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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sanchayan with Answers
CBSE Solutions Class 9 Hindi मेरा छोटा-सा निजी पुस्तकालय
Page No. 34
बोध प्रश्न
Q1. लेखक का ऑपरेशन करने से सर्जन क्यों हिचक रहे थे?
Answer: लेखक का ऑपरेशन करने से सर्जन इसलिए हिचक रहे थे क्योंकि लेखक को तीन-तीन जबरदस्त हार्ट अटैक आये थे| बिजली के शॉक्स देने के कारण उनका हार्ट केवल चालीस प्रतिशत बचा था और उसमें भी तीन अवरोध थे| इसलिए यह चिंता का विषय था कि ऑपरेशन के बाद कहीं हार्ट रिवाइव ना हो पाए|
Q2. ‘किताबों वाले कमरे’ में रहने के पीछे लेखक के मन में क्या भावना थी?
Answer: किताबों वाले कमरे में रहने के पीछे लेखक के मन में पुस्तकों का वह संकलन था जो उसके बचपन से लेकर आज तक संकलित था। जब उन्हें अस्पताल से घर लाया गया तो उन्होंने ज़िद की थी कि वे अपने आपको उनके साथ जुड़ा हुआ अनुभव कर सकें। उनके प्राण इन हज़ारों किताबों में बसे हुए थे। जो पिछले चालीस-पचास बरस में धीरे-धीरे जमा होती गई थीं।
Q3. लेखक के घर कौन-कौन-सी पत्रिकाएँ आती थीं?
Answer: लेखक के घर वेदोदम, सरस्वती, गृहिणी, बालसखा और चमचम आदि पत्रिकाएँ आती थीं।
Q4. लेखक को किताबें पढ़ने और सहेजने का शौक कैसे लगा?
Answer: लेखक को किताबें पढ़ने और सहेजने का शौक बचपन से था। उस समय आर्य समाज का सुधारवादी आंदोलन अपने पूरे जोर पर था। उनके पिता आर्य समाज रानी मंडी के प्रधान थे और माँ ने स्त्री शिक्षा के लिए आदर्श कन्या पाठशाला की स्थापना की थी। उनके घर में कई पुस्तकें थीं। वह घर में सत्यार्थ-प्रकाश और दयानंद सरस्वतीं की जीवनी बड़ी रूचि से पढ़ते थे। उनकी रोमांचक घटनाएँ उन्हें बड़ा प्रभावित करती थीं। वह बाल-सखा और चमचम की कथाएँ पढ़ते थे। उसी से उन्हें किताबें पढ़ने का शौक लगा। पाँचवी कथा में प्रथम आने पर अंग्रेजी की दो किताबें इनाम में मिली थीं। इन दो किताबों ने उनके लिए नई दुनिया का द्वार खोल दिया था। पिताजी की प्रेरणा से उन्होंने अपनी किताबों को इकट्ठा करना शुरू कर दिया था। इनसे उनके निजी पुस्तकालय की शुरूआत हो गई।
Q5. माँ लेखक की स्कूली पढ़ाई को लेकर क्यों चिंतित रहती थी?
Answer: स्कूल की किताबों से ज्यादा लेखक को पत्रिकाएँ पढ़ने में ज्यादा रूचि थी| स्कूल की किताबें पढ़ने में उनका मन कम लगता था। यह देखकर माँ चिंतित रहने लगी थीं। माँ को यह लगने लगा था कि कहीं वह साधु बनकर घर से ना भगा जाए।
Q6. स्कूल से इनाम में मिली अंग्रेज़ी की दोनों पुस्तकों ने किस प्रकार लेखक के लिए नयी दुनिया के द्वार खोल दिए?
Answer: लेखक को अंग्रेज़ी में सबसे ज्यादा नंबर मिले तो उसे इनाम स्वरूप अंग्रेजी की दो किताबें मिलीं। इनमें से एक में पक्षियों की कहानियाँ थीं, जिससे लेखक को पक्षियों की जातियों, बोलियों व उनकी आदतों की जानकारी मिली। दूसरी किताब में पानी के जहाजों की कहानियाँ थीं, जिनसे जहाज़, नाविकों, द्वीपों व मछलियों की जानकारी मिली। इस प्रकार इन पुस्तकों ने लेखक के लिए एक नई दुनिया का द्वार खोल दिया।
Q7. आज से यह खाना तुम्हारी अपनी किताबों का। यह तुम्हारी लाइब्रेरी है’ − पिता के इस कथन से लेखक को क्या प्रेरणा मिली?
Answer: पिताजी के इस कथन ने लेखक को पुस्तकें जमा करने की प्रेरणा दी तथा किताबों के प्रति उसका लगाव बढ़ाया। अभी तक लेखक मनोरंजन के लिए किताबें पढ़ता था परन्तु पिताजी के इस कथन ने उसके ज्ञान प्राप्ति के मार्ग को बढ़ावा दिया। आगे चलकर उसने अनगिनत पुस्तकें जमा करके अपना स्वयं का पुस्तकालय बना डाला। अब उसके पास ज्ञान का अतुलनीय भंडार था।
Q8. लेखक द्वारा पहली पुस्तक खरीदने की घटना का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
Answer: लेखक आर्थिक तंगी के कारण पुरानी किताबें बेचकर नई किताबें लेकर पड़ता था। इंटरमीडिएट पास करने पर जब उसने पुरानी किताबें बेचकर बी.ए. की सैकंड-हैंड बुकशॉप से किताबें खरीदीं, तो उसके पास दो रुपये बच गए। उन दिनों देवदास फिल्म लगी हुई थी। उसे देखने का लेखक का बहुत मन था। माँ को फिल्में देखना पसंद नहीं था। अतः लेखक वह फिल्म देखने नहीं गया। लेखक इस फिल्म के गाने को अकसर गुनगुनाता रहता था। एक दिन माँ ने लेखक को वह गाना गुनगुनाते सुना।
पुत्र की पीड़ा ने उन्हें व्याकुल कर दिया। माँ बेटे की इच्छा भाँप गई और उन्होंने लेखक को ‘देवदास’ फिल्म देखने की अनुमति दे दी। माँ की अनुमति मिलने पर लेखक फिल्म देखने चल पड़ा। अचानक किताबों की दुकान पर उसे देवदास पुस्तक रखी हुई दिखाई दी। उसने फिल्म देखने के स्थान पर पुस्तक खरीदने का निर्णय लिया। 10 आने में पुस्तक खरीदकर उसने बाकी पैसे माँ को दे दिए। इस प्रकार लेखक ने अपनी पहली पुस्तक खरीदी।
Q9. इन कृतियों के बीच अपने को कितना भरा-भरा महसूस करता हूँ’ − का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer: लेखक अपनी बीमारी के समय अपने निजी पुस्तकालय में ही रह रहे थे। वहाँ उनके द्वारा सहेजी हज़ारों किताबें थीं। आज उनके पास हिंदी और अंग्रेजी की अलग-अलग विषयों पर ढेरों किताबें थीं। उन्हें देख कर लेखक को अपनी पुरानी यादें याद आती कि कितनी मेहनत से उन्होंने एक-एक किताब संजोयी थी। इन सब किताबों और इतने अलग-अलग विषयों और लेखकों के बीच वह खुद को अकेला न पाते, अपितु भरा-भरा महसूस करते।
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