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NCERT Solutions for Class 10 Hindi Sparsh with Answers
CBSE Solutions Class 10 Hindi पतझर में टूटी पत्तियाँ हिंदी
Page No. 122
प्रश्न अभ्यास
मौखिक
निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए –
Q1. शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग क्यों होता है?
Answer: शुद्ध सोने में किसी प्रकार की मिलावट नही की जाती अगर इसी में थोड़ा-सा ताँबा मिला दिया जाए तो यह गिन्नी बन जाता है। ऐसा करने से सोने की मजबूती और चमक दोनों बढ़ जाती है।
Q2. प्रेक्टिकल आइडियालिस्ट किसे कहते हैं?
Answer: शुद्ध आदर्श भी शुद्ध सोने की तरह होते हैं। कुछ लोग आदर्शों में व्यावहारिकता का ताँबा मिला देते हैं और फिर उसे आचरण में लाकर दिखाते हैं, तब उन्हें प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट कहा जाता है।
Q3. पाठ के संदर्भ में शुद्ध आदर्श क्या है?
Answer: शुद्ध आदर्श का अर्थ है जिसमें लाभ हानि सोचने की गुजांइश नहीं होती है।
Q4. लेखक ने जापानियों के दिमाग में स्पीड का इंजन लगने की बात क्यों कही है?
Answer: दिमाग में ‘स्पीड’ का इंजन लगने से वह दूसरों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकता है। जापान के लोग पूर्ण रूप से प्रतिस्पर्धा में हैं, वे किसी भी तरीके से उन्नति करके अमेरिका से आगे निकलना चाहते हैं। इसलिए उनका मस्तैिष्क सदा तनावग्रस्त रहता है। इस कारण वे मानसिक रोगों के शिकार होते हैं। लेखक ने जापानियों के दिमाग में ‘स्पीड’ का इंजन लगाने की बात इसलिए कही क्योंकि वे तीव्र गति से प्रगति करना चाहते हैं। महीने के काम को एक दिन में पूरा करना चाहते हैं इसलिए उनका दिमाग भी तेज़ रफ्तार से स्पीड इंजन की भाँति सोचता है।
Q5. जापानी में चाय पीने की विधि को क्या कहते हैं?
Answer: जापानी में चाय पीने की विधि को “चा-नो-यू” कहते हैं, जिसका अर्थ है-‘टी-सेरेमनी’ और चाय पिलाने वाला ‘चाजीन कहलाता है।
Q6. जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, उस स्थान की क्या विशेषता है?
Answer: जापान में जिस स्थान पर चाय पिलाई जाती है, उस स्थान की मुख्य विशेषता शांति है। वहाँ की सजावट परंपरागत तरीके से होती है।वहाँ बहुत शांति और गरीमा के साथ चाय पिलाई जाती है।
लिखित
(क) निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −
Q1. शुद्ध आदर्श की तुलना सोने से और व्यावहारिकता की तुलना ताँबे से क्यों की गई है?
Answer: शुद्ध सोने में किसी प्रकार की मिलावट नहीं की जा सकती। ताँबे से सोना मजबूत हो जाता है परन्तु शुद्धता समाप्त हो जाती है। इसी प्रकार व्यवहारिकता में शुद्ध आदर्श समाप्त हो जाते हैं। परन्तु जीवन में आदर्श के साथ व्यावाहारिकता भी आवश्यक है, क्योंकि व्यावाहारिकता के समावेश से आदर्श सुन्दर व मजबूत हो जाते हैं।
Q2. चाजीन ने कौन-सी क्रियाएँ गरिमापूर्ण ढंग से पूरी कीं?
Answer: चाजीन द्वारा अतिथियों का उठकर स्वागत करना, आराम से अँगीठी सुलगाना, चायदानी रखना, चाय के बर्तन लाना, तौलिए सेपोछ कर चाय डालना आदि सभी क्रियाएँ गरिमापूर्ण, अच्छे व सहज ढंग से कीं।
Q3. टी-सेरेमनी में कितने आदमियों को प्रवेश दिया जाता था और क्यों?
Answer: टी-सेरेमनी में एक साथ तीन व्यक्तियों को प्रवेश दिया जाता था, जिससे वहाँ के शांत वातावरण में खलल न पैदा हो और चाय पीने वाले चाय पीकर अद्भुत शांति और सकून की अनुभूति कर सकें।
Q4. चाय पीने के बाद लेखक ने स्वयं में क्या परिवर्तन महसूस किया?
Answer: चाय पीने के बाद लेखक ने महसूस किया कि उसका दिमाग सुन्न होता जा रहा है, उसकी सोचने की शक्ति धीरे-धीरे मंद हो रही है। इससे सन्नाटे की आवाज भी सुनाई देने लगी। उसे लगा कि भूत-भविष्य दोनों का चिंतन न करके वर्तमान में जी रहा हो। उसे बहुत सुख मिलने लगा।
(ख) निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए –
Q1. गाँधीजी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी; उदाहरण सहित इस बात की पुष्टि कीजिए?
Answer: वास्तव में गांधी जी के नेतृत्व में अद्भुत क्षमता थी। वे व्यावहारिकता को पहचानते थे, उसकी कीमत पहचानते थे, और उसकी कीमत जानते थे। वे कभी भी आदर्शों को व्यावहारिकता के स्तर पर उतरने नहीं देते थे, बल्कि व्यावहारिकता को आदर्शों पर चलाते थे। वे सोने में ताँबा नहीं, बल्कि ताँबे में सोना मिलाकर उसकी कीमत बढ़ाते थे। गांधी जी ने सत्याग्रह आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन, असहयोग आंदोलन व दांडी मार्च जैसे आंदोलनों का नेतृत्व किया तथा सत्य और अहिंसा जैसे शाश्वत मूल्य समाज को दिए। भारतीयों ने गांधी जी के नेतृत्व से आश्वस्त होकर उन्हें पूर्ण सहयोग दिया। इसी अद्भुत क्षमता के कारण ही गांधी जी देश को आज़ाद करवाने में सफल हुए थे।
Q2. आपके विचार से कौन-से ऐसे मूल्य हैं जो शाश्वत हैं? वर्तमान समय में इन मूल्यों की प्रांसगिकता स्पष्ट कीजिए।
Answer: मेरे विचार में सत्य अहिंसा, परोपकार त्याग, समानता, करुणा आदि शाश्वत मूल्य हैं। वर्तमान समय में लोगों में स्वार्थपरता, आत्मकेंद्रितता, वैचारिक संकीर्णता, ऊँच-नीच की भावना आदि बढ़ी है। समता और समरसता की भावना कहीं खो-सी गई है। आज सत्य की जगह असत्य का अहिंसा की जगह हिंसा का, त्याग की जगह छीना-झपटी का बोलबाला है। सामाजिक समरसता कहीं खो-सी गई है। लोग एक दूसरे पर हावी होना चाहते हैं ऐसे में एक स्वस्थ और आदर्श समाज के निर्माण सत्य, अहिंसा, त्याग, परोपकार, विश्व बंधुत्व की भावना आदि मूल्यों की अत्यंत आवश्यकता है। ऐसे में इनकी प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है।
Q4. शुद्ध सोने में ताबे की मिलावट या ताँबें में सोना, गाँधीजी के आदर्श और व्यवहार के संदर्भ में यह बात किस तरह झलकती है?स्पष्ट कीजिए।
Answer: गाँधीजी जी के द्वारा जीवन भर सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए उनका पालन किया गया। वे आदर्शों को उंचाई तक ले जाते हैं अर्थात जिस प्रकार सोने में तांबे की मिलावट होने पर उसकी कीमत नहीं कम होती। बल्कि तांबे में सोना मिलने के पश्चात तांबे की कीमत और अधिक बढ़ जाती है। उसी प्रकार से गाँधीजी व्यवहारिकता की कीमत जानते थे। वे अपना विलक्षण आदर्श चला सके क्योंकि वह व्यवहारिकता की कीमत जानते हैं।परंतु अपने आदर्शों को व्यावहारिकता के स्वर पर उतरने नहीं देते थे।
Q5. गिरगिट कहानी में आपने समाज में व्याप्त अवसरानुसार अपने व्यवहार को पल-पल में बदल डालने की एक बानगी देखी। इस पाठ के अंश ‘गिन्नी का सोना’ का संदर्भ में स्पष्ट कीजिए कि ‘अवसरवादिता’ और ‘व्यवहारिकता’ इनमें से जीवन में किसका महत्व है?
Answer: गिन्नी का सोना पाठ के आधार पर यह स्पष्ट है कि जीवन में आदर्शवादिता का ही अधिक महत्त्व है।अवसरवादी व्यक्ति सदा अपना हित देखता है। गिरगिट कहानी में स्वार्थी इंस्पेक्टर पल-पल बदलता है। वह अवसर के अनुसार अपना व्यवहार बदल लेता है। ‘गिन्नी का सोना’ कहानी में इस बात पर बल दिया गया है कि आदर्श शुद्ध सोने के समान हैं। इसमें व्यवाहिरकता का ताँबा मिलाकर उपयोगी बनाया जा सकता है। केवल व्यवहारवादी लोग गुणवान लोगों को भी पीछे छोड़कर आगे बढ़ जाते हैं। यदि समाज का हर व्यक्ति आदर्शों को छोड़कर आगे बढ़ें तो समाज विनाश की ओर जा सकता है। समाज की उन्नति सही मायने में वहीं मानी जा सकती है जहाँ नैतिकता का विकास, जीवन के मूल्यों का विकास हो।
Q6. लेखक के मित्र ने मानसिक रोग के क्या-क्या कारण बताए? आप इन कारणों से कहाँ तक सहमत हैं?
Answer: लेखक के मित्र ने मानसिक रोग के कारण बताएँ हैं कि मनुष्य चलता नहीं दौड़ता है, बोलता नहीं बकता है, एक महीने का काम एक दिन में करना चाहता है, दिमाग हज़ार गुना अधिक गति से दौड़ता है। अतरू तनाव बढ़ जाता है। मानसिक रोगों का प्रमुख कारण प्रतिस्पर्धा के कारण दिमाग का अनियंत्रित गति से कार्य करना है।
Q7. लेखक के अनुसार सत्य केवल वर्तमान है, उसी में जीना चाहिए। लेखक ने ऐसा क्यों कहा होगा? स्पष्ट कीजिए।
Answer: लेखक का मानना है कि भूतकाल तो बीत चुका है। उसकी अच्छी या बुरी बातें याद करने से मनुष्य को दुख होता है। वह तनाव में जीता है। इसी प्रकार भविष्य जो न तो हमारे सामने है और न जिसे हमने देखा है के बारे में रंगीन कल्पनाएँ। हमारे वर्तमान के दुख को बढ़ाती हैं। वे सच भी नहीं होती हैं। वर्तमान काल हमारे सामने होता है। हम उसी में जीते हैं। यही वास्तविक और सत्य है। वर्तमान काल की वास्तविकता और सत्यता देखकर ही लेखक ने ऐसा कहा होगी।
(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए –
Q1. समाज के पास अगर शाश्वत मुल्यों जैसा कुछ है तो वह आर्दशवादी लोगों का ही दिया हुआ है।
Answer: आदर्शवादी लोग समाज को आदर्श रूप में रखने वाली राह बताते हैं। व्यवहारिक आदर्शवाद वास्तव में व्यवहारिकता ही है। उसमें आदर्शवाद कहीं नहीं होता है।
Q2. जब व्यवहारिकता का बखान होने लगता है तब प्रेक्टिकल आइडियालिस्टों के जीवन से आदर्श धीरे-धीरे पीछे हटने लगते हैं और उनकी व्यवहारिक सूझ-बूझ ही आगे आने लगती है?
Answer: जब आदर्श और व्यवहार में से लोग व्यावहारिकता को प्रमुखता देने लगते हैं और आदर्शों को भूल जाते हैं तब आदर्शों पर व्यावहारिकता हावी होने लगती है। “प्रैक्टिकल आइडियालिस्टक” लोगों के जीवन में स्वार्थ व अपनी लाभ-हानि की भावना उजागर हो जाती है। ‘प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट’ एक ऐसा व्यक्तित्व है जिसमें आदर्श एवं व्यवहार का संतुलन होता है लेकिन यदि आज के समाज को ध्यान में रखे तो इस शब्द में व्यावहारिकता को इतना महत्त्व दे दिया जाता है कि उसकी आदर्शवादी विचारधारा अदृश्य होकर केवल व्यावहारिकता के रूप में ही दिखाई देने लगती है। आदर्श व्यवहार के उस स्तर पर जाकर अपनी गुणवत्ता खो देता है और धीरे-धीरे आदर्श मूल व्यवहार के हाथों समाप्त हो जाता है।
Q3. हमारे जीवन की रफ़्तार बढ़ गई है। यहाँ कोई चलता नहीं बल्कि दौड़ता है। कोई बोलता नहीं, बकता है। हम जब अकेले पड़ते हैं तब अपने आपसे लगातार बड़बड़ाते रहते हैं।
Answer: लेखक जापानियों की मनोदशा का वर्णन करते हुए कहते हैं कि जापान के लोगों के जीवन की गति इतनी तीव्र हो गई है कि यहाँ लोग सामान्य जीवन जीने की बजाए असामान्य होते जा रहे हैं। वे चलने की बजाए दौड़ने लगे हैं। वे बोलने की बजाए बकने लगे हैं। अकेले में बड़बड़ाते रहते हैं क्योंकि उनमें प्रत्येक कार्य में अमेरिका से आगे निकलने की प्रतिस्पर्धा की भावना घर कर गई है। इसी कारण वे तनावपूर्ण जीवन व्यतीत करते हैं।
Q4. सभी क्रियाएँ इतनी गरिमापूर्ण ढंग से कीं कि उसकी हर भंगिमा से लगता था मानो जयजयवंती के सुर गूँज रहे हों।
Answer: चाय परोसने वाले ने सभी क्रियाएं इतनी गरिमा पूर्ण तरीके से की जैसे झुककर नमन करना बरतन साफ करना, फिर उनमें चाय डालना। सभी शांतिपूर्ण और सुंदरता से किए उसे देख कर ऐसा लग रहा था मानो कोई कलाकार बड़े ही सुन्दर सुर में गीत गा रहा हो ।
भाषा अध्यन
Q1. नीचे दिए गए शब्दों का वाक्यों में प्रयोग किजिए −
व्यावहारिकता, आदर्श, सूझबूझ, विलक्षण, शाश्वत
Answer:
(क) व्यावहारिकता − दादाजी की व्यावहारिकता सीखने योग्य है।
(ख) आदर्श − आज के युग में गाँधी जैसे आदर्शवादिता की ज़रूरत है।
(ग) सूझबूझ − उसकी सूझबूझ ने आज मेरी जान बचाई।
(घ) विलक्षण − महेश की अपने विषय में विलक्षण प्रतिभा है।
(ङ) शाश्वत − सत्य, अहिंसा मानव जीवन के शाश्वत नियम हैं।
Q2. नीचे दिए गए द्वंद्व समास का विग्रह कीजिए −
(क) माता-पिता = ……………….
(ख) पाप-पुण्य = ……………….
(ग) सुख-दुख = ……………….
(घ) रात-दिन = ……………….
(ङ) अन्न-जल = ……………….
(च) घर-बाहर = ……………….
(छ) देश-विदेश = ……………….
Answer: (क) माता-पिता = माता और पिता
(ख) पाप-पुण्य = पाप और पुण्य
(ग) सुख-दुख = सुख और दुख
(घ) रात-दिन = रात और दिन
(ङ) अन्न-जल = अन्न और जल
(च) घर-बाहर = घर और बाहर
(छ) देश-विदेश = देश और विदेश
Q3. नीचे दिए गए विशेषण शब्दों से भाववाचक संज्ञा बनाइए −
(क) सफल = ……………..
(ख) विलक्षण =……………..
(ग) व्यावहारिक =……………..
(घ) सजग =……………..
(ङ) आर्दशवादी =……………..
(च) शुद्ध =……………..
Answer: (क) सफल = सफलता
(ख) विलक्षण = विलक्षणता
(ग) व्यावहारिक = व्यावहारिकता
(घ) सजग = सजगता
(ङ) आर्दशवादी = आर्दशवादिता
(च) शुद्ध = शुद्धता
Q4. नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित अंश पर ध्यान दीजिए और शब्द के अर्थ को समझिए − शुद्ध सोना अलग है।
बहुत रात हो गई अब हमें सोना चाहिए।
ऊपर दिए गए वाक्यों में ‘सोना’ का क्या अर्थ है? पहले वाक्य में ‘सोना’ का अर्थ है धातु ‘स्वर्ण’। दुसरे वाक्य में ‘सोना’ का अर्थ है ‘सोना’ नामक क्रिया। अलग-अलग संदर्भों में ये शब्द अलग अर्थ देते हैं अथवा एक शब्द के कई अर्थ होते हैं। ऐसे शब्द अनेकार्थी शब्द कहलाते हैं। नीचे दिए गए शब्दों के भिन्न-भिन्न अर्थ स्पष्ट करने के लिए उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए −
उत्तर, कर, अंक, नग
Answer: (क) उत्तर – मैंने सभी प्रश्नों के उत्तर लिख लिए हैं।
तुम्हें उत्तर दिशा में जाना है।
(ख) कर – हमने सभी कर चुका दिए हैं।
मंत्री जी ने अपने कर कमलों से दीप प्रज्ज्वलित किया।
(ग) अंक – राम के परीक्षा में अच्छे अंक आए हैं।
बच्चा अपनी माँ की अंक में बैठा है।
(घ) नग – हीरा एक कीमती नग है।
हिमालय एक बड़ा नग है।
Q5. नीचे दिए गए वाक्यों को संयुक्त वाक्य में बदलकर लिखिए −
(क) 1. अँगीठी सुलगायी।
- उस पर चायदानी रखी।
(ख) 1. चाय तैयार हुई। - उसने वह प्यालों में भरी।
(ग) 1. बगल के कमरे से जाकर कुछ बरतन ले आया। - तौलिये से बरतन साफ़ किए।
Answer: (क) अँगीठी सुलगायी और उसपर चायदानी रखी।
(ख) चाय तैयार हुई और उसने वह प्यालों में भरी।
(ग) बगल के कमरे में जाकर कुछ बरतन ले आया और तौलिए से बरतन साफ़ किए।
Q6. नीचे दिए गए वाक्यों से मिश्र वाक्य बनाइए −
(क) 1. चाय पीने की यह एक विधि है।
- जापानी में उसे चा-नो-यू कहते हैं।
(ख) 1. बाहर बेढब-सा एक मिट्टी का बरतन था। - उसमें पानी भरा हुआ था।
(ग) 1. चाय तैयार हुई। - उसने वह प्यालों में भरी।
- फिर वे प्याले हमारे सामने रख दिए।
Answer: (क) यह चाय पीने की एक विधि है जिसे जापानी चा-नो-यू कहते हैं।
(ख) बाहर बेढब सा एक मिट्टी का बरतन था जिसमें पानी भरा हुआ था।
(ग) जब चाय तैयार हुई तो उसने प्यालों में भरकर हमारे सामने रख दी।
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