यमराज की दिशा NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 16 with Answers

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NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kshitij with Answers

CBSE Solutions Class 9 Hindi यमराज की दिशा

Page No. 135

प्रश्न अभ्यास

Q1. कवि को दक्षिण दिशा पहचानने में कभी मुश्किल क्यों नही हुई?

Answer: कवि ने बचपन में माँ से सीखा था कि दक्षिण दिशा में यमराज का घर होता है और वहाँ पर पैर करके सोना यमराज को नाराज़ करने के समान है। माँ द्वारा मिली इसी सीख के कारण कवि को कभी दक्षिण दिशा पहचानने में मुश्किल नहीं हुई।

Q2. कवि ने ऐसा क्यों कहा कि दक्षिण को लाँघ लेना संभव नहीं था ?

Answer: बचपन से ही उनके मन में यह अवधारणा बन गई थी कि दक्षिण दिशा की ओर पैर करके सोने से मृत्यु की प्राप्ति होती है। मृत्यु के भय से कवि का मन आजीवन आशंकित रहा। इसी कारणवश दक्षिण दिशा को लाँघना कवि के लिए संभव नहीं था।

Q3. कवि के अनुसार आज हर दिशा दक्षिण दिशा क्यों हो गई है?

Answer: हाँ पर कवि ने हर दिशा की तुलना दक्षिण दिशा इसलिए की हैं दक्षिण दिशा का आशय मृत्यु की दिशा से है, यह दिशा यमराज का घर हैं। समाज में चारों ओर हिंसा, असंतोष का बोल-बाला हैं। कोई भी इससे अछुता नही है। एक ओर जहाँ विज्ञान ने आविष्कारों द्वारा समाज को प्रगतिशील बनाया है वही उसका यह आविष्कार समाज के लिए एक विस्फोट साबित हो रहा हैं। विध्वंसक हथियारों द्वारा चारों ओर हिंसा और आंतक फ़ैल रहा हैं। एक देश दूसरे देश का दुश्मन बनता जा रहा हैं। कोई भी स्थान संसार में सुरक्षित नही रह गया है। संसार के हर एक कोने में मौत अपना डेरा जमाए बैठी है।कवि सभ्यता के विकास की इसी खतरनाक दिशा के कारण कह रहा है कि आज हर दिशा दक्षिण दिशा बन गई है।

Q4. भाव स्पष्ट कीजिए –

सभी दिशाओं में यमराज के आलीशान महल हैं
और वे सभी में एक साथ
अपनी दहकती आँखों सहित विराजते हैं

Answer: आज हम संसार के सभी कोने में असुरक्षित हैं। आतंक तथा हिंसा ने यमराज के रुप में आज संपूर्ण सृष्टि पर अपना कब्जा कर लिया है। केवल यमराज का चेहरा बदल गया है। वह आज नए-नए रुपों में हमारे प्राण लेने के लिए सर्वत्र हैं।

Q5. कवि की माँ ईश्वर से प्रेरणा पाकर उसे कुछ मार्ग-निर्देश देती है। आपकी माँ भी समय-समय पर आपको सीख देती होंगी

(क) वह आपको क्या सीख देती हैं?

Answer: कवि की माँ की ही तरह मेरी माँ भी सत्य बोलने, बड़ों का कहना मानने अत्याचार का सामना करने अपने आसपास साफ़-सफ़ाई रखने तथा ईश्वर पर भरोसा बनाए रखने की सीख देती है।

(ख) क्या उसकी हर सीख आपको उचित जान पड़ती है? यदि हाँ तो क्यों और नहीं तो क्यों नहीं?

Answer: हाँ, मुझे अपनी माँ की सीख उचित जान पड़ती है। इसका कारण यह है कि दुनिया की हर माँ अपनी संतान की सदा भलाई चाहती है। उसे दुनियादारी की समझ संतान से अधिक होती है। वह अपने अनुभव की सीख संतान तक पहुँचाना चाहती है इसलिए उसकी सीख उचित होती है।

Q6. कभी-कभी उचित-अनुचित निर्णय के पीछे ईश्वर का भय दिखाना आवश्यक हो जाता है, इसके क्या कारण हो सकते हैं ?

Answer: कभी-कभी उचित-अनुचित निर्णय के पीछे ईश्वर का भय दिखाना इसलिए आवश्यक हो जाता है क्योंकि मानव मन अशुभ की भावना से बहुत डरता है। ईश्वर का भय व्यक्ति को बुरे कर्म करने से भयभीत करता है। वह सेचता है कि उसके हाथ से कोई अशुभ या बुरा कर्म न हो ताकि उसे ईश्वरीय दंड का भागीदार न बनना पड़े।

पाठेतर सक्रियता

  • कवि का मानना है कि आज शोषणकारी ताकतें अधिक हावी हो रही हैं। ‘आज की शोषणकारी शक्तियाँ’ विषय . पर एक अनुच्छेद लिखिए।
    (आप शिक्षकों, सहपाठियों, पड़ोसियों, पुस्तकालय आदि से मदद ले सकते हैं।)

Answer: कवि की यह बात सही है कि आज शोषणकारी शक्तियाँ बहुत अधिक हावी हो चुकी हैं। धीरे-धीरे यह शोषण बढ़ता ही जा रहा है। कहने को यह समाज सभ्य है। परंतु हमारी सभ्यता संस्कारों पर नहीं, शोषण पर टिकी है। आज उसी को श्रेष्ठ माना जा रहा है जिसके पास बंगला, कोठी, कार है; जिसके बच्चे ऊँचे स्कूलों में पढ़ते हैं। लोग यह नहीं देखते कि उसके पास यह धन कहाँ से आया है। इसलिए बड़े-बड़े धनपतियों की खूब पूजा हो रही है। वे चुनाव जीत रहे हैं और समाज के महापुरुष बने हुए हैं।

इसके विपरीत, ईमानदार व्यक्ति धक्के खा रहे हैं। उनकी मजाक उड़ाई जा रही है। यह देखकर हर आदमी अपने आदर्श बदल रहा है। वह सेवा, त्याग को आदर्श तजकर व्यवसायी बनता जा रहा है। इसी व्यावसायिकता में शोषण छिंपा है। व्यवसायी व्यक्ति सोचता है कि मैं कैसे और अधिक धन कमा लें। अधिक धन कमाने की हर युक्ति शोषण को बढ़ावा देती है। अत: आज चप्पे-चप्पे पर शोषणकर्ता मिलते हैं। न केवल हमें शोषणकर्ता मिलते हैं, बल्कि बदले में हम भी औरों का शोषण करने की सोचने लगते हैं। किसी कवि ने सच कहा है-

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