रैदास के पद NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh Chapter 9 with Answers

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sparsh with Answers

CBSE Solutions Class 9 Hindi रैदास के पद

Page No. 89

प्रश्न अभ्यास

Q1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए −

(क) पहले पद में भगवान और भक्त की जिन-जिन चीज़ों से तुलना की गई है, उनका उल्लेख कीजिए।

Answer: पहले पद में भगवा और भक्त की तुलना निम्नलिखित चीजों से की गई है –

चंदन – पानी
घन – वन – मोर
चंद्र-चौकोर
दीपक – बाती
मोती – धागा
सोना – सुहागा

(ख) पहले पद की प्रत्येक पंक्ति के अंत में तुकांत शब्दों के प्रयोग से नाद-सौंदर्य आ गया है, जैसे- पानी, समानी आदि। इस पद में से अन्य तुकांत शब्द छाँटकर लिखिए।

Answer: नाद सौंदर्य प्रस्तुत करने वाले इस पद के अन्य शब्द हैं- मोरा-चकोरा, बाती-राती, धागा-सुहागा, दासा-रैदासा।

ग) पहले पद में कुछ शब्द अर्थ की दृष्टि से परस्पर संबद्ध हैं। ऐसे शब्दों को छाँटकर लिखिए- .

दीपक बाती
……………. …………….
…………… ……………
…………… ……………
…………… ……………

Answer: पहले पद में अर्थ की दृष्टि से परस्पर संबद्ध पद हैं-

चंदन – पानी
दीपक – बाती
घन – मोर
मोती – धागा
चाँद – चकोर
सोना – सोहागा
स्वामी – दास

(घ) दूसरे पद में कवि ने ‘गरीब निवाजु’ किसे कहा है? स्पष्ट कीजिए।

Answer: दूसरे पद में कवि ने अपने प्रभु को ‘गरीब निवाजु’ कहा है। इसका अर्थ है-दीन-दुखियों पर दया करने वाला। प्रभु ने रैदास जैसे अछूत माने जाने वाले प्राणी को संत की पदवी प्रदान की। रैदास जन-जन के पूज्य बने। उन्हें महान संतों जैसा सम्मान मिला। रैदास की दृष्टि में यह उनके प्रभु की दीन-दयालुता और अपार कृपा ही है।

(ङ) दूसरे पद की ‘जाकी छोति जगत कउ लागै ता पर तुहीं ढरै’ इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

Answer: जाकी छोति जगत कउ लागै’ का अर्थ है जिसकी छूत संसार के लोगों को लगती है और ‘ता पर तुहीं ढरै’ का अर्थ है उन पर तू ही (दयालु) द्रवित होता है। पूरी पंक्ति का अर्थ है गरीब और निम्नवर्ग के लोगों को समाज सम्मान नहीं देता। उनसे दूर रहता है। परन्तु ईश्वर कोई भेदभाव न करके उन पर दया करते हैं, उनकी मद्द करते हैं, उनकी पीड़ा हरते हैं।

(च) ‘रैदास’ ने अपने स्वामी को किन-किन नामों से पुकारा है?

Answer: रैदास ने अपने स्वामी को गरीब निवाजु, गुसाईं हरिजीउ आदि नामों से पुकारा है।

(छ) निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप लिखिए −
मोरा, चंद, बाती, जोति, बरै, राती, छत्रु, धरै, छोति, तुहीं, गुसइआ

Answer:

प्रयुक्त रूप प्रचलित रूप

मोरा – मोर
चंद चाँद
बाती – बत्ती
जोति – ज्योति
बरै – जलै
राती – रात्रि, रात
छत्रु – छत्र, छाता
धरै – धारण करे
छोति – छूते
तुहीं – तुम्हीं
गुसईआ – गोसाईं।

Q2. नीचे लिखी पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए −

(क) जाकी अँग-अँग बास समानी

Answer: कवि के अंग-अंग मे राम-नाम की सुगंध व्याप्त हो गई है। जैसे चंदन के पानी में रहने से पानी में उसकी सुगंध फैल जाती है, उसी प्रकार राम नाम के लेप की सुगन्धि उसके अंग-अंग में समा गयी है।

(ख) जैसे चितवत चंद चकोरा

Answer: चकोर पक्षी अपने प्रिय चाँद को एकटक निहारता रहता है, उसी तरह कवि अपने प्रभु राम को भी एकटक निहारता रहता है। इसीलिए कवि ने अपने को चकोर कहा है।

(ग) जाकी जोति बरै दिन राती

Answer: इसका भाव यह है कि जिस तरह चंदन के पानी में मिलने से उसकी सुगंध पूरे पानी में फैल जाती है उसी प्रकार भक्त यानी रैदास जी के रोम रोम में प्रभु यानी श्रीराम की भक्ति समा चुकी है।

(घ) ऐसी लाल तुझ बिनु कउनु करै

Answer: भगवान को लाल कहा है कि भगवान ही सबका कल्याण करता है इसके अतिरिक्त कोई ऐसा नहीं है जो गरीबों को ऊपर उठाने का काम करता हो।

(ङ) नीचहु ऊच करै मेरा गोबिंदु काहू ते न डरै

Answer: कवि का कहना है कि ईश्वर हर कार्य को करने में समर्थ हैं। वे नीच को भी ऊँचा बना लेता है। उनकी कृपा से निम्न जाति में जन्म लेने के उपरांत भी उच्च जाति जैसा सम्मान मिल जाता है।

Q3. रैदास के इन पदों का केंद्रीय भाव अपने शब्दों में लिखिए।

Answer: पहले पद का केंद्रिय भाव − जब भक्त के ह्रदय में एक बार प्रभु नाम की रट लग जाए तब वह छूट नहीं सकती। कवि ने भी प्रभु के नाम को अपने अंग-अंग में समा लिया है। वह उनका अनन्य भक्त बन चुका है। भक्त और भगवान दो होते हुए भी मूलत: एक ही हैं। उनमें आत्मा परमात्मा का अटूट संबंध है। दूसरे पद में − प्रभु सर्वगुण सम्पन्न सर्वशक्तिमान हैं। वे निडर है तथा गरीबों के रखवाले हैं। ईश्वर अछूतों के उद्धारक हैं तथा नीच को भी ऊँचा बनाने वाले हैं।

योग्यता-विस्तार

Q1. भक्त कवि कबीर, गुरु नानक, नामदेव और मीराबाई की रचनाओं का संकलन कीजिए। |

Answer: कबीर, नानक और नामदेव की वाणी गुरु ग्रंथ साहिब में से पढ़े। मीराबाई के पद पाठ्यक्रम की पुस्तकें खोजकर पढ़ें।

Q2. पाठ में आए दोनों पदों को याद कीजिए और कक्षा में गाकर सुनाइए।

Answer: Do Yourself

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