धर्म की आड़ NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 7 with Answers

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh with Answers

CBSE Solutions Class 9 Hindi धर्म की आड़

Page No. 66

प्रश्न अभ्यास

मौखिक

निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए –

Q1. आज धर्म के नाम पर क्या-क्या हो रहा है?

Answer: आज धर्म के नाम पर उत्पात, ज़िद, दंगे-फ़साद हो रहे है।

Q2. धर्म के व्यापार को रोकने के लिए क्या उद्योग होना चाहिए?

Answer: धर्म के व्यापार को रोकने के लिए साहस और दृढ़ता के साथ उसका विरोध होना चाहिए।

Q3. लेखक के अनुसार स्वाधीनता आंदोलन का कौन सा दिन बुरा था?

Answer: आज़ादी के आंदोलन के दौरान सबसे बुरा दिन वह था जब स्वाधीनता के लिए खिलाफ़त, मुँल्ला-मौलवियों और धर्माचार्यों को आवश्यकता से अधिक महत्त्व दिया गया।

Q4. साधारण से साधारण आदमी तक के दिल में क्या बात अच्छी तरह घर कर बैठी है?

Answer: साधारण से साधारण आदमी तक के दिल में यह बात अच्छी तरह से घर करके बैठ गई है कि धर्म के सम्मान की रक्षा के लिए प्राण दे देना उचित है। साधारण आदमी धर्म के तत्वों को नहीं समझते पर धर्म के नाम पर भड़क जाते हैं।

Q5. धर्म के स्पष्ट चिह्न क्या हैं?

Answer: शुद्ध आचरण और सदाचार धर्म के स्पष्ट चिह्न हैं।

लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (25-30 शब्दों में) उत्तर दीजिए –

Q1. चलते-पुरज़े लोग धर्म के नाम पर क्या करते हैं?

Answer: चलते-पुरजे लोग धर्म के नाम पर मूर्ख लोगों की शक्तियों और उत्साह का दुरुपयोग करते हैं। उन्हीं मूर्खा के आधार पर वे अपना बड़प्पन और नेतृत्व कायम रखना चाहते हैं। ये लोग दूसरों को अपनी चतुराई से दबाते हैं और अपनी मनमानी करते हैं। मनचाही कामनाओं को पूरा करवाते हैं। स्वयं कुछ करें या न करें परंतु दूसरों की शक्ति उनकी कामनाओं को पूरा करने में सहायक होती है। उनकी जीवनचर्या इसी चतुराई के आधार पर चलती है।

Q2. चालाक लोग साधारण आदमी की किस अवस्था का लाभ उठाते हैं?

Answer: चालाक लोग साधारण आदमी की धर्म भीरूता, अज्ञानता का लाभ उठाते हैं। साधारण आदमी उनके बहकावे में आ जाते हैं। चालाक आदमी उसे जिधर चाहे उसे मोड़ देता है और अपना काम निकाल लेता है। साथ ही उस पर अपना प्रभुत्व भी जमा लेता है।

Q3. आनेवाल समय किस प्रकार के धर्म को नही टिकने देगा?

Answer: आने वाला समय दिखावे वाले धर्म को नहीं टिकने देगा। नमाज पढ़ना, शंख बजाना, नाक दबाना यह धर्म नहीं है, शुद्ध आचरण और सदाचार धर्म के लक्षण हैं। पूजा के ढ़ोंग का धर्म आगे नहीं टिक पाएगा। ऐसी पूजा तो ईश्वर को रिश्वत की तरह होती है।

Q4. कौन सा कार्य देश की स्वाधीनता के विरूद्ध समझा जायेगा?

Answer: आपका जो मंन चाहे वो माने और दूसरे का जो मन चाहे वो माने। यदि किसी धर्म के मानने वाले कहीं दुसरो के धर्म में जबरदस्ती टांग अड़ाते हैं तो यह कार्य देश की स्वाधीनता के विरूद्ध समझा जायेगा।

Q5. पाश्चात्य देशो में धनी और निर्धन लोगों में क्या अंतर है?

Answer: पाश्चात्य देशों में धनी लोगों के पास पैसा है, ऊँची-ऊँची इमारतें हैं, सुख-सुविधा है। गरीब लोग रोटी के लिए संघर्ष करते हैं और झोंपड़ियों में रहते हैं।

Q6. कौन-से लोग धार्मिक लोगों से ज्यादा अच्छे हैं?

Answer: नास्तिक लोग, जो किसी धर्म को नहीं मानते, वे धार्मिक लोगों से अच्छे हैं। उनका आचरण अच्छा है। वे सदा सुख-दुख में एक दूसरे का साथ देते हैं। दूसरी ओर धार्मिक लोग एक दूसरे को धर्म के नाम पर लड़वाते हैं।

(ख) निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (50-60 शब्दों में) उत्तर दीजिए –

Q1. धर्म और ईमान के नाम पर किए जाने वाले भीषण व्यापार को कैसे रोका जा सकता है?

Answer: धर्म और ईमान के नाम पर किए जाने वाले भीषण व्यापार को रोकने के लिए हमें साहस और दृढ़ता से काम लेना होगा। हमें उन धूर्त लोगों का पर्दाफ़ाश करना होगा जो धर्म और ईमान के नाम पर दंगे फसाद करवाते हैं। लोगों को आपस में लड़वाते हैं। स्वार्थ पूर्ति के लिए आम आदमी के प्राण ले लिए जाते हैं। हमें धर्म के वास्तविक रूप को समझना होगा। धर्म के नाम पर हो रहे ढोंग व आडम्बरों से स्वयं को बचाना होगा।

Q2. ‘बुद्धि पर मार’ के संबंध में लेखक के क्या विचार हैं?

Answer: बुद्धि पर मार’ का आशय है की बुद्धि पर पर्दा डालकर पहले आत्मा और ईश्वर का स्थान अपने लिए लेना और फ़िर धर्म, ईमान ईश्वर और आत्मा के नाम पर अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए लोगों को लड़ना भिड़ाना। यह साधारण लोगो नही समझ पाते हैं और धर्म के नाम पर जान लेने और देने को भी वाजिब मानते हैं।

Q3. लेखक की दृष्टि में धर्म की भावना कैसी होनी चाहिए?

Answer: लेखक की दृष्टि में धर्म की भावना पवित्र आचरण से परिपूर्ण होनी चाहिए। शुद्ध आचरण और मनुष्यता के गुणों वाली होनी चाहिए। पशुत्व को समाप्त कर मनुष्यता फैलाने वाली होनी चाहिए। धर्म की भावना ईश्वर और आत्मा में पवित्र संबंध स्थापित करनेवाली होनी चाहिए। कल्याण की भावना होनी चाहिए न कि दूसरों को भड़काने वाली।

Q4. महात्मा गांधी के धर्म सम्बन्धी विचारो पर प्रकाश डालिये।

Answer: महात्मा गाँधी अपने जीवन में धर्म को महत्वपूर्ण स्थान देते थे। वे सर्वत्र धर्म का पालन करते थे। धर्म के बिना एक पग भी चलने को तैयार नहीं होते थे। उनके धर्म के स्वरूप को समझना आवश्यक है। धर्म से महात्मा गांधी का मतलब, धर्म ऊँचे और उदार तत्वों का ही हुआ करता है। वे धर्म की कट्टरता के विरोधी थे। प्रत्येक व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि वह धर्म के स्वरूप को भलि-भाँति समझ ले।

Q5. सबके कल्याण हेतु अपने आचरण को सुधारना क्यों आवश्यक है?

Answer: सबके कल्याण हेतु अपने आचरण को सुधारना इसलिए आवश्यक है क्योंकि जब हम खुद को ही नहीं सुधारेंगे, दूसरों के साथ अपना व्यवहार सही नहीं रख सकेंगे। दिन भर के नमाज़, रोजे और गायत्री किसी व्यक्ति को अन्य व्यक्ति की स्वाधीनता रौंदने और उत्पात फैलाने के लिए आजाद नही छोड़ सकेगा।

(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए।

Q1. उबल पड़ने वाले साधारण आदमी का इसमें केवल इतना ही दोष है कि वह कुछ भी नहीं समझता-बूझता और दूसरे लोग उसे जिधर जोत देते हैं, उधर जुत जाता है।

Answer: कुछ चालू-पुरज़े लोग तथा धर्म के तथाकथिक ठेकेदार साधारण लोगों के दिमाग में यह बात अच्छी तरह बिठा देते हैं कि धर्म और ईमान ही तुम्हारे लिए सब कुछ हैं। इसी से तुम्हारा कल्याण होने वाला है। इसकी रक्षा करते हुए तुम्हें अपनी ज्ञान की परवाह नहीं करनी चाहिए। ये अनपढ़ साधारण भोले लोग धर्म क्या है, यह जाने-समझे बिना तनिक-सा उकसाए जाते ही मरने-कटने के लिए तैयार हो जाते हैं। वे दूसरों के बहकावे में जल्दी आ जाते हैं। इससे उनकी शक्ति और साहस का दुरुपयोग स्वार्थी लोग अपने हित के लिए करते हैं।

Q2. यहाँ है बुद्धि पर परदा डालकर पहले ईश्वर और आत्मा का स्थान अपने लिए लेना, और फिर धर्म, ईमान, ईश्वर और आत्मा के नाम पर अपनी स्वार्थ-सिद्धि के लिए लोगों को लड़ाना-भिड़ाना।

Answer: यहाँ अर्थात् भारत में कुछ लोग अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए लोगों का बौधिक-शोषण करते हैं। वे धर्म के नाम पर तरह तरह की विरोधाभासी बातें साधारण लोगों के दिमाग में भर देते हैं और धर्म के नाम पर उन्हें गुमराह कर उनका मसीहा स्वयं बन जाते हैं। इन धर्माध लोगों को धर्म के नाम पर आसानी से लड़ाया-भिड़ाया जा सकता है। कुछ चालाक लोग इनकी धार्मिक भावनाएँ भड़काकर अपनी स्वार्थपूर्ति करते हैं।

Q3. अब तो, आपका पूजा-पाठ न देखा जाएगा, आपकी भलमनसाहत की कसौटी केवल आपका आचरण होगी।

Answer: आशय-इस सूक्ति का अर्थ है-धर्म ईश्वर की प्राप्ति का सीधा मार्ग है। यह आत्मा व परमात्मा के मिलन की कड़ी है। पूजा पाठ को ढोंग, आडम्बर और धूर्तता समझा जाता है। भले ही पाँचों वक्त नमाज पढ़ी जाए। दूसरों को गलत मार्ग का अनुसरण करने के लिए प्रेरित कर स्वार्थ सिद्ध किया जाए अपना आचरण न सुधारा जाए तो रोजा, नमाज, पूजा सब व्यर्थ हो जाएगा। यदि हमारा आचरण शुद्ध है तो धर्म का वास्तविक मूल्य सिद्ध होता है। मनुष्य की कसौटी उसकी मनुष्यता है न कि धर्म। धर्म तो शुद्ध आचरण और सदाचार का एक मार्ग है जिस पर चलकर ईश्वर की साधना की जा सकती है।

Q4. तुम्हारे मानने ही से मेरा ईश्वरत्व कायम नहीं रहेगा, दया करके, मनुष्यत्व को मानो, पशु बनना छोड़ो और आदमी बनो !

Answer: ईश्वर द्वारा कथित इस वाक्य से लेखक कहना चाहा रहा है की जिस तरह से धर्म के नाम पर अत्याचार हो रहे हैं उसे देखकर ईश्वर को यह बतलाना पड़ेगा की पूजा-पाठ छोड़कर अच्छे कर्मा की ओर ध्यान दो। तुम्हारे मानने या ना मानने से मेरा ईश्वरत्व कायम नहीं रहेगा। इंसान बनो और दूसरों की सेवा करो।

भाषा-अध्ययन

Q1. उदाहरण के अनुसार शब्दों के विपरीतार्थक लिखिए

सुगम  –   दुर्गम

धर्म – …………………..
ईमान – …………………..
साधारण – …………………..
स्वार्थ – …………………..
दुरुपयोग – …………………..
नियंत्रित – …………………..
स्वाधीनता – …………………..

Answer:

  1. सुगम –दुर्गम
  2. धर्म –अधर्म
  3. ईमान –बेईमान
  4. साधारण –असाधारण
  5. स्वार्थ –निस्वार्थ
  6. दुरूपयोग –सदुपयोग
  7. नियंत्रित –अनियंत्रित
  8. स्वाधीनता –पराधीनता

Q2. निम्नलिखित उपसर्गों का प्रयोग करके दो-दो शब्द बनाइए − ला, बिला, बे, बद, ना, खुश, हर, गैर

Answer:

  • ला – लाइलाज, लापरवाह
  • बिला – बिला वजह
  • बे – बेजान, बेकार
  • बद – बददिमाग, बदमिज़ाज़
  • ना – नाकाम, नाहक
  • खुश – खुशनसीब, खुशगवार
  • हर – हरएक, हरदम
  • गैर – गैरज़िम्मेदार, गैर कानूनी

Q3. उदाहरण के अनुसार ‘त्व’ प्रत्यय लगाकर पाँच शब्द बनाइए − उदाहरण : देव + त्व =देवत्व

Answer:

  • लघु + त्व = लघुत्व
  • प्रभु + त्व = प्रभुत्व
  • महत् + त्व = महत्त्व
  • नारी + त्व = नारीत्व
  • मनुष्य + त्व = मनुष्यत्व।

Q4. निम्नलिखित उदाहरण को पढ़कर पाठ में आए संयुक्त शब्दों को छाँटकर लिखिए −
उदाहरण − चलते-पुरज़े

Answer:

  • समझता – बूझना छोटे – बड़े
  • पूजा – पाठ कटे – फटे
  • ठीक – ठाक खट्टे – मीठे
  • गिने – चुने लाल – पीले
  • जले – भुने ईमान – धर्म
  • स्वार्थ – सिद्धी नित्य – प्रति

Q5. ‘भी’ का प्रयोग करते हुए पाँच वाक्य बनाइए −
उदाहरण − आज मुझे बाजार होते हुए अस्पताल भी जाना है।

Answer:

  1. मुझे भी पुस्तक पढ़नी है।
  2. राम को खाना भी खाना है।
  3. सीता को भी नाचना है।
  4. तुम्हें भी आना है।
  5. इन लोगों को भी खाना खिलाइए।

योग्यता-विस्तार

Q1. ‘धर्म एकता का माध्यम है-इस विषय पर कक्षा में परिचर्चा कीजिए।

Answer:

  • क छात्र – धर्म से एकता बढ़ती है। धार्मिक आयोजनों में लोग ऊँच-नीच भूलकर मित्र भाव से भाग लेते हैं।
  • दूसरा छात्र – परंतु कुछ लोग धर्म के नाम पर ही स्वयं को अलग मानते हैं। कोई खुद को सिख कहता है, कोई बौद्ध कहता है, कोई हिंदू तो कोई मुसलमान।।
  • तीसरा छात्र – परंतु वे सब हैं तो आदमी ही। चौथा छात्र-परंतु धर्म का नाम लेते ही वे स्वयं को इनसान नहीं हिंदू, ईसाई या मुसलमान कहने लगते हैं।

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