We have Provided the NCERT/CBSE Solutions chapter-wise for Class 10 Hindi Chapter 6 मधुर-मधुर मेरे दीपक जल with Answers, Solveed by expert subject teacher for latest syllabus and examination. Students can take a free NCERT Solutions of मधुर-मधुर मेरे दीपक जल. Each question has right answer Solved by Expert Teacher.
NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sparsh with Answers
CBSE Solutions Class 10 Hindi मधुर-मधुर मेरे दीपक जल
PAge No. 34
प्रश्न अभ्यास
(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
Q1. प्रस्तुत कविता में ‘दीपक’ और ‘प्रियतम’ किसके प्रतीक हैं?
Answer: कवि ने चित्रात्मक शैली का प्रयोग करते हुए पावस ऋतु का सजीव चित्र अंकित किया है। ऐसे स्थलों को छाँटकर लिखिए।
Q2. दीपक से किस बात का आग्रह किया जा रहा है और क्यों?
Answer: कवयित्री ‘महादेवी वर्मा जी’ द्वारा दीपक से निरंतर जलते रहने का आग्रह किया जा रहा है क्योंकि कवयित्री के लिए प्रभु ही सर्वस्व है इसलिए वह अपने हृदय/मन में प्रभु के प्रति आस्था और भक्ति का भाव हमेशा जगाए रखना चाहती हैं| वे चाहती हैं कि उनकी आस्था एवं विश्वास का दीपक उनके प्रियतम परमात्मा के प्रति हमेशा जलता ही रहे|
Q3. विश्व-शलभ दीपक के साथ क्यों जल जाना चाहता है?
Answer: जिस प्रकार पतंगा दीपक पर मोहित होकर अपने आप को रोक नहीं पाता और राख हो जाता है, उसी प्रकार संपूर्ण विश्व अर्थात् मनुष्य मात्र अपने जीवन को विषय-विकारों, लोभ, मोह तथा धन संग्रह के आकर्षण और आसक्ति में हँसकर जल जाना चाहता है।
Q4. आपकी दृष्टि में मधुर मधुर मेरे दीपक जल कविता का सौंदर्य इनमें से किस पर निर्भर है
(क) शब्दों की आवृति पर।
(ख) सफल बिंब अंकन पर।
Answer: इस कविता की सुंदरता दोनों पर निर्भर है। पुनरुक्ति रुप में शब्द का प्रयोग है − मधुर-मधुर, युग-युग, सिहर-सिहर, विहँस-विहँस आदि कविता को लयबद्ध बनाते हुए प्रभावी बनाने में सक्षम हैं। दूसरी ओर बिंब योजना भी सफल है। ‘विश्व-शलभ सिर धुन कहता’, ‘मृदुल मोम सा घुल रे मृदु तन’ जैसे बिंब हैं।
Q5. कवयित्री किसका पथ आलोकित करना चाह रही हैं?
Answer: कवयित्री अपने प्रियतम अर्थात् प्रभु का पथ अलोकित करना चाहती है। उसका प्रभु अदृश्य, निराकार और रूपहीन है। वह अपनी आध्यात्मिकता एवं आस्था के दीपक के माध्यम से अपने प्रियतम का मार्ग आलोकित करना चाहती है ताकि उस तक आसानी से पहुँच सके।
Q6. कवयित्री को आकाश के तारे स्नेहहीन से क्यों प्रतीत हो रहे हैं?
Answer: कवयित्री को आकाश के तारे स्नेहहीन से प्रतीत हो रहे हैं क्योंकि इनका तेज सिर्फ खुद के लिए है, दूसरों को ये रोशन नहीं कर सकते हैं| यहाँ तारों की तुलना मुनष्यों से की गयी है जिनके बीच स्नेह यानी भाईचारा समाप्त हो चुका है और सभी स्वार्थी हो चुके हैं| उनका आपस में कोई स्नेह नहीं है।
Q7. पतंगा अपने क्षोभ को किस प्रकार व्यक्त कर रहा है?
Answer: पतंगा अपना सिर धुनकर अपने क्षोभ को व्यक्त कर रहा है। जिस प्रकार पतंगा दीये की लौ में अपना सब कुछ समाप्त करना चाहता है पर कर नहीं पाता, उसी तरह मनुष्य भी परमात्मा रूपी लौ में जलकर अपना अस्तित्व विलीन करना चाहता है परन्तु अपने अहंकार को नहीं छोड़ पाता। इसलिए पछतावा करता है।
Q8. कवयित्री ने दीपक को हर बार अलग-अलग तरह से ‘मधुर-मधुर, पुलक-पुलक, सिहर-सिहर और विहँस-विहँस’ जलने को क्यों कहा है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: कवयित्री ने अपने आस्था रूपी दीपक को हर बार अलग-अलग तरीके से जलने के लिए कहा है। कभी मधुर-मधुर, कभी पुलक-पुलक, कभी सिहर-सिहर और कभी विहँस-विहँस| कवयित्री चाहती है कि चाहे कैसी भी स्थिति क्यों न हो आस्था रूपी आध्यात्मिक दीपक सदैव जलता रहे और वह परमात्मा का मार्ग आलोकित करे।
Q9. नीचे दी गई काव्य-पंक्तियों को पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए −
जलते नभ में देख असंख्यक,
स्नेहहीन नित कितने दीपक;
जलमय सागर का उर जलता,
विद्युत ले घिरता है बादल!
विहँस विहँस मेरे दीपक जल!
(क) स्नेहहीन दीपक से क्या तात्पर्य है?
Answer: स्नेहहीन दीपक नभ के तारों को कहा है, जिसका तात्पर्य है कि आकाश में अनगिनत चमकने वाले तारे स्नेहहीन से प्रतीत होते हैं, क्योंकि ये सभी प्रकृतिवश, यंत्रवत् होकर अपना कर्तव्य निभाते हैं। इनमें कोई प्रेम नहीं है तथा परोपकार का कोई भाव नहीं है अर्थात् ये ईश्वर के प्रेम से हीन हैं। इनमें ईश्वर के लिए तड़प नहीं है।
(ख) सागर को जलमय कहने का क्या अभिप्राय है और उसका हृदय क्यों जलता है?
Answer: कवयित्री ने सागर को संसार कहा है और जलमय का अर्थ है सांसारिकता में लिप्त। अत: सागर को जलमय कहने से तात्पर्य है सांसारिकता से भरपूर संसार। सागर में अथाह पानी है परन्तु किसी के उपयोग में नहीं आता। इसी तरह बिना ईश्वर भक्ति के व्यक्ति बेकार है। बादल में परोपकार की भावना होती है। वे वर्षा करके संसार को हराभरा बनाते हैं तथा बिजली की चमक से संसार को आलोकित करते हैं, जिसे देखकर सागर का हृदय जलता है।
(ग) बादलों की क्या विशेषता बताई गई है?
Answer: बादलों की यह विशेषता बताई गई है कि वे-बिजली लेकर आकाश में घिर आते हैं। बादल जब घिरते हैं और गरजते हैं तो बिजली की यह चमक दिखाई दे जाती है।
(घ) कवयित्री दीपक को विहँस विहँस जलने के लिए क्यों कह रही हैं?
Answer: कवयित्री दीपक को पूरे उत्साह और प्रसन्नता के साथ जलने के लिए कहती हैं ताकि ये पूरे संसार को परमात्मा का पथ दिखा सके|
Q10. क्या मीराबाई और आधुनिक मीरा महादेवी वर्मा इन दोनों ने अपने-अपने आराध्य देव से मिलने के लिए जो युक्तियाँ अपनाई हैं,उनमें आपको कुछ समानता या अतंर प्रतीत होता है? अपने विचार प्रकट कीजिए?
Answer: Do Yourself
(ख) निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए –
Q1. दे प्रकाश का सिंधु अपरिमित,
तेरे जीवन का अणु गल गल!
Answer: इन पंक्तियों में कवयित्री का मानना यह है कि मेरे भक्ति व विश्वास के दीपक तू जल- जल कर अपने जीवन के एक-एक कण को राख बना दें और उस प्रकाश को समुद्र की भांति विस्तृत क्षेत्र में फैला दें ताकि अन्य प्राणी भी उसका फायदा ले सकें।
Q2. युग-युग प्रतिदिन प्रतिक्षण प्रतिपल,
प्रियतम का पथ आलोकित कर!
Answer: कवयित्री हृदये के आस्थारूपी दीपक को प्रतिदिन, प्रतिक्षण, प्रतिपल जलने को कहती है, अर्थात् जिस प्रकार दीपक प्रत्येक क्षण, प्रत्येक पल जलता हुआ जीवन का पथ आलोकित करता हुआ चलता है, उसी प्रकार आराध्य देव को पथ-आलोकित करता हुआ तथा अपने अंतर में व्याप्त अंधकार को नष्ट करता हुआ चल। कवयित्री का प्रियतम संसारी मानव न होकर अज्ञान व रहस्यमयी है।
Q3. मृदुल मोम सा घुल रे मृदु तन!
Answer: इस पंक्ति में कवयित्री का मानना है कि इस कोमल तन को मोम की भाँति घुलना होगा तभी तो प्रियतम तक पहुँचना संभव हो पाएगा। अर्थात ईश्वर की प्राप्ति के लिए कठिन साधना की आवश्यकता है।
भाषा अध्ययन
Q1. कविता में जब एक शब्द बार-बार आता है और वह योजक चिन्ह द्वारा जुड़ा होता है, तो वहाँ पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार होता है; जैसे-पुलक-पुलक इसी प्रकार के कुछ और शब्द खोजिए, जिनमें यह अलंकार हो।
Answer: मधुर-मधुर, युग-युग, गल-गल, पुलक-पुलके, सिहर-सिहर, विहँस-विहँस । उपरिलिखित सभी शब्दों में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
योग्यता विस्तार
Q1. इस कविता में जो भाव आए हैं, उन्हीं भावों पर आधारित कवयित्री द्वारा रचित कुछ अन्य कविताओं को अध्ययन करें; जैसे-
(क) मैं नीर भरी दुख की बदली
Answer: मैं नीर भरी दुख की बदली’ कविता पुस्तकालय से प्राप्त कर छात्र स्वयं पढ़ें।
(ख) जो तुम आ आते एकबार ये सभी कतिवाएँ ‘सन्धिनी’ में संकलित हैं।
Answer: Do Yourself
Q2. इस कविता को कंठस्थ करें तथा कक्षा में संगीतमय प्रस्तुति करें।
Answer: छात्र कविताओं को कंठस्थ कर उनका गायन स्वयं करें।
Q3. महादेवी वर्मा को आधुनिक मीरा कहा जाता है। इस विषय पर जानकारी प्राप्त कीजिए।
Answer: भक्तिकालीन कवयित्री मीरा के पदों एवं गीतों में अपने आराध्य श्रीकृष्ण से न मिल पाने की जो पीड़ा है और उनसे मिलने के तरह-तरह के प्रयास किए गए हैं, उनके रूप-सौंदर्य पर मोहित होकर उनकी अनन्य भक्ति करते हुए उनकी चाकरी करने, नौकरानी बनने और दासी बनने तक के विभिन्न उपाय किए गए हैं। उसी प्रकार महादेवी वर्मा भी अपने आराध्य प्रभु से मिलने के लिए उनकी भक्ति करती हैं और आस्था का दीप जलाए रखना चाहती हैं। महादेवी के गीतों में भी अपने प्रियतम से न मिल पाने की पीड़ा स्पष्ट रूप से महसूस की जा सकती है। अतः महादेवी वर्मा को आधुनिक मीरा कहना पूर्णतया उपयुक्त है।
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