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NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kritika with Answers
CBSE Solutions Class 10 Hindi माता का आँचल
Page No 8
प्रश्न अभ्यास
Q1. प्रस्तुत पाठ के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बच्चे का अपने पिता से अधिक जुड़ाव था, फिर भी विपदा के समय वह पिता के पास न जाकर माँ की शरण लेता है। आपकी समझ से इसकी क्या वजह हो सकती है?
Answer: माता से बच्चे का रिश्ता ममता पर आधारित होता है जबकि पिता से स्नेहाधारित होता है । बच्चे को विपदा के समय अत्याधिक ममता और स्नेह की आवश्यकता थी। भोलानाथ का अपने पिता से अपार स्नेह था पर जब उस पर विपदा आई तो उसे जो शांति व प्रेम की छाया अपनी माँ की गोद में जाकर मिली वह शायद उसे पिता से प्राप्त नहीं हो पाती। माँ के आँचल में बच्चा स्वयं को सुरक्षित महसूस करता है।
Q2. आपके विचार से भोलनाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता है?
Answer: (क) बाल स्वभाव के कारण-बच्चे स्वभाव से भोले होते हैं। वे जितनी जल्दी रूठते हैं, उतनी ही जल्दी बात को भूल भी जाते हैं। भोलानाथ की ख़बर मास्टर जी द्वारा लेने के कारण वह रो रहा था, किंतु मित्रों को देखते ही उसे कुछ देर पहले का दुखद समय याद नहीं रहा।
(ख) खेल में आनंद मिलने के कारण-खेल बच्चों को अत्यंत प्रिय हैं। पिता की गोद में सिसकते भोलानाथ को जब नाचती-गाती मित्र-मंडली मिली, तो वही सुर अलापने की इच्छा से भोलानाथ पिता की गोद से उतर गए। खेल में मिलने वाले आनंद की कल्पना ने ही भोलानाथ को सिसकना भुला दिया।
Q3. आपने देखा होगा कि भोलानाथ और उसके साथी जव-तब खेलते-खाते समय किसी न किसी प्रकार की दुकबंदी करते हैं। आपको यदि अपने खेलों आदि से जुड़ी तुकबंदी याद हो तो लिखिए।
Answer: (क) अक्कड़-बक्कड़ बंबे बो,
अस्सी नब्बे पूरे सौ।
सौ में लगा धागा,
चोर निकल के भागा॥
(ख) पोशंपा भाई पोशंपा!
डाकिए ने क्या किया?
सौ रुपये की घड़ी चुराई।
अब तो जेल में आना पड़ेगा।
जेल की रोटी खानी पड़ेगी,
जेल का पानी पीना पड़ेगा॥
(ग) गुल्ली डंडा रेत में।
दाना मछली पेट में।
ताकत लगती खेल में
हाथ मिलाओ मेल में ॥
Q4. भोलनाथ और उसके साथियों के खेल और खेलने की सामग्री आपके खेल और खेलने की सामग्री से किस प्रकार भिन्न है?
Answer: भोलानाथ और उसके साथियों के खेल और खेलने की सामग्री हमारे खेल और खेलने की सामग्री से पूरी तरह भिन्न है। भोलानाथ जिस ग्रामीण पृष्ठभूमि का और जिस काल का बालक है, उस समय गाँवों में बिजली नहीं पहुँची थी तथा आज जैसे खेल खिलौने उपलब्ध न थे। ऐसे में भोलानाथ और उसके साथी मिलकर घर के पास बने चबूतरे पर नाटक खेलते थे। कभी-कभी वे सब मिलकर मिठाइयों की दुकान लगाते, जिसमें मिट्टी के ढेले के लड्डू पत्तियों की पूरी-कचौरियाँ, गीली मिट्टी की जलेबियाँ, घड़े के टुकड़े के बताशे आदि बना लेते।
वे धूल से मेंड़, दीवार, तिनकों का छप्पर, दीये की कड़ाही, पानी से घी, धूल का आटा, बालू की चीनी बनाकर भोज्य पदार्थ तैयार करते थे। इसके अलावा बारात का जुलूस निकालना, चिड़ियों को उड़ाना उनका प्रिय खेल था। आज हमारे खेल तथा खेल-सामग्री में बदलाव आ गया है। हमारे खेल के सामान मशीन-निर्मित हैं। भोलानाथ और उसके साथियों के खेल और खेलने के सामान ग्रामीण पृष्ठभूमि से संबंधित हैं, हमारे खेलों में क्रिकेट, फुटबॉल, वालीबॉल, लूडो, शतरंज, वीडियो गेम, कंप्यूटर पर गेम आदि शहरी पृष्ठभूमि वाले खेल शामिल हैं।
Q5. पाठ में आए ऐसे प्रसंगों का वर्णन कीजिए जो आपके दिल को छू गए हों?
Answer: 1. भोलनाथ जब अपने पिता की गोद में बैठा हुआ आईने में अपने प्रतिबिम्ब को देखकर खुश होता रहता है। वहीं पिता द्वारा रामायण पाठ छोड़कर देखने पर लजाकर व मुस्कुराकर आईना रख देना । यहाँ बच्चों का अपने अक्ष के प्रति जिज्ञासा भाव बड़ा ही मनोहर लगता है और उसका शर्माकर आईना रखना बहुत ही सुन्दर वर्णन है।
- बच्चों द्वारा बारात का स्वांग रचते हुए दुल्हन को लिवा लाना व पिता द्वारा दुल्हन का घुघंट उटाने पर सब बच्चों का भाग जाना, बच्चों के खेल में समाज के प्रति उनका रूझान झलकता है तो दूसरी और उनकी नाटकीयता, स्वांग उनका बचपना।
- बच्चे का अपने पिता के साथ कुश्ती लड़ना। शिथिल होकर बच्चे के बल को बढ़ावा देना और पछाड़ खा कर गिर जाना। बच्चे का अपने पिता की मूंछ खींचना और पिता का इसमें प्रसन्न होना बड़ा ही आनन्दमयी प्रसंग है।
Q6. इस उपन्यास अंश में तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति का चित्रण है। आज की ग्रामीण संस्कृति में आपको किस तरह के परिवर्तन दिखाई देते हैं।
Answer: तीस के दशक अर्थात् 1930 के आस-पास ग्रामीण संस्कृति में बनावटी (दिखावा) जीवन का अभाव था। लोग बहुत ही सीधा-सादा जीवन व्यतीत करते थे। उस समय ग्रामीण लोगों पर विज्ञान का अधिक प्रभाव नहीं था। लोग बाज़ार अथवा दूसरों पर कम आश्रित थे। चोट लगने अथवा बिमार पड़ने पर भी बाज़ारू दवाइयों के स्थान पर घरेलु नुस्ख़ों का अधिक प्रयोग करते थे।
पहले की तुलना में आज की ग्रामीण संस्कृति में काफी परिवर्तन आए हैं। अब गाँव में भी विज्ञान का प्रभाव बढ़ता जा रहा है; जैसे- लालटेन के स्थान पर बिजली, बैल के स्थान पर ट्रैक्टर का प्रयोग, घरेलु खाद के स्थान पर बाज़ार में उप्लब्ध कृत्रिम खाद का प्रयोग तथा विदेशी दवाइयों का प्रयोग किया जा रहा है। पहले की तुलना में अब किसानों (खेतिहर मज़दूरों) की संख्या घट रही है। घर की छोटी-छोटी चीज़ों के लिए भी लोग दूसरों पर आश्रित हैं।
Q7. पाठ पढ़ते-पढ़ते आपको भी अपने माता-पिता को लाड़-प्यार याद आ रहा होगा। अपनी इन भावनाओं को डायरी में अंकित कीजिए।
Answer: सौम्य के बचपन की डायरी का एक पेज-
सोमवार, 12 अक्टूबर, 20XX
मनुष्य के मस्तिष्क से माता-पिता के स्नेह का चित्र कभी गायब नहीं होता है। मुझे याद है कि बचपन की वह घटना जब पिता जी ने मुझे मेरे जन्मदिन पर नई साइकिल दिलवाई थी। मुझे साइकिल चलाना नहीं आता था, इसलिए पिता जी मुझे बाग की ओर ले गए। वे घंटे भर साइकिल पकड़कर चलाना सिखाते रहे, पर मैंने उनसे कहा कि अब मैं खुद चलाऊँगा। मैं थोड़ी दूर ही गया था कि आगे थोड़ी ऊँचाई थी, जिसे मैं पार करना चाहता था पर साइकिल पार न हो सकी और पीछे की ओर सरकने लगी। मैं स्वयं को सँभाल न सकी और गिर पड़ा। साइकिल मेरे ऊपर थी। मेरे पैर चेन और गीयर के बीच में होने से घाव हो गया। पिता जी भागे-भागे आए। मुझे गोद में उठाया और डॉक्टर के पास ले गए। इलाज करवाया। इधर माँ और पिता जी हफ्तों तक मेरे ऊपर विशेष ध्यान रखते रहे। वह स्नेह मैं आज भी नहीं भूल पाया हूँ।
Q8. यहाँ माता-पिता का बच्चे के प्रति जो वात्सल्य व्यक्त हुआ है, उसे अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: भोलानाथ के पिता अपने पुत्र के प्रति बहुत स्नेह रखते थे । सुबह से लेकर शाम तक जितना भी समय मिलता उसे वे अपने भोलानाथ के साथ बिताते थे ।भोलानाथ को सुबह जगाना,नहलाना ,अपने साथ पूजा के लिए बिठाना , पने साथ मछलियों को चारा खिलाने ले जाना और उसके खेलों में शामिल होना उनके गहरे लगाव को बताता है।
भोलानाथ की माता वात्सल्य व ममत्व से भरपूर माता है। भोलानाथ को भोजन कराने के लिए उनका भिन्न-भिन्न तरह से स्वांग रचना एक स्नेही माता की ओर संकेत करता है। जो अपने पुत्र के भोजन को लेकर चिन्तित है। दूसरी ओर उसको लहुलुहान व भय से काँपता देखकर माँ भी स्वयं रोने व चिल्लाने लगती है। अपने पुत्र की ऐसी दशा देखकर माँ काह्रदय भी दुखी हो जाता है। माँ का ममतालु मन इतना भावुक है कि वह बच्चे को डर के मारे काँपता देखकर रोने लगती है। उसकी ममता पाठक को बहुत प्रभावित करती है।
Q9. माता का अँचल शीर्षक की उपयुक्तता बताते हुए कोई अन्य शीर्षक सुझाइए।
Answer: लेखक ने इस कहानी के आरम्भ में दिखाया है कि भोलानाथ का ज्यादा से ज्यादा समय पिता के साथ बीतता है। कहानी का शीर्षक पहले तो पाठक को कुछ अटपटा-सा लगता है पर जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है बात समझ में आने लगती है। इस कहानी में माँ के आँचल की सार्थकता को समझाने का प्रयास किया गया है। भोलानाथ को माता व पिता दोनों से बहुत प्रेम मिला है। उसका दिन पिता की छत्रछाया में ही शुरू होता है। पिता उसकी हर क्रीड़ा में सदैव साथ रहते हैं, विपदा होने पर उसकी रक्षा करते हैं। परन्तु जब वह साँप से डरकर माता की गोद में आता है और माता की जो प्रतिक्रिया होती है, वैसी प्रतिक्रिया या उतनी तड़प एक पिता में नहीं हो सकती।
माता उसके भय से भयभीत है, उसके दु:ख से दुखी है, उसके आँसू से खिन्न है। वह अपने पुत्र की पीड़ा को देखकर अपनी सुधबुध खो देती है। वह बस इसी प्रयास में है कि वह अपने पुत्र की पीड़ा को समाप्त कर सके। माँ का यही प्रयास उसके बच्चे को आत्मीय सुख व प्रेम का अनुभव कराता है। उसके बाद तो बात शीशे की तरह साफ़ हो जाती है कि पाठ का शीर्षक ‘माता का आँचल’ क्यों उचित है। पूरे पाठ में माँ की ममता ही प्रधान दिखती है, इसलिए कहा जा सकता है कि पाठ का शीर्षक सर्वथा उचित है। इसका अन्य शीर्षक हो सकता है – ‘माँ की ममता’ क्योंकि कहानी में माँ का स्नेह ही प्रधान है।
Q10. बच्चे माता-पिता के प्रति अपने प्रेम को कैसे अभिव्यक्त करते हैं?
Answer: बच्चे अपने माता-पिता के साथ अधिक समय व्यतीत कर अपने प्रेम को अभिव्यक्त करते हैं। पिता के कंधे पर बैठकर या झूलकर, सीने पर बैठ गालों को चूमना, मूँछें उखाड़ने की कोशिश करना या बाल खींचना, झूठ-मूठ का रोना, डर कर माँ की गोद में छिप जाना उन्हें सम्मान देकर, उनके सपनों को साकार कर, छोटे-छोटे कार्यों में उनका हाथ बँटाकर आदि क्रियाएँ प्रेम को प्रकट करती हैं।
Q11. इस पाठ में बच्चों की जो दुनिया रची गई है वह आपके बचपन की दुनिया से किस तरह भिन्न है?
Answer: यह कहानी उस समय की कहानी प्रस्तुत करती हैं जब बच्चों के पास खेलने के लिए अत्याधिक साधन नहीं होते थे। वे लोग अपने खेल प्रकृति से ही प्राप्त करते थे और उसी प्रकृति के साथ खेलते थे। उनके लिए मिट्टी, खेत, पानी, पेड़, मिट्टी के बर्तन आदि साधन थे।
परन्तु आज के बच्चों की दुनिया इन बच्चों से भिन्न है। आज के बच्चे टी.वी., कम्प्यूटर आदि में ही अपना समय व्यतीत करते हैं या फिर क्रिकेट, बेडमिन्टन, चाकॅलेट, पिज़ा आदि में ही अपना बचपन बिता देते हैं।
Q12. फणीश्वरनाथ रेणु और नागार्जुन की आँचलिक रचनाओं को पढ़िए।
Answer: छात्र पुस्तकालय से पुस्तकें लेकर पढ़ें।
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