मानवीय करुणा की दिव्या चमक NCERT Solutions for Class 10 Hindi Chapter 13 with Answers free PDF Download

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NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitij-2 with Answers

CBSE Solutions Class 10 Hindi मानवीय करुणा की दिव्या चमक

Page No. 88

प्रश्न अभ्यास

Q1. फ़ादर की उपस्थिति देवदार की छाया जैसी क्यों लगती थी ?

Answer: देवदार एक विशाल और छायादार वृक्ष होता है, जो अपनी सघन और शीतल छाया से श्रांत-पथिक एवं अपने आस-पड़ोस को शीतलता प्रदान करता है। ठीक ऐसे ही व्यक्तित्व वाले थे- फ़ादर कामिल बुल्क़े।
लेखक के बच्चे के मुँह में अन्न का पहला दाना फादर बुल्के ने डाला था। उस क्षण उनकी नीली आँखों में जो ममता और प्यार तैर रहा था, उससे लेखक को फादर बुल्के की उपस्थिति देवदार की छाया जैसी लगती थी।

Q2. फ़ादर बुल्के भारतीय संस्कृति के एक अभिन्न अंग हैं, किस आधार पर ऐसा कहा गया है?

Answer: फ़ादर बुल्के भारतीय संस्कृति के एक अभिन्‍न अंग हैं। विदेशी होते हुए भी उन्हें भारत और भारतीय संस्कृति से बहुत लगाव था। यही कारण था कि वे अपनी जन्मभूमि छोड़ भारत आ गए। पहले धर्माचार की पढ़ाई की। 9-10 वर्ष दार्जिलिंग में पढ़ते रहे। कोलकाता से बी०ए० और फिर इलाहाबाद से एम०ए० किया। सबसे बहुत प्रेम से मिलते थे। सभी के पारिवारिक उत्सवों में शामिल हो कर बड़े भाई तथा पुरोहित की भूमिका अदा करते। ‘परिमल’ जैसी संस्था से जुड़कर साहित्यिक गोष्ठियों में भाग लेते। फ़ादर बुल्के ने अंग्रेजी हिंदी शब्दकोश तैयार करके, बाइबिल का हिंदी अनुवाद करके तथा “रामकथा” पर शोध करके हिंदी भाषा का गौरव बढ़ाया। हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में देखने के लिए प्रयास किए।

Q3. पाठ में आए उन प्रसंगों का उल्लेख कीजिए जिनसे फ़ादर बुल्के का हिंदी प्रेम प्रकट होता है?

Answer: ऐसे प्रसंग जिनसे फादर बुल्के का हिंदी के प्रति प्रेम प्रकट होता है, वे इस प्रकार हैं

  • फ़ादर बुल्के ने हिंदी में एम.ए. किया।
  • उन्होंने सन् 1950 में अपना शोध प्रबंध “रामकथा : उत्पत्ति और विकास” हिंदी | में पूर्ण किया।
  • उन्होंने सुप्रसिद्ध शब्दकोश अंग्रेजी-हिंदी लिखा।
  • वे हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में देखने के लिए सदैव चिंतित रहे।
  • हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए अकाट्य तर्क प्रस्तुत करते रहे।
  • जब हिंदी वाले हिंदी की उपेक्षा करते थे तो बहुत दुखी होते थे।

Q4. इस पाठ के आधार पर फ़ादर कामिल बुल्के की जो छवि उभरती है उसे अपने शब्दों में लिखिए।

Answer: फ़ादर बुल्के एक निष्काम कर्मयोगी थे। वे लम्बे, गोरे, भूरी दाढ़ी व नीली आँखों वाले चुम्बकिय आकर्षण से युक्त संन्यासी थे। अपने हर प्रियजन के लिए उनके ह्रदय में ममता व अपनत्व की अमृतमयी भावना उमड़ती रहती थी। उनके व्यक्तित्व में मानवीय करुणा की दिव्य चमक थी। वे अपने प्रिय जनों को आशीषों से भर देते थे। वे भारत को ही अपना देश मानते हुए यहीं की संस्कृति में रच -बस गए थे।

वे हिंदी के प्रकांड विद्वान थे एवं हिंदी के उत्थान के लिए सदैव तत्पर रहते थे। उन्होंने हिंदी में पी.एच.डी की उपाधि प्राप्त करने के उपरान्त ”ब्लू-बर्ड ”ताठा ”बाइबिल ”का हिंदी अनुवाद भी किया। फ़ादर बुल्के अपने स्नेहीजनों के व्यक्तिगत सुख -दुख का सदा ध्यान रखते थे। वे रिश्ते बनाते थे ,तो तोड़ते नहीं थे। उनके सांत्वना भरे शब्दों से लोगों का हृदय प्रकाशित हो उठता था। अपने व्यक्तित्व की महानता के कारण ही वे सभी की श्रद्धा के पात्र थे।

Q5. लेखक ने फ़ादर बुल्के को ‘मानवीय करुणा की दिव्य चमक’ क्यों कहा है?

Answer: फ़ादर बुल्के मानवीय करुणा की प्रतिमूर्ति थे। उनके मन में सभी के लिए प्रेम भरा था जो कि उनके चेहरे पर स्पष्ट दिखाई देता था। विपत्ति की घड़ी में वे सांत्वना के दो बोल द्वारा किसी भी मनुष्य का धीरज बाँधते थे। स्वयं लेखक की पत्नि तथा पुत्र की मृत्यु पर फ़ादर बुल्के ने उन्हें सांत्वना दी थी। किसी भी मानव का दु:ख उनसे देखा नहीं जाता था। उसके कष्ट दूर करने के लिए वे यथाशक्ति प्रयास करते थे।

Q6. फ़ादर बुल्के ने संन्यासी की परंपरागत छवि से अलग एक नयी छवि प्रस्तुत की है, कैसे?

Answer: परंपरागत रूप से संन्यासी एक अलग छवि लेकर जीते हैं। उनका विशेष पहनावा होता है। वे सांसारिकता से दूर होकर एकांत में जीवन बिताते हैं। उन्हें मानवीय संबंधों और मोह-माया से कुछ लेना-देना नहीं होता है। वे लोगों के सुख-दुख से तटस्थ रहते हैं और ईश वंदना में समय बिताते हैं।

फ़ादर बुल्के परंपरागत संन्यासियों से भिन्न थे। वे मन के नहीं संकल्प के संन्यासी थे। वे एक बार संबंध बनाकर तोड़ना नहीं जानते थे। वे लोगों से अत्यंत आत्मीयता से मिलते थे। वे अपने परिचितों के दुख-सुख में शामिल होते थे और देवदारु वृक्ष की सी शीतलता से भर देते थे। इस तरह उन्होंने परंपरागत संन्यासी से हटकर अलग छवि प्रस्तुत की।

Q7. आशय स्पष्ट कीजिए –

(क) नम आँखों को गिनना स्याही फैलाना है।

Answer: फ़ादर कामिल बुल्के की मृत्यु पर उनके प्रियजन, परिचित और साहित्यिक मित्र इतनी अधिक संख्या में रोए कि उनको गिनना कठिन है। उनके बारे में लिखना व्यर्थ में स्याही खर्च करना है। आशय यह है कि उनके दुख में रोने वालों की संख्या बहुत अधिक थी।

(ख) फ़ादर को याद करना एक उदास शांत संगीत को सुनने जैसा है।

Answer: प्रस्तुत पंक्ति का आशय है कि जिस प्रकार एक उदास शांत संगीत को सुनते समय हमारा मन गहरे दुःख में डूब जाता है, वातावरण में एक अवसाद भरी निस्तब्ध शांति छा जाती है और हमारी आँखें अपने-आप ही नम हो जाती हैं, ठीक वैसी ही दशा फ़ादर बुल्के को याद करते समय हो जाती है।

Q8. आपके विचार से बुल्के ने भारत आने का मन क्यों बनाया होगा ?

Answer: मेरे विचार से फ़ादर बुल्के ने भारत आने का मन इसलिए बनाया होगा, क्योंकि उन्हें भारत तथा भारतीय संस्कृति से गहरा लगाव था। वे भारत आकर भारतीय आदर्शों तथा संस्कृति से गहरे रूप से जुड़ना चाहते थे। वे हिंदी भाषा से बहुत प्रेम करते थे। हिंदी साहित्य तथा हिंदी भाषा को समृद्ध करने के उद्देश्य से ही वे भारत आए। भारत में रहकर ही वे महान कार्य कर सकते थे।

Q9. ‘बहुत सुंदर है मेरी जन्मभूमि – रेम्सचैपल।’ – इस पंक्ति में फ़ादर बुल्के की अपनी जन्मभूमि के प्रति कौन-सी भावनाएँ अभिव्यक्त होती हैं? आप अपनी जन्मभूमिके बारे में क्या सोचते हैं?

Answer: बहुत सुंदर है मेरी जन्मभूमि-‘रेम्पचैपल ।’ उनके इस कथ्य में अपनी जन्मभूमि के प्रति अगाध श्रद्धा झलकती है जिसके कारण भारत में लंबे समय तक रहते हुए भी वे अपनी जन्मभूमि को भुला नहीं पाए जबकि उनके जीवन का अधिकांश समय भास्त में बीता अपने देश में कम। अतः उनके मन में वही भाव थे जो अपने देश अपनी जन्मभूमि से प्रेम करने वाले में होते हैं और होने चाहिए।

मेरे लिए मेरी जन्मभूमि मातृभूमि है। यहीं की संस्कृति में खेल-कूदकर बड़ा हुआ हूँ। उसके प्रति मेरी श्रद्धा है, उससे मेरी स्मृतियाँ जुड़ी हैं जिन्हें चाहकर भी नहीं भुला सकता हूँ। उसके प्रति मेरी सकारात्मक भावनाएँ हैं। इससे मैं ऐसा कोई कार्य नहीं कर सकता हूँ जिससे जन्मभूमि को और मुझे अपमानित होना पड़े। भाषा-अध्ययन

Q10. मेरा देश भारत विषय पर 200 शब्दों का निबंध लिखिए।

Answer: मेरा देश भारत

भूमिका – मेरा देश भारत है तथा हमें अपने भारतीय होने पर गर्व है। भारत वर्ष को सोने की चिड़िया कहते हैं। यहाँ विभिन्नता में भी एकता है। इस देश में तरह-तहर की बोलियाँ तथा भाषाएँ बोली जाती हैं। एक देश होने के बावजूद भी यहाँ लगभग हर जाति तथा धर्म के लोग रहते हैं फिर भी इनमें भाईचारा है। यह भारत वर्ष की एकता का प्रतीक है।

ऐतिहासिकता- यहाँ अनेक महापुरूषों का जन्म हुआ है। यहाँ राम जैसे मर्यादा पुरुषोत्तम का जन्म हुआ है, जिन्होंने धर्म पूर्ण शासन कर न्याय को कायम रखा। तो वहीं कृष्ण जैसे महाप्रतापी राजा भी हुए। इसी देश में महात्मा गाँधी का भी जन्म हुआ जिन्होंने समाज को अहिंसा का पाठ पढ़ाया। इसका प्रभाव आज भी यहाँ के जन जीवन में देखने को मिलता है। आज भी यहाँ के लोग धर्म तथा नीति से बँधे हुए हैं। भारतवासी आतिथ्य सत्कार करना अपना धर्म समझते हैं।

भौगौलिक सीमाएँ- भारतवर्ष उत्तर में कश्मीर से लेकर दक्षिण में कन्याकुमारी, पूर्व में असम से लेकर पश्चिम में गुजरात तक फैला हुआ है। उत्तर में हिमालय पर्वत भारत माता के सिर पर मुकुट के समान सुशोभित है। यहाँ नदी को भी देवी की संज्ञा दी गई है। गंगा नदी की देवी के रुप में पूजा होती है।

महत्व – दुनिया के प्रगतिशील देशों में भारत प्रथम स्थान पर है। दुनिया के सात अजूबों में पहला अजूबा यहीं पर है – ताजमहल, जिसे शाहजहाँ ने अपनी बेग़म मुमताज़ की याद में बनवाया था।

भारतवर्ष में विभिन्नता में भी एकता है। हर क्षेत्र से यह एक महत्वपूर्ण देश है। भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा है। इसमें तीन रंग है – केसरिया, सफ़ेद, हरा तथा बीच में अशोक चक्र सुशोभित है। हमारा राष्ट्रीय गान जन-गन-मन है, जिसके लेखक रविन्द्र नाथ ठाकुर हैं।

Q11. आपका मित्र हडसन एंड्री ऑस्ट्रेलिया में रहता है। उसे इस बार की गर्मी की छुट्टियों के दौरान भारत के पर्वतीय प्रदेशों के भ्रमण हेतु निमंत्रित करते हुए पत्र लिखिए।

Answer:

कामेश नाग ,
535, रामनगर
लखनऊ
14-3-2015
प्रिय हडसन एंड्री
सप्रेम नमस्कार!
कैसे हो? आशा है, तुम सानंद होगे। तुम्हारी माताजी तथा पिताजी भी प्रसन्न होंगे। प्रिय एंड्री, इस बार मेरी गर्मियों की छुट्टियाँ एक मई से आरंभ होंगी। इन दिनों तुम्हारी भी छुट्टियाँ होती हैं। मैं चाहता हूँ कि इस बार तुम भारत आओ। मैं तुम्हें यहाँ के प्रसिद्ध पर्वतीय स्थान दिखाना चाहता हूँ। मैं तुम्हें यहाँ के प्रसिद्ध हिमालय पर्वत की सैर कराकर लाऊँगा। मुझे तुम्हारे साथ ऑस्ट्रेलिया में बिताए हुए दिन अभी तक याद हैं। मैं चाहता हूँ कि इस बार हम भारत-भ्रमण करें। तुम्हारे उत्तर की प्रतीक्षा में
तुम्हारा
पना कामेश

Q12. निम्नलिखित वाक्यों में समुच्यबोध छाँटकर अलग लिखिए –

(क) तब भी जब वह इलाहाबाद में थे और तब भी जब वह दिल्ली आते थे।

(ख) माँ ने बचपन में ही घोषित कर दिया था कि लड़का हाथ से गया।

Answer: और

(ग) वे रिश्ता बनाते थे तो तोड़ते नहीं थे।

Answer: कि

(घ) उनके मुख से सांत्वना के जादू भरे दो शब्द सुनना एक ऐसी रोशनी से भर देता था जो किसी गहरी तपस्या से जनमती है।

Answer: तो

(ङ) पिता और भाइयों के लिए बहुत लगाव मन में नहीं था लेकिन वो स्मृति में अकसर डूब जाते।

Answer: लेकिन

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