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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij with Answers
CBSE Solutions Class 9 Hindi रीढ़ की हड्डी
Page No. 41
Q1. रामस्वरूप और रामगोपाल प्रसाद बात-बात पर “एक हमारा जमाना था …. ” कहकर अपने समय की तुलना वर्तमान समय से करते हैं । इस प्रकार की तुलना कहाँ तक तर्क संगत है ?
Answer: रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद दोनों पुराने जमाने के बुजुर्ग हैं। दोनों को वर्तमान जमाने की तुलना में अपना जमाना याद आता है। ये यादें स्वाभाविक हैं। इन यादों के लिए इन्हें प्रयत्न नहीं करना पड़ता। ये अपने आप मन में आती हैं। परंतु इन तुलनाओं को दूसरों के सामने प्रकट करके उन्हें नीचा दिखाना गलत है। यह तर्कसंगत नहीं है। ऐसा करने से बुजुर्ग लोग अपने हाथों में ऐसा हथियार ले लेते हैं जिसकी काट वर्तमान पीढ़ी के पास नहीं होती। यों भी हर ज़माने की अपनी स्थितियाँ होती हैं। ज़माना बदलता है तो उसमें कुछ कमियों के साथ कुछ सुधार भी आते हैं। परंतु बुजुर्ग लोग प्रायः अपने पक्ष में एकतरफा अनुभव सुनते हैं, जो कि तर्कसंगत नहीं है। यह मनोरंजन के लिए तो ठीक है, किंतु इसका कोई महत्त्व नहीं है।
Q2. रामस्वरूप का अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलवाना और विवाह के लिए छिपाना, यह विरोधाभास उनकी किस विवशता को उजागर करता है?
Answer: रामस्वरूप जिस प्रकार से अपनी बेटी की उच्च शिक्षा को छुपा रहे हैं ,वह यह प्रदर्शित करता है कि वह किस प्रकार से रूढ़िवादी विचार धाराओं के सामने विवश हैं। यह उनकी समाज में फैली अवधारणाओं के प्रति विवशता को प्रदर्शित करता है।
Q3. अपनी बेटी का रिश्ता तय करने के लिए रामस्वरूप उमा से जिस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा कर रहे हैं, उचित क्यों नहीं है ?
Answer: बेटी का रिश्ता तय करने के लिए रामस्वरुप अपनी बेटी उमा से सीधी-साधी, कम पढ़ी लिखी और कम बोलने वाली लड़की की तरह व्यवहार करने की अपेक्षा कर रहे थे। उनका ऐसा सोचना उचित नहीं है क्योंकि लड़की कोई भेड़-बकरी या मेज़-कुर्सी नहीं होती है। वो कोई कठपुतली भी नहीं होती, जिसे हम अपने इशारों पर नचा सकें। उनका भी दिल होता है। उच्च शिक्षा पाना कोई अपराध नहीं है जिसकी वज़ह से उसे शर्मिंदा होना पड़े और अपनी योग्यता को छुपाना पड़े।
Q4. गोपाल प्रसाद विवाह को ‘बिजनेस’ मानते हैं और रामस्वरूप अपनी बेटी की उच्च शिक्षा छिपाते हैं क्या आप मानते हैं कि दोनों ही समान रूप से अपराधी हैं ? अपने विचार लिखिए।
Answer: मेरे विचार से दोनों ही समान रूप से अपराधी हैं – गोपाल प्रसाद विवाह जैसे पवित्र बंधन में भी बिजनेस खोज रहे हैं, वे इस तरह के आचरण से इस सम्बन्ध की मधुरता, तथा सम्बन्धों की गरिमा को भी कम कर रहे हैं।
रामस्वरूप जहाँ आधुनिक सोच वाले व्यक्ति होने के बावजूद कायरता का परिचय दे रहे हैं ।वे चाहते तो अपनी बेटी के साथ मजबूती से खड़े होते और एक स्वाभिमानी वर की तलाश करते न की मज़बूरी में आकर परिस्तिथि से समझौता करते ।
Q5. “….आपके लाड़ले बेटे के की रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं ….” उमा इस कथन के माध्यम से शंकर की किन कमियों की ओर संकेत करना चाहती है?
Answer: उमा गोपाल प्रसाद जी के विचारों से पहले से ही खिन्न थी। परन्तु उनके द्वारा अनगिनत सवालों ने उसे क्रोधित कर दिया था। आखिर उसे अपनी चुप्पी को तोड़कर गोपाल प्रसाद को उनके पुत्र के विषय में अवगत करना पड़ा।
(1) शंकर एक चरित्रहीन व्यक्ति था। जो हमेशा लड़कियों का पीछा करते हुए होस्टल तक पहुँच जाता था। इस कारण उसे शर्मिंदा भी होना पड़ा था।
(2) दूसरी तरफ़ उसकी पीठ की तरफ़ इशारा कर वह गोपाल जी को उनके लड़के के स्वास्थ्य की ओर संकेत करती है। जिसके कारण वह बीमार रहता है तथा सीधी तरह बैठ नहीं पाता।
(3) शंकर अपने पिता पर पूरी तरह आश्रित है। उसकी रीढ़ की हड्डी नहीं है अर्थात् उसकी अपनी कोई मर्ज़ी नहीं है।
Q6. शंकर जैसे लड़के या उमा जैसी लड़की – समाज को कैसे व्यक्तित्व की जरूरत है ? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
Answer: समाज में आज उमा जैसे व्यक्तित्व, स्पष्टवादिनी तथा उच्च चरित्र वाली लड़की की ही आवश्यकता है । ऐसी लड़कियाँ ही गोपाल प्रसाद जैसे दोहरी मानसिकता रखने वाले, लालची और ढोंगी लोगों को सबक सिखा सकती हैं। ऐसी लड़कियों से ही समाज और देश प्रगति कर पाएगा जो आत्मविश्वास से भरी तथा निडर हो। इसके विपरीत शंकर जैसे लड़के समाज के लिए निरुपयोगी है। शंकर जैसे व्यक्ति समाज को कोई दिशा नहीं प्रदान कर सकते हैं।
Q7. ‘रीढ़ की हड्डी’ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
Answer: मानव शरीर को सीधा खड़ा होने के लिए रीढ़ की हड्डी का मजबूत होना बहुत आवश्यक है। ठीक इसी प्रकार से समाज के चतुर्दिक विकास के लिए स्त्रियों का शिक्षित और आत्मनिर्भर होना आवश्यक है। समाज में नारी को उचित स्थान न मिल पाना, समाज की ‘बैकबोन’ को कमजोर करता है। नारी की उन्नति तथा समाज में उचित स्थान दिए बिना समाज मजबूत नहीं हो सकता है। उमा के विवाह के लिए रामस्वरूप जो रिश्ता तय करते हैं उस लड़के (शंकर) की कमर भी ‘झुकी रहती है।
उसकी शारीरिक बनावट भी बहुत अच्छी नहीं दिखता। ऐसा लगता है कि उसकी बैकबोन (रीढ़ की हड्डी) झुकी हुई है। इसके अलावा शंकर के चरित्र की कमजोरी को भी रीढ़ की हड्डी न होने की बात कह कर उभारा गया है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि ‘रीढ़ की हड्डी’ शीर्षक पूर्णतया सार्थक है।
Q8. कथा वस्तु के आधार पर आप किसे एकांकी का मुख्य पात्र मानते हैं और क्यों ?
Answer: कथा वस्तु के आधार में उमा मुख्य पात्र है क्योंकि पूरी एकांकी इसके ही इर्द-गिर्द घूमती है। भले ही पाठ में उसकी उपस्थिति थोड़े समय के लिए ही है परन्तु उसके विचारों से प्रभावित हुए बिना हम नहीं रह पाते हैं। वह हमें बहुत कुछ सोचने के लिए मजबूर करती है। उसकी उपस्थिति नारी-समाज को एक नई सोच और दिशा प्रदान करती है। समाज की मानसिकता पर व्यंग्य करने का जो प्रयास लेखक ने किया है उसका माध्यम उमा ही है।
Q9. एकांकी के आधार पर रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद की चारित्रिक विशेषताएँ बताइए।
Answer: एकांकी के आधार पर रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद की चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
रामस्वरूप की चारित्रिक विशेषताएँ-
- रामस्वरूप अधेड़ उम्र वाले व्यक्ति हैं जो लड़कियों की उच्च शिक्षा के पक्षधर हैं।
- रामस्वरूप शिक्षा के साथ-साथ पेंटिंग, संगीत आदि के प्रति रुचि रखनेवाले हैं।
- रामस्वरूप में भी मानवीय कमियाँ हैं। वे लड़केवालों की इच्छा के आगे अपनी बेटी उमा की उच्च शिक्षा छिपाने को विवश हो जाते हैं।
- रामस्वरूप अपनी बीवी को बजता ग्रामोफ़ोन कहकर अपनी विनोदप्रियता प्रकट करते हैं।
- वे अपने जमाने को आज के समय से बेहतर मानते हैं।
गोपाल प्रसाद की चारित्रिक विशेषताएँ-
- गोपाल प्रसाद उच्च शिक्षित वकील हैं परंतु चालाक किस्म के व्यक्ति हैं।
वे रूढ़िवादी विचारों वाले हैं, क्योंकि अपने बेटे के लिए वे दसवीं पास बहू ही चाहते हैं।
वे विवाह जैसे पवित्र संस्कार को बिजनेस समझते हैं।
वे अपने बेटे के विवाह में भरपूर दहेज चाहते हैं।
गोपाल प्रसाद अपनी तथा अपने बेटे की कमियों को सरलता से नहीं स्वीकारते हैं।
Q10. इस एकांकी का क्या उद्देश्य है ? लिखिए।
Answer: रीढ़ की हड्डी’ एकांकी का उद्देश्य है-समाज के लोगों की दोहरी मानसिकता सबके सामने लाना, लड़कियों के विवाह में आनेवाली समस्याओं की ओर समाज का ध्यान खींचना तथा युवाओं द्वारा अपनी शिक्षा और चरित्र की मजबूती का। ध्यान न रखना। एकांकी में गोपाल प्रसाद और उनका बेटा शंकर जैसे लोग हैं जो उच्च शिक्षित होकर भी कम पढ़ी-लिखी बहू चाहते हैं और स्त्रियों को समानता का दर्जा नहीं देना चाहते हैं। उमा को देखने आए लड़के वाले उसे वस्तु की तरह देखते हैं और अप्रत्यक्ष रूप से दहेज की माँग करते हैं। इसके अलावा शंकर जैसे युवा का अपनी पढ़ाई पर ध्यान न देना तथा उसकी चारित्रिक दुर्बलता की ओर ध्यान आकर्षित करना इस एकांकी का उद्देश्य है।
Q11. समाज में महिलाओं को उचित गरिमा दिलाने हेतु आप कौन-कौन से प्रयास कर सकते हैं ?
Answer: समाज में महिलाओं को उचित गरिमा दिलाने हेतु हमने निम्न प्रयास कर सकते हैं:
क) महिलाओं को शिक्षित करने के लिए एक अभियान चलाना एवं जगह-जगह पर महिलाओं को प्रशिक्षित करने के लिए विद्यालयों को खोलकर।
ख) लोगों में जागरूकता लाकर उन्हें यह बताना के ईश्वर के लिए एवं विधि के समक्ष सभी लोग समान है अतः नारियों को भी पुरुषों के समान अधिकार होने चाहिए।
ग) लोगों को बताना कि दहेज प्रथा की कितनी हानियां हैं और यह कुरीति किस तरह समाज को बर्बाद कर रही है।
घ) महिलाओं को उचित सम्मान दिलाने हेतु उन्हें भी उचित रोजगार दिलाकर। गृहकार्य को भी एक रोजगार के रूप में प्रस्तुत कर कर।
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