साना-साना हाथ जोड़ि NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kritika Chapter 3 with Answers

We have Provided the NCERT/CBSE Solutions chapter-wise for Class 10 Hindi Chapter 3 साना-साना हाथ जोड़ि with Answers by expert subject teacher for latest syllabus and examination. Students can take a free NCERT Solutions of साना-साना हाथ जोड़ि. Each question has right answer Solved by Expert Teacher.

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kritika with Answers

CBSE Solutions Class 10 Hindi साना-साना हाथ जोड़ि

Page No. 29

प्रश्न अभ्यास

Q1. झिलमिलाते सितारों की रोशनी में नहाया गंतोक लेखिका को किस तरह सम्मोहित कर रहा था?

Answer: रात्रि के समय आसमान ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो सारे तारे बिखरकर नीचे टिमटिमा रहे थे। दूर ढलान लेती तराई पर सितारों के गुच्छे रोशनियों की एक झालर-सी बना रहे थे। रात के अन्धकार में सितारों से झिलमिलाता गंतोक लेखिका को जादुई एहसास करा रहा था। उसे यह जादू ऐसा सम्मोहित कर रहा था कि मानो उसका आस्तित्व स्थगित सा हो गया हो, सब कुछ अर्थहीन सा था। उसकी चेतना शून्यता को प्राप्त कर रही थी। वह सुख की अतींद्रियता में डूबी हुई उस जादुई उजाले में नहा रही थी जो उसे आत्मिक सुख प्रदान कर रही थी।

Q2. गंतोक को ‘मेहनतकश बादशाहों का शहर’ क्यों कहा गया?

Answer: गंतोक को मेहनतकश बादशाहों का शहर दो कारणों से कहा गया है –

यहाँ के लोग बहुत परिश्रमी हैं। घाटियों के बीच मार्ग निकालकर इसे टूरिस्ट स्पॉट बनाने में पुरुषों ने ही नहीं, स्त्रियों ने भी बहुत योगदान दिया है। लेखिका ने स्वयं देखा है कि कैसे स्त्रियाँ पीठ पर बँधी डोकों में बच्चों को बाँधकर, कुदाल को जमीन पर मारकर पत्थर तोड़कर पहाड़ी रास्तों को चौड़ा बनाती थीं, जिनसे होकर हिमशिखरों से टक्कर लेने जाया जा सकता था। रास्ता बनाने में इन्होंने मौत को भी झुठलाया था। पहाड़ी बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ शाम को मवेशी चराने, पानी भरने, जंगल से लकड़ियाँ लाने का काम करते थे। स्त्रियाँ गाय चराने, लकड़ियों के गट्ठर ढोने और चाय बागान में चाय की पत्तियाँ तोड़ने का कार्य करने जैसी कठिन दिनचर्या बिताती थीं। भारत में मिलने से पूर्व सिक्किम स्वतंत्र रजवाड़ा था। इसलिए यह अनुमान लगाना सहज है कि उन बादशाहों की बुद्धिमत्ता एवं प्रजा के सहयोग से इस शहर को सुंदर बनाया गया होगा।

Q3. कभी श्वेत तो कभी रंगीन पताकाओं का फहराना किन अलग-अलग अवसरों की ओर संकेत करता है?

Answer: सफ़ेद बौद्ध पताकाएँ शांति व अहिंसा की प्रतीक हैं, इन पर मंत्र लिखे होते हैं। यदि किसी बुद्धिस्ट की मृत्यु होती है तो उसकी आत्मा की शांति के लिए 108 श्वेत पताकाएँ फहराई जाती हैं। कई बार किसी नए कार्य के अवसर पर रंगीन पताकाएँ फहराई जाती हैं। इसलिए ये पताकाएँ, शोक व नए कार्य के शुभांरभ की ओर संकेत करते हैं।

Q4. जितेन नार्गे ने लेखिका को सिक्किम की प्रकृति, वहाँ की भौगोलिक स्थिति एवं जनजीवन के बारे में क्या महत्वपूर्ण जानकारियाँ दीं, लिखिए।

Answer: जितेन नार्गे ने लेखिका एवं अन्य सैलानियों को सिक्किम के बारे में अनेक महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ दीं। वह लेखिका के साथ ड्राइवर-कम-गाइड का कार्य कर रहा था जो जीप चलाते हुए जानकारियाँ दे रहा था। वह एक कुशल ड्राइवर होने के साथ-साथ गाइड भी था जिसे गंतोक के बारे में नई-पुरानी तथा पौराणिक अनेक जानकारियाँ कंठस्थ थीं। उसने लेखिका को बताया कि सिक्किम पूर्वोत्तर भारत का पहाड़ी इलाका है जहाँ जगह-जगह पाईन और धूपी के खूबसूरत पेड़ हैं। यहाँ के अविरल बहते झरने जगह-जगह फूलों के चादर से ढंकी वादियाँ, बरफ़ीली चोटियाँ आदि का अनुपम प्राकृतिक सौंदर्य बरबस लोगों को चित्त अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। इसके अलावा गुरुनानक के फुट प्रिंट, चावल बिखरने, कुटिया में प्रेयर ह्वील घुमाने से पाप धुल जाने, प्रियुता और रुडोडेंड्रो के फूलों के खिलने की जानकारी के अलावा पहाड़ी लोगों के परिश्रम भरे जीवन की जानकारी भी दी।

Q5. लोंग स्टॉक में घूमते हुए चक्र को देखकर लेखिका को पूरे भारत की आत्मा एक-सी क्यों दिखाई दी ?

Answer: लेखिका सिक्किम में घूमती हुई कवीं-लोंग स्टॉक नाम की जगह पर गई । वहाँ एक कुटिया में घूमता चक्र है। मान्यता है कि इसे घुमाने से सारे पापों का नाश होता है। लेखिका के अनुसार आप भारत के किसी भी कोने में चले जाएँ आपको लोगों की आस्थाएँ, विश्वास, अंधविश्वास, पाप−पुण्य की अवधारणाएँ और कल्पनाएँ हर जगह एक सी मिलेंगी हर जगह उनके भगवान बदल जाएँ, पूजा के तरीकों में अन्तर हो परन्तु विश्वास सदैव एक सा रहेगा और यही विश्वास पूरे भारत को एक ही सूत्र में बाँध देता है जहाँ पूरे भारत की एक आत्मा प्रतित हो, ऐसा जाना पड़ता है।

Q6. जितेन नार्गे की गाइड की भूमिका के बारे में विचार करते हुए लिखिए कि एक कुशल गाइड में क्या गुण होते हैं?

Answer: नार्गे एक कुशल गाइड था। वह अपने पेशे के प्रति पूरा समर्पित था। उसे सिक्किम के हर कोने के विषय में भरपूर जानकारी प्राप्त थी इसलिए वह एक अच्छा गाइड था।

एक कुशल गाइड में निम्नलिखित गुणों का होना आवश्यक है –

(क) एक गाइड अपने देश व इलाके के कोने−कोने से भली भाँति परिचित होता है, अर्थात् उसे सम्पूर्ण जानकारी होनी चाहिए।
(ख) उसे वहाँ की भौगोलिक स्थिति, जलवायु व इतिहास की सम्पूर्ण जानकारी होनी चाहिए।
(ग) एक कुशल गाइड को चाहिए कि वो अपने भ्रमणकर्ता के हर प्रश्नों के उत्तर देने में सक्षम हो।
(घ) एक कुशल गाइड को अपनी विश्वसनीयता का विश्वास अपने भ्रमणकर्ता को दिलाना आवश्यक है। तभी वह एक आत्मीय रिश्ता कायम कर अपने कार्य को कर सकता है।
(ङ) गाइड को कुशल व बुद्धिमान व्यक्ति होना आवश्यक है। ताकि समय पड़ने पर वह विषम परिस्थितियों का सामना अपनी कुशलता व बुद्धिमानी से कर सके व अपने भ्रमणकर्ता की सुरक्षा कर सके।
(च) गाइड को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि भ्रमणकर्ता की रूचि पूरी यात्रा में बनी रहे ताकि भ्रमणकर्ता के भ्रमण करने का प्रयोजन सफल हो। इसके लिए उसे हर उस छोटे बड़े प्राकृतिक रहस्यों व बातों का ज्ञान हो जो यात्रा को रूचिपूर्ण बनाए।
(छ) एक कुशल गाइड की वाणी को प्रभावशाली होना आवश्यक है इससे पूरी यात्रा प्रभावशाली बनती है और भ्रमणकर्ता की यात्रा में रूचि भी बनी रहती है।

Q7. इस यात्रा-वृत्तांत में लेखिका ने हिमालय के जिन-जिन रूपों का चित्र खींचा है, उन्हें अपने शब्दों में लिखिए।

Answer: इस यात्रा-वृत्तांत में लेखिका ने हिमालय के पल-पल परिवर्तित होते रूप को देखा। ज्यों-ज्यों ऊँचाई पर चढ़ते जाएँ हिमालय विशाल से विशालतर होता चला जाता है। छोटी-छोटी पहाड़ियाँ विशाल पर्वतों में बदलने लगती हैं। घाटियाँ गहराती-गहराती पाताल नापने लगती हैं। वादियाँ चौड़ी होने लगती हैं, जिनके बीच रंग-बिरंगे फूल मुसकराते हुए नज़र आते हैं। चारों ओर प्राकृतिक सुषमा बिखरी नज़र आती है। जल-प्रपात जलधारा बनकर पत्थरों के बीच बलखाती-सी निकलती है। तो मन को मोह लेती है। हिमालय कहीं हरियाली के कारण चटक हरे रंग की मोटी चादर-सा नजर आता है, कहीं पीलापन लिए नज़र आता है। कहीं पलास्टर उखड़ी दीवार की तरह पथरीला नजर आता है।

Q8. प्रकृति के उस अनंत और विराट स्वरूप को देखकर लेखिका को कैसी अनुभूति होती है?

Answer: हिमालय का स्वरूप पल-पल बदलता है। प्रकृति इतनी मोहक है कि लेखिका किसी बुत-सी ‘माया’ और ‘छाया’ के खेल को देखती रह जाती है। उसे लगता है कि प्रकृति उसे अपना परिचय दे रही है। वह उसे और सयानी (बुद्धिमान) बनाने के लिए अपने रहस्यों का उद्घाटन कर रही है। प्रकृति के उस अनंत और विराट स्वरूप को देखकर उसे अनेक अनुभूतियाँ होती हैं। उसे लगता है जीवन की सार्थकता झरनों और फूलों की भाँति स्वयं को दे देने में अर्थात् परोपकार में ही है। झरनों की भाँति निरंतर चलायमान रहना और फूलों की भाँति अपनी महक लुटाना ही जीवन का सच्चा स्वरूप है।

Q9. प्राकृतिक सौंदर्य के अलौकिक आनंद में डूबी लेखिका को कौन-कौन से दृश्य झकझोर गए ?

Answer: लेखिका हिमालय यात्रा के दौरान प्राकृतिक सौंदर्य के अलौकिक आनन्द में डूबी हुई थी परन्तु जीवन के कुछ सत्य जो वह इस आनन्द में भूल चूकी थी, अकस्मात् वहाँ के जनजीवन ने उसे झकझोर दिया। वहाँ कुछ पहाड़ी औरतें जो मार्ग बनाने के लिए पत्थरों पर बैठकर पत्थर तोड़ रही थीं। उनके आटे सी कोमल काया पर हाथों में कुदाल व हथोड़े थे। कईयों की पीठ पर बच्चे भी बँधे हुए थे। इनको देखकर लेखिका को बहुत दुख हुआ कि ये हम सैलानियों के भ्रमण के लिए हिमालय की इन दुगर्म घाटियों में मार्ग बनाने का कार्य कर रही हैं।

जहाँ पर जान कब जाए कोई नहीं जानता। इनके लिए यह भोजन मात्र पाने का साधन है और हमारे जैसे सौलानियों के लिए मनोरजंन का। दूसरी बार उसकी जादूई निद्रा तब टूटी जब उसने पहाड़ी बच्चों को उनसे लिफट माँगते देखा। सात आठ साल के बच्चों को रोज़ तीन−साढ़े तीन किलोमीटर का सफ़र तय कर स्कूल पढ़ने जाना पढ़ता है। स्कूल के पश्चात् वे बच्चे मवेशियों को चराते हैं तथा लकड़ियों के गट्ठर भी ढोते हैं। तीसरे लेखिका ने जब चाय की पत्तियों को चूनते हुए सिक्किमी परिधानों में ढकी हुई लड़कियों को देखा। बोकु पहने उनका सौंदर्य इंद्रधनुष छटा बिखेर रहा था। जिसने उसे मंत्रमुग्ध कर दिया था। उन्हें मेहनत करती हुई इन बालाओं का सौंदर्य असह्रय लग रहा था।

Q10. सैलानियों को प्रकृति की अलौकिक छटा का अनुभव करवाने में किन-किन लोगों का योगदान होता है, उल्लेख करें।

Answer: सैलानियों को प्रकृति की अलौकिक छटा का अनुभव कराने में सबसे बड़ा हाथ एक कुशल गाइड का होता है। जो अपनी जानकारी व अनुभव से सैलानियों को प्रकृति व स्थान के दर्शन कराता है। कुशल गाइड इस बात का ध्यान रखता है कि भ्रमणकर्ता की रूचि पूरी यात्रा में बनी रहे ताकि भ्रमणकर्ता के भ्रमण करने का प्रयोजन सफल हो। अपने मित्रों व सहयात्रियों का साथ पाकर यात्रा और भी रोमांचकारी व आनन्दमयी बन जाती है। वहाँ के स्थानीय निवासियों व जन जीवन का भी महत्वपूर्ण स्थान होता है। उनके द्वारा ही इस छटा के सौंदर्य को बल मिलता है क्योंकि यदि ये ना हों तो वो स्थान नीरस व बेजान लगने लगते हैं। तथा सरकारी लोग जो व्यवस्था में संलग्न होते उनका महत्त्वपूर्ण योगदान होता हैं।

Q11. “कितना कम लेकर ये समाज को कितना अधिक वापस लौटा देती हैं।” इस कथन के आधार पर स्पष्ट करें कि आम जनता की देश की आर्थिक प्रगति में क्या भूमिका है?

Answer: प्राकृतिक सौंदर्य से अभिभूत हो, लेखिका अचानक चौंक उठती है, जब वह औरतों को शारीरिक श्रम करते देखती है। ये श्रम करने वाले अपने जीवन को संकट में डालते हैं तथा लोगों के लिए सुखों के साधन जुटाते हैं। मज़दूर, किसान, बड़ी-बड़ी सड़कें व पुल बनाने वाले, बड़े-बड़े भवन बनाने वाले कितना श्रम करते हैं और बदले में उन्हें कितना कम पैसा मिलता है। यदि ये न हों, तो हम जीवन के सुखों से वंचित हो जाएँ। ये श्रम करने वाले दिन-रात एक करके, भूखे रह, सुख-सुविधाओं से वंचित जीवन व्यतीत करते हैं। उनका श्रम देश की आर्थिक प्रगति में भी सहायक होता है। हमारे देश की जनता बहुत कम पारिश्रमिक लेकर देश की प्रगति में अहम भूमिका निभाती है।

Q12. आज की पीढ़ी द्वारा प्रकृति के साथ किस तरह का खिलवाड़ किया जा रहा है। इसे रोकने में आपकी क्या भूमिका होनी चाहिए।

Answer: आज की पीढ़ी के द्वारा प्रकृति को प्रदूषित किया जा रहा है। हमारे कारखानों से निकलने वाले जल में खतरनाक कैमिकल व रसायन होते हैं जिसे नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है। साथ में घरों से निकला दूषित जल भी नदियों में ही जाता है। जिसके कारण हमारी नदियाँ लगातार दूषित हो रही हैं। अब नदियों का जल पीने लायक नहीं रहा है। इसका जीवन्त उदाहरण यमुना नदी है।

जो आज एक नाले में बदल गई है। वनों की अन्धांधुध कटाई से मृदा का कटाव होने लगा है जो बाढ़ को आमंत्रित कर रहा है। दूसरे अधिक पेड़ों की कटाई ने वातावरण में कार्बनडाइ आक्साइड की अधिकता बढ़ा दी है जिससे वायु प्रदुषित होती जा रही है। हमें चाहिए कि हम मिलकर इस समस्या का समाधान निकाले। हम सबको मिलकर अधिक से अधिक पेड़ों को लगाना चाहिए। पेड़ों को काटने से रोकने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए ताकि वातावरण की शुद्धता बनी रहे।

हमें नादियों की निर्मलता व स्वच्छता को बनाए रखने के लिए कारखानों से निकलने वाले प्रदूर्षित जल को नदियों में डालने से रोकना चाहिए। नदियों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए, लोगों की जागरूकता के लिए अनेक कार्यक्रमों का आयोजन होना चाहिए।

Q13. प्रदूषण के कारण स्नोफॉल में कमी का जिक्र किया गया है। प्रदूषण के और कौन-कौन से दुष्परिणाम सामने आये हैं, लिखें।

Answer: प्रदूषण के कारण वायुमण्डल में कार्बनडाइआक्साइड की अधिकता बढ़ गई है जिसके कारण वायु प्रदूषित होती जा रही है। इससे साँस की अनेकों बीमारियाँ उत्पन्न होने लगी है। जलवायु पर भी इसका बुरा प्रभाव देखने को मिल रहा है जिसके कारण कहीं पर बारिश की अधिकता हो जाती है तो किसी स्थान पर सूखा पड़ जाता है। कहीं पर बारिश नाममात्र की होती है जिस कारण गर्मी में कमी नहीं होती। मौसम पर तो इसका असर साफ दिखाई देने लगा है।

गर्मी के मौसम में गर्मी की अधिकता देखते बनती है। कई बार तो पारा अपने सारे रिकार्ड को तोड़ चुका होता है। सर्दीयों के समय में या तो कम सर्दी पड़ती है या कभी सर्दी का पता ही नहीं चलता। ये सब प्रदुषण के कारण ही सम्भव हो रहा है। जलप्रदूषण के कारण स्वच्छ जल पीने को नहीं मिल पा रहा है और पेट सम्बन्धी अनेकों बीमारियाँ उत्पन्न हो रही हैं।

ध्वनि प्रदूषण से मनुष्य में कान सम्बन्धी रोग हो रहे हैं।

Q14. ‘कटाओ’ पर किसी दूकान का न होना उसके लिए वरदान है। इस कथन के पक्ष में अपनी राय व्यक्त कीजिए।

Answer: कटाओ, सिक्किम का अत्यंत खूबसूरत और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर स्थान है। यह अत्यंत ऊँचाई पर बसा दुर्गम स्थान है, जहाँ बरफ़ मिलने की संभावना सर्वाधिक रहती है। लेखिका जब कटाओ पहुँची तो उसे घुटने भर बरफ़ मिली। वह बरफ़ पर लेटना चाहती थी, पर वहाँ कोई दुकान न थी। यदि दुकान होती तो वहाँ व्यापारिक गतिविधियाँ बढ़ जाती और लोग खान-पान का अपशिष्ट एवं अवशिष्ट सामान छोड़ते तथा वहाँ वाहनों का आवागमन बढ़ता जिससे प्रदूषण तथा तापमान बढ़ जाता और वहाँ भी बरफ़ मिलने की संभावना समाप्त हो जाती तथा पर्यटकों को निराश लौटना पड़ता। इस प्रकार कटाओ पर किसी भी दुकान का न होना उसके लिए वरदान है।

Q15. प्रकृति ने जल संचय की व्यवस्था किस प्रकार की है ?

Answer: प्रकृति ने जल-संचय की बड़ी अद्भुत व्यवस्था की है। प्रकृति सर्दियों में पर्वत शिखरों पर बर्फ के रूप में गिरकर जल का भंडारण करती है। हिम-मंडित पर्वत-शिखर एक प्रकार के जल-स्तंभ हैं, जो गर्मियों में जलधारा बनकर करोड़ों कंठों की प्यास बुझाते हैं। नदियों के रूप में बहती यह जलधारा अपने किनारे बसे नगर-गाँवों में जल-संसाधन के रूप में तथा नहरों के द्वारा एक विस्तृत क्षेत्र में सिंचाई करती हैं और अंततः सागर में जाकर मिल जाती हैं। सागर से जलवाष्प बादल के रूप में उड़ते हैं, जो मैदानी क्षेत्रों में वर्षा तथा पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फ के रूप में बरसते हैं। इस प्रकार ‘जल-चक्र’ द्वारा प्रकृति ने जल-संचयन तथा वितरण की व्यवस्था की है।

Q16. देश की सीमा पर बैठे फ़ौजी किस तरह की कठिनाइयों से जूझते हैं? उनके प्रति हमारा क्या उत्तरदायित्व होना चाहिए?

Answer: देश की सीमा पर,जहाँ तापमान गर्मी में भी माइनस 15 डिग्री सेलसियस होता है, उस कड़कड़ाती ठंड फ़ौजी पहरा देते हैं जब कि हम वहाँ पर एक मिनट भी नहीं रूक सकते। हमारे फ़ौजी सर्दी तथा गर्मी में वहीं रहकर देश की रक्षा करते रहते हैं ताकि हम चैन की नींद सो सकें। ये जवान हर पल कठिनाइयों से झूझते हैं और अपनी जान हथेली पर रखकर जीते हैं।
हमें सदा उनकी सलामती की दुआ करनी चाहिए। उनके परिवारवालों के साथ हमेशा सहानुभूति, प्यार व सम्मान के साथ पेश आना चाहिए।

We Think the given NCERT Solutions for class 10 Hindi Chapter 3 साना-साना हाथ जोड़ि with Answers Pdf free download will assist you. If you’ve got any queries regarding CBSE Class 10 Hindi साना-साना हाथ जोड़ि NCERT Solutions with Answers, drop a comment below and that we will come back to you soons.

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top