखी करते हैं, जैसे

  • पक्का महाल से मलाई बरफ़ वाले गायब हो रहे हैं।
  • कुलसुम की कचौड़ियाँ और जलेबियाँ अब नहीं मिलती हैं।
  • संगीत और साहित्य के प्रति लोगों में वैसा मान-सम्मान नहीं रहा।
  • गायकों के मन में संगतकारों के प्रति सम्मान भाव नहीं रहा।
  • हिंदू-मुसलमानों में सांप्रदायिक सद्भाव में कमी आ गई है।

Q6. पाठ में आए किन प्रसंगों के आधार पर आप कह सकते हैं कि –

(क) बिस्मिल्ला खाँ मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे।

Answer: बिस्मिल्ला खाँ हिंदुओं और मुसलमानों की मिली-जुली संस्कृति के प्रतीक थे। वे स्वयं सच्चे मुसलमान थे। उनकी मुसलिम धर्म, उसवों और त्योहारों में गहरी आस्था थी। वे मुहर्रम सच्ची श्रद्धा से मनाते थे। वे पाँचों समय नमाज़ अदा करते थे। साथ ही वे जीवन-भर काशी, विश्वनाथ और बालाजी के मंदिर में शहनाई बजाते रहे। वे गंगा को मैया मानते रहे। वे काशी से बाहर रहते हुए भी बालाजी के मंदिर की ओर मुँह करके प्रणाम किया करते थे। उनकी इसी सच्ची भावना के कारण उन्हें हिंदू-मुसलिम एकता का प्रतीक कहा गया।

(ख) वे वास्तविक अर्थों में एक सच्चे इनसान थे।

Answer: बिस्मिल्ला खाँ एक सच्चे इंसान थे। वे धर्मों से अधिक मानवता को महत्व देते थे, हिंदु तथा मुस्लिम धर्म दोनों का ही सम्मान करते थे, भारत रत्न से सम्मानित होने पर भी उनमें घमंड नहीं था, दौलत से अधिक सुर उनके लिए ज़रुरी था।

Q7. बिस्मिल्ला खाँ के जीवन से जुड़ी उन घटनाओं और व्यक्तियों का उल्लेख करें जिन्होंने उनकी संगीत साधना को समृद्ध किया?

Answer: बिस्मिल्ला खाँ के जीवन में कुछ ऐसे व्यक्ति और कुछ ऐसी घटनाएँ थीं, जिन्होंने उनकी संगीत साधना को प्रेरित किया-

  1. बालाजी मंदिर तक जाने का रास्ता रसूलनबाई और बतूलनबाई के यहाँ से होकर जाता था। इस रास्ते से कभी ठुमरी, कभी टप्पे, कभी दादरा की आवाज़ें आती थी। इन्हीं गायिका बहिनों को सुनकर उनके मन में संगीत की ललक जागी।
  2. बिस्मिल्ला खाँ जब सिर्फ़ चार साल के थे, तब छुपकर अपने नाना को शहनाई बजाते हुए सुनते थे। रियाज़ के बाद जब उनके नाना उठकर चले जाते थे, तब अपनी नाना वाली शहनाई ढूँढते थे, और उन्हीं की तरह शहनाई बजाना चाहते थे।
  3. मामूजान अलीबख्श जब शहनाई बजाते-बजाते सम पर आ जाते तो बिस्मिल्ला खाँ धड़ से एक पत्थर ज़मीन में मारा करते थे। इस प्रकार उन्होंने संगीत में दाद देना सीखा।
  4. बिस्मिल्ला खाँ कुलसुम की कचौड़ी तलने की कला में भी संगीत का आरोह-अवरोह देखा करते थे।
  5. बचपन में वे बालाजी मंदिर पर रोज़ शहनाई बजाते थे। इससे शहनाई बजाने की उनकी कला दिन-प्रतिदिन निखरने लगी।

Q8. बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व की कौन-कौन सी विशेषताओं ने आपको प्रभावित किया?

Answer: बिस्मिल्ला खाँ के व्यक्तित्व में अनेक ऐसी विशेषताएँ हैं, जिन्होंने हमें प्रभावित किया। उनमें से कुछ हैं – संगीत साधना के प्रति पूर्ण निष्ठा, सादा जीवन उच्च विचार, हिंदू-मुस्लिम एकता के समर्थक, भारतीय संस्कृति के प्रति गहरा लगाव, प्रदर्शन की भावना का न होना, शहनाई को उच्च स्थान दिलाना, शहनाई में जादू का-सा असर होना तथा तमाम तारीफ़ के लिए ईश्वर की कृपा मानना।

Q9. मुहर्रम से बिस्मिल्ला खाँ के जुड़ाव को अपने शब्दों में लिखिए।

Answer: बिस्मिल्ला खाँ अपने मज़हब की परंपराओं के प्रति शालीन और सजग थे। मुहर्रम पर्व के साथ बिस्मिल्ला खाँ और शहनाई का संबंध गहरा रहा है। जब मुहर्रम का महीना होता था, जिसमें शिया मुसलमान हज़रत इमाम हुसैन और उनके वंशजों के प्रति अज़ादारी मानते हैं तो उनकी तरह बिस्मिल्ला खाँ भी पूरे दस दिनों तक शोक मनाते थे। इन दिनों में खाँ साहब या उनके परिवार का कोई भी व्यक्ति न तो शहनाई बजाता था और न किसी संगीत के कार्यक्रमों में शामिल होता था। आठवीं तारीख उनके लिए खास महत्त्व की होती थी। इस दिन खाँ साहब खड़े होकर शहनाई बजाते थे।

Q10. बिस्मिल्ला खाँ कला के अनन्य उपासक थे, तर्क सहित उत्तर दीजिए।

Answer: बिस्मिल्ला खाँ भारत के सर्वश्रेष्ठ शहनाई वादक थे। वे अपनी कला के प्रति पूर्णतया समर्पित थे। उन्होंने जीवनभर संगीत को संपूर्णता व एकाधिकार से सीखने की इच्छा को अपने अंदर जिंदा रखा। वे अपने सुरों को कभी भी पूर्ण नहीं समझते थे इसलिए खुदा के सामने वे गिड़गिड़ाकर कहते – ”मेरे मालिक एक सुर बख्श दे। सुर में वह तासीर पैदा कर कि आँखों से सच्चे मोती की तरह अनगढ़ आँसू निकल आएँ।” खाँ साहब ने कभी भी धन-दौलत को पाने की इच्छा नहीं की बल्कि उन्होंने संगीत को ही सर्वश्रेष्ठ माना। वे कहते थे- ”मालिक से यही दुआ है – फटा सुर न बख्शें। लुंगिया का क्या है, आज फटी है, तो कल सी जाएगी।”
इससे यह पता चलता है कि बिस्मिल्ला खाँ कला के अनन्य उपासक थे।

Q11. निम्नलिखित मिश्र वाक्यों के उपवाक्य छाँटकर भेद भी लिखिए

(क) यह ज़रूर है कि शहनाई और डुमराँव एक-दूसरे के लिए उपयोगी हैं।

Answer: शहनाई और डुमराँव एक-दूसरे के लिए उपयोगी हैं। (संज्ञा आश्रित उपवाक्य)

(ख) रीड अंदर से पोली होती है जिसके सहारे शहनाई को फेंका जाता है।

Answer: जिसके सहारे शहनाई को फूँका जाता है। (विशेषण आश्रित उपवाक्य)

(ग) रीड नरकट से बनाई जाती है जो डुमराँव में मुख्यत: सोन नदी के किनारों पर पाई जाती है।

Answer: जो डुमराँव में मुख्यत: सोन नदी के किनारों पर पाई जाती है। (विशेषण आश्रित उपवाक्य)

(घ) उनको यकीन है, कभी खुदा यूं ही उन पर मेहरबान होगा।

Answer: कभी खुदा यूँ ही उन पर मेहरबान होगा। (संज्ञा आश्रित उपवाक्य)

(ङ) हिरन अपनी ही महक से परेशान पूरे जंगल में उस वरदान को खोजता है जिसकी गमक उसी में समाई है।

Answer: जिसकी गमक उसी में समाई है। (विशेषण आश्रित उपवाक्य)

(च) खाँ साहब की सबसे बड़ी देन हमें यही है कि पूरे अस्सी बरस उन्होंने संगीत को संपूर्णता व एकाधिकार से सीखने की जिजीविषा को अपने भीतर जिंदा रखा।

Answer: पूरे अस्सी बरस उन्होंने संगीत को संपूर्णता व एकाधिकार से सीखने की जिजीविषा को अपने भीतर जिंदा रखा। (संज्ञा आश्रित उपवाक्य)

Q12. निम्नलिखित वाक्यों को मिश्रित वाक्यों में बदलिए

(क) इसी बालसुलभ हँसी में कई यादें बंद हैं।

Answer: यही वह बालसुलभ हँसी है जिसमें कई यादें बंद हैं।

(ख) काशी में संगीत आयोजन की एक प्राचीन एवं अद्भुत परंपरा है।

Answer: काशी की यह प्राचीन एवं अद्भुत परंपरा है कि यहाँ संगीत आयोजन होते हैं।

(ग) धत्! पगली ई भारतरत्न हमको शहनईया से मिला है, लुगिया पे नाहीं।

Answer: धत्! पगली ई भारतरत्न जो हमको मिला है, ऊ शहनईया पे मिला है, लुंगिया पे नाहीं।

(घ) काशी का नायाब हीरा हमेशा से दो कौमों को एक होकर आपस में भाईचारे के साथ रहने की प्रेरणा देता रहा।

Answer: यह काशी का नायाब हीरा है जो हमेशा से दो कौमों को एक होकर आपस में भाईचारे के साथ रहने की प्रेरणा देता रहा।

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