छाया मत छूना NCERT Solutions for Class 10 Hindi Chapter 7 with Answers free PDF Download

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NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitij-2 with Answers

CBSE Solutions Class 10 Hindi छाया मत छूना

Page No. 47

प्रश्न अभ्यास

Q1. कवि ने कठिन यथार्थ के पूजन की बात क्यों कही है?

Answer: कवि ने कठिन यथार्थ के पूजन की बात इसलिए कही है क्योंकि यही सत्य है। भूली-बिसरी यादें या भविष्य के सपने मनुष्य को दुखी ही करते हैं, किसी मंजिल तक नहीं ले जाते। मनुष्य को आखिर में वास्तविक सच का सामना करना ही पड़ता है इसलिए उसे पूजन यानी ग्रहण करना चाहिए|

Q2. भाव स्पष्ट कीजिए –
प्रभुता का शरण-बिंब केवल मृगतृष्णा है,
हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है।

Answer: प्रसंग – प्रस्तुत पंक्ति प्रसिद्ध कवि गिरिजाकुमार माथुर द्वारा रचित ‘छाया मत छूना’ नामक कविता से ली गई है।

भाव- भाव यह है कि मनुष्य सदैव प्रभुता व बड़प्पन के कारण अनेकों प्रकार के भ्रम में उलझ जाता है, उसका मन विचलित हो जाता है। जिससे हज़ारों शंकाओ का जन्म होता है। इसलिए उसे इन प्रभुता के फेरे में न पड़कर स्वयं के लिए उचित मार्ग का चयन करना चाहिए। हर प्रकाशमयी (चाँदनी) रात के अंदर काली घनेरी रात छुपी होती है। अर्थात् सुख के बाद दुख का आना तय है। इस सत्य को जानकर स्वयं को तैयार रखना चाहिए। दोनों भावों को समान रुप से जीकर ही हम मार्गदर्शन कर सकते हैं न कि प्रभुता की मृगतृष्णा में फँसकर।

Q3. ‘छाया’ शब्द यहाँ किस संदर्भ में प्रयुक्त हुआ है? कवि ने उसे छूने के लिए मना क्यों किया है?

Answer: छाया’ शब्द का प्रयोग कवि ने बीते समय की सुखंद यादों के लिए किया है। ये यादें हमारे मन में उमड़ती-घुमड़ती रहती हैं। कवि इन्हें छूने से इसलिए मना करता है क्योंकि इन यादों से हमारा दुख कम नहीं होता है, इसके विपरीत और भी बढ़ जाता है। हम उन्हीं सुखद यादों की कल्पना में अपना वर्तमान खराब कर लेते हैं।

Q4. कविता में विशेषण के प्रयोग से शब्दों के अर्थ में विशेष प्रभाव पड़ता है, जैसे कठिन यथार्थ। कविता में आए ऐसे अन्य उदाहरण छाँटकर लिखिए और यह भी लिखिए कि इससे शब्दों के अर्थ में क्या विशिष्टता पैदा हुई?

Answer: इस कविता में प्रयुक्त अन्य विशेषण हैं
सुरंग सुधियाँ सुहावनी–यहाँ ‘सुधियाँ’ विशेष्य के लिए दो विशेषण प्रयुक्त हुए हैं-‘सुरंग’ और ‘सुहावनी’। इनके प्रयोग से बीती हुई यादों के दृश्य बड़े मीठे, मनमोहक और रंगीन बन पड़े हैं। यह पदबंध शादी या मिलन जैसे अवसर का रंगीन दृश्य प्रस्तुत करता जान पड़ता है।
जीवित क्षण–यहाँ ‘ क्षण’ के लिए ‘जीवित’ विशेषण प्रयुक्त हुआ है। इसके प्रयोग से पिछली यादों का भूला हुआ क्षण सामने इस तरह साकार हो उठा है मानो वह क्षण पुराना न होकर वर्तमान में चल रहा हो।
केवल मृगतृष्णा-‘मृगतृष्णा’ के साथ ‘केवल’ विशेषण लगने से भ्रम और छलावा और अधिक सधन, गहरा और निश्चित हो गया है। इससे यह बोध जाग उठा है कि बड़प्पन का अहसास छलावे के सिवा कुछ है ही नहीं।
दुविधा-हत साहस-‘साहस’ के साथ ‘दुविधा-हत’ विशेषण साहस को स्पष्ट रूप से दबाए हुए प्रतीत होता है। यहाँ ‘मृत साहस’ का भाव मुखर हो उठा है।
शरद-रात–यहाँ ‘रात’ के साथ ‘शरद’ शब्द रात की रंगीनी और मोहकता को उजागर कर रहा है। रस-बसंत-‘बसंत’ के साथ ‘रस’ विशेषण बसंत को और अधिक रसीला, मनमोहक और मधुर बना रहा है।

Q5. ‘मृगतृष्णा’ किसे कहते हैं, कविता में इसका प्रयोग किस अर्थ में हुआ है?

Answer: गर्मी की चिलचिलाती धूप में रेगिस्तान में दूर सूर्य की किरणों द्वारा उत्पन्न चमक से पानी होने का अहसास परन्तु वहाँ पर कुछ नहीं होता| इस भ्रम की स्थिति को ‘मृगतृष्णा’ कहा जाता है। इसका प्रयोग कविता में बड़प्पन के एहसास के अर्थ में हुआ है।

Q6. ‘बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि ले’ यह भाव कविता की किस पंक्ति में झलकता है?

Answer: कवि ने ‘बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि ले’ के लिए अपनी कविता में जिस पंक्ति का प्रयोग किया हे, वह है-
जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्य वरण ।

Q7. कविता में व्यक्त दुख के कारणों को स्पष्ट कीजिए।

Answer: कविता में व्यक्त दुख के कारण निम्नलिखित हैं

(i) जीवन की सच्चाई से मुख मोड़ सुख वैभव के पीछे भागते हैं।
(ii) अतीत के सुख को याद कर वर्तमान के दुख को अधिक कर लेते हैं।
(iii) बीती स्मृतियों से उत्पन्न दुख जीवन को विषादग्रस्त कर देता है।
(iv) मनुष्य के पास जो है और जो नहीं है, उसका तुलनात्मक अध्ययन करना।
(v) शारीरिक सुख के लिए अनेक सुख सुविधाएँ प्राप्त होने पर भी यदि मन में दुख है, तो दुखों का कोई अंत नहीं।
(vi) साहस होते हुए भी दुविधाग्रस्त रहते हैं, जिससे स्वयं पर विश्वास न कर पाने से वह दुखी होता है।
(vii) मनुष्य यश, वैभव, धन और प्रभुता की मृगतृष्णा में भटकता है इनके पीछे जितना दौड़ता है, उतना ही उलझकर दुखी होता है।

Q8. जीवन में हैं सुरंग सुधियाँ सुहावनी’ से कवि का अभिप्राय जीवन की मधुर स्मृतियों से है। आपने अपने जीवन की कौन-कौन सी स्मृतियाँ संजो रखी हैं?

Answer: जीवन में घटित कुछ घटनाएँ ऐसी होती हैं जो बरबस स्मृति-पुटल में कौंधती रहती हैं। दिवस तो बीत जाते हैं, किंतु घटनाएँ अपने अस्तित्व को बनाए रखती हैं। फूल के मुझ जाने पर उसकी सुगंधि पर्यावरण में महकती रहती है। ऐसी घटनाएँ भी होती हैं जो पीछा नहीं छोड़ती हैं और कुछ ऐसी सुखद घटनाएँ होती हैं जिनका चित्रण बार-बार करते हैं और उनके चित्रण में आनंदानुभूति होती है।

Q9. ‘क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर?’ कवि का मानना है कि समय बीत जाने पर भी उपलब्धि मनुष्य को आनंद देती है। क्या आप ऐसा मानते हैं? तर्क सहित लिखिए ?

Answer: कवि भले ही ऐसा मानता हो कि समय बीत जाने पर उपलब्धि मनुष्य को आनंद देती है परंतु समय पर मिलने वाली उपलब्धि का आनंद कुछ और ही होता है। यदि परिश्रम के तुरंत बाद सफलता और दिनभर के परिश्रम के बाद मजदूरी नहीं मिलती है तो मन में निराशा जन्मती है। इसके विपरीत समय पर मिलने वाली सफलता से मन उत्साहित होता है। इससे भविष्य के प्रति आशावादी दृष्टिकोण विकसित होता है।

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